पाकिस्तानी हमलों से अफगानिस्तान के कुनार में तबाही, सैकड़ों परिवार बेघर

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पाकिस्तानी हमलों से अफगानिस्तान के कुनार में तबाही, सैकड़ों परिवार बेघर

सारांश

पाकिस्तानी सेना के हमलों से अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में भारी तबाही। नूरिस्तान में 1,36,000 लोग खाद्य संकट में, 9 प्रांतों में 27,000 से अधिक परिवार विस्थापित। तालिबान ने पाकिस्तान पर संप्रभुता उल्लंघन का आरोप लगाया।

Key Takeaways

  • पाकिस्तानी सेना ने 23 अप्रैल को कुनार प्रांत के सरकानो जिले पर ताजा हमले किए, कई घर क्षतिग्रस्त हुए।
  • नूरिस्तान प्रांत में 17,000 परिवारों के 1,36,000 लोग गंभीर खाद्य संकट में हैं — आईसीआरएस के अनुसार।
  • 9 प्रांतों में 27,000 से अधिक अफगान परिवार पाकिस्तानी हमलों के कारण विस्थापित हो चुके हैं।
  • 13 अप्रैल को खास कुनार जिले के शाली दारा इलाके में भी पाकिस्तान ने रॉकेट हमले किए थे।
  • तालिबान ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
  • अफगान मंत्री कारी मोहम्मद हनीफ ने इन हमलों को गंभीर मानवीय उल्लंघन और इस्लामी सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।

काबुल/तेहरान, 23 अप्रैल: पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के कुनार प्रांत के सरकानो जिले पर बृहस्पतिