26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बड़ा फैसला: आंध्र प्रदेश परिषद अध्यक्ष ने वेंकटरमना का MLC इस्तीफा किया खारिज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बड़ा फैसला: आंध्र प्रदेश परिषद अध्यक्ष ने वेंकटरमना का MLC इस्तीफा किया खारिज

सारांश

आंध्र प्रदेश विधान परिषद अध्यक्ष के. मोशेन राजू ने एमएलसी जयमंगला वेंकटरमना का इस्तीफा खारिज कर दिया। नवंबर 2024 से लंबित यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा था। पांच अन्य वाईएसआरसीपी एमएलसी के इस्तीफे भी अभी लंबित हैं।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश विधान परिषद अध्यक्ष के.
मोशेन राजू ने 23 अप्रैल 2026 को एमएलसी जयमंगला वेंकटरमना का इस्तीफा आधिकारिक रूप से खारिज किया।
वेंकटरमना ने नवंबर 2024 में वाईएसआरसीपी छोड़कर उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की जन सेना पार्टी में शामिल होने के साथ इस्तीफा दिया था।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 27 नवंबर 2025 को परिषद अध्यक्ष की देरी को 'गैर-कानूनी और मनमाना' करार देते हुए चार सप्ताह में निर्णय का निर्देश दिया था।
इस्तीफा इस आधार पर खारिज किया गया कि नोटिस के जवाब में दी गई सफाई संतोषजनक नहीं थी।
पांच अन्य वाईएसआरसीपी एमएलसी — पोथुला सुनीता, बी.
कल्याण चक्रवर्ती, पद्मश्री और मारी राजशेखर — के इस्तीफे अभी भी लंबित हैं।
उपाध्यक्ष जकिया खानम ने परिषद अध्यक्ष की सलाह पर अपना इस्तीफा वापस लिया क्योंकि उनके कार्यकाल के केवल छह महीने शेष थे।

अमरावती, 23 अप्रैल: आंध्र प्रदेश विधान परिषद के सभापति के. मोशेन राजू ने गुरुवार को एमएलसी जयमंगला वेंकटरमना का विधान परिषद सदस्य पद से दिया गया इस्तीफा आधिकारिक रूप से अस्वीकार कर दिया। यह इस्तीफा नवंबर 2024 से लंबित था और इस मामले में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था। परिषद अध्यक्ष ने इस्तीफा इस आधार पर खारिज किया कि नोटिस के जवाब में दी गई सफाई संतोषजनक नहीं थी।

इस्तीफे की पूरी पृष्ठभूमि

जयमंगला वेंकटरमना को 2023 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के टिकट पर आंध्र प्रदेश विधान परिषद के लिए चुना गया था। 23 नवंबर, 2024 को उन्होंने वाईएसआरसीपी से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के नेतृत्व वाली जन सेना पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने अपना एमएलसी पद भी छोड़ने का ऐलान किया।

हालांकि, जब इस्तीफे पर फैसला लेने में अनावश्यक देरी होती रही, तो वेंकटरमना ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने परिषद अध्यक्ष द्वारा इस्तीफे पर फैसला लेने में की गई लंबी देरी को 'गैर-कानूनी, मनमाना और प्रक्रिया का दुरुपयोग' करार दिया।

हाई कोर्ट का निर्देश और सरकार की स्थिति

27 नवंबर, 2025 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने परिषद अध्यक्ष मोशेन राजू को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे इस्तीफे की जांच पूरी करके चार सप्ताह के भीतर अपना निर्णय सुनाएं। इसके बाद सरकारी वकील ने भी हाई कोर्ट को आश्वस्त किया था कि तीन सप्ताह के भीतर इस मामले में निर्णय ले लिया जाएगा।

अंततः परिषद अध्यक्ष ने इस्तीफे को अस्वीकार करते हुए कहा कि नोटिस के जवाब में वेंकटरमना ने जो स्पष्टीकरण दिया, वह पर्याप्त और संतोषजनक नहीं था।

पांच अन्य एमएलसी के इस्तीफे भी लंबित

वेंकटरमना अकेले नहीं हैं जिनका इस्तीफा परिषद अध्यक्ष के पास लंबित था। पांच अन्य एमएलसी के इस्तीफे भी इसी तरह अनिर्णीत अवस्था में थे। ये सभी वाईएसआरसीपी के टिकट पर चुने गए थे, लेकिन 2024 में पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद इन्होंने अपने इस्तीफे सौंप दिए थे।

