बड़ा फैसला: आंध्र प्रदेश परिषद अध्यक्ष ने वेंकटरमना का MLC इस्तीफा किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
अमरावती, 23 अप्रैल: आंध्र प्रदेश विधान परिषद के सभापति के. मोशेन राजू ने गुरुवार को एमएलसी जयमंगला वेंकटरमना का विधान परिषद सदस्य पद से दिया गया इस्तीफा आधिकारिक रूप से अस्वीकार कर दिया। यह इस्तीफा नवंबर 2024 से लंबित था और इस मामले में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था। परिषद अध्यक्ष ने इस्तीफा इस आधार पर खारिज किया कि नोटिस के जवाब में दी गई सफाई संतोषजनक नहीं थी।
इस्तीफे की पूरी पृष्ठभूमि
जयमंगला वेंकटरमना को 2023 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के टिकट पर आंध्र प्रदेश विधान परिषद के लिए चुना गया था। 23 नवंबर, 2024 को उन्होंने वाईएसआरसीपी से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के नेतृत्व वाली जन सेना पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने अपना एमएलसी पद भी छोड़ने का ऐलान किया।
हालांकि, जब इस्तीफे पर फैसला लेने में अनावश्यक देरी होती रही, तो वेंकटरमना ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने परिषद अध्यक्ष द्वारा इस्तीफे पर फैसला लेने में की गई लंबी देरी को 'गैर-कानूनी, मनमाना और प्रक्रिया का दुरुपयोग' करार दिया।
हाई कोर्ट का निर्देश और सरकार की स्थिति
27 नवंबर, 2025 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने परिषद अध्यक्ष मोशेन राजू को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे इस्तीफे की जांच पूरी करके चार सप्ताह के भीतर अपना निर्णय सुनाएं। इसके बाद सरकारी वकील ने भी हाई कोर्ट को आश्वस्त किया था कि तीन सप्ताह के भीतर इस मामले में निर्णय ले लिया जाएगा।
अंततः परिषद अध्यक्ष ने इस्तीफे को अस्वीकार करते हुए कहा कि नोटिस के जवाब में वेंकटरमना ने जो स्पष्टीकरण दिया, वह पर्याप्त और संतोषजनक नहीं था।
पांच अन्य एमएलसी के इस्तीफे भी लंबित
वेंकटरमना अकेले नहीं हैं जिनका इस्तीफा परिषद अध्यक्ष के पास लंबित था। पांच अन्य एमएलसी के इस्तीफे भी इसी तरह अनिर्णीत अवस्था में थे। ये सभी वाईएसआरसीपी के टिकट पर चुने गए थे, लेकिन 2024 में पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद इन्होंने अपने इस्तीफे सौंप दिए थे।
इनमें परिषद की उपाध्यक्ष जकिया खानम, पोथुला सुनीता, बी. कल्याण चक्रवर्ती, पद्मश्री और मारी राजशेखर शामिल हैं। इन सभी ने दिसंबर 2024 में परिषद अध्यक्ष मोशेन राजू से मुलाकात कर अपने इस्तीफों पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया था।
जकिया खानम ने वापस लिया इस्तीफा
उल्लेखनीय है कि उपाध्यक्ष जकिया खानम ने परिषद अध्यक्ष की सलाह पर अपना इस्तीफा वापस ले लिया। उन्हें यह सलाह इसलिए दी गई क्योंकि उनके कार्यकाल के मात्र छह महीने शेष बचे थे, ऐसे में इस्तीफे का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं था।
राजनीतिक विश्लेषण: दलबदल और परिषद की भूमिका
यह मामला आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति को उजागर करता है। 2024 के विधानसभा चुनावों में वाईएसआरसीपी की करारी हार के बाद पार्टी के कई विधायक और एमएलसी सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर आकर्षित हुए। इस्तीफों पर देरी से निर्णय लेना और फिर उन्हें खारिज करना यह सवाल उठाता है कि क्या परिषद की कार्यवाही पूरी तरह निष्पक्ष है।
हाई कोर्ट द्वारा देरी को 'मनमाना' बताना और फिर भी इस्तीफा खारिज होना — यह विरोधाभास राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। शेष पांच एमएलसी के इस्तीफों पर अब क्या निर्णय होगा, यह आंध्र प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।