इनमें परिषद की उपाध्यक्ष जकिया खानम, पोथुला सुनीता, बी. कल्याण चक्रवर्ती, पद्मश्री और मारी राजशेखर शामिल हैं। इन सभी ने दिसंबर 2024 में परिषद अध्यक्ष मोशेन राजू से मुलाकात कर अपने इस्तीफों पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया था।

जकिया खानम ने वापस लिया इस्तीफा

उल्लेखनीय है कि उपाध्यक्ष जकिया खानम ने परिषद अध्यक्ष की सलाह पर अपना इस्तीफा वापस ले लिया। उन्हें यह सलाह इसलिए दी गई क्योंकि उनके कार्यकाल के मात्र छह महीने शेष बचे थे, ऐसे में इस्तीफे का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं था।

राजनीतिक विश्लेषण: दलबदल और परिषद की भूमिका

यह मामला आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति को उजागर करता है। 2024 के विधानसभा चुनावों में वाईएसआरसीपी की करारी हार के बाद पार्टी के कई विधायक और एमएलसी सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर आकर्षित हुए। इस्तीफों पर देरी से निर्णय लेना और फिर उन्हें खारिज करना यह सवाल उठाता है कि क्या परिषद की कार्यवाही पूरी तरह निष्पक्ष है।

हाई कोर्ट द्वारा देरी को 'मनमाना' बताना और फिर भी इस्तीफा खारिज होना — यह विरोधाभास राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। शेष पांच एमएलसी के इस्तीफों पर अब क्या निर्णय होगा, यह आंध्र प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह परिषद अध्यक्ष की निष्पक्षता पर संदेह पैदा करता है। वाईएसआरसीपी के सत्ता से बाहर होते ही उसके जनप्रतिनिधियों का सत्तारूढ़ दल की ओर पलायन और फिर इस्तीफों पर अनिश्चितता — यह आंध्र की लोकतांत्रिक संस्कृति की कमज़ोरी को दर्शाता है। शेष पांच एमएलसी के मामलों में परिषद अध्यक्ष का रवैया यह तय करेगा कि यह संस्था राजनीतिक दबाव से मुक्त है या नहीं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश विधान परिषद अध्यक्ष ने किसका इस्तीफा खारिज किया?
परिषद अध्यक्ष के. मोशेन राजू ने एमएलसी जयमंगला वेंकटरमना का इस्तीफा खारिज कर दिया। यह इस्तीफा नवंबर 2024 से लंबित था और इसे नोटिस के जवाब में असंतोषजनक सफाई के आधार पर अस्वीकार किया गया।
जयमंगला वेंकटरमना ने MLC पद से इस्तीफा क्यों दिया था?
वेंकटरमना 2023 में वाईएसआरसीपी के टिकट पर एमएलसी चुने गए थे। 2024 में पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद उन्होंने वाईएसआरसीपी और एमएलसी पद दोनों से इस्तीफा देकर जन सेना पार्टी में शामिल होने की घोषणा की।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा था?
हाई कोर्ट ने परिषद अध्यक्ष की देरी को 'गैर-कानूनी, मनमाना और प्रक्रिया का दुरुपयोग' बताया था। 27 नवंबर 2025 को कोर्ट ने चार सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
आंध्र प्रदेश परिषद में और कितने एमएलसी के इस्तीफे लंबित हैं?
पांच अन्य एमएलसी — पोथुला सुनीता, बी. कल्याण चक्रवर्ती, पद्मश्री, मारी राजशेखर और पूर्व में जकिया खानम — के इस्तीफे लंबित थे। जकिया खानम ने बाद में अपना इस्तीफा वापस ले लिया।
जकिया खानम ने अपना इस्तीफा वापस क्यों लिया?
परिषद अध्यक्ष मोशेन राजू की सलाह पर जकिया खानम ने इस्तीफा वापस लिया क्योंकि उनके कार्यकाल के केवल छह महीने शेष बचे थे। इस स्थिति में इस्तीफे का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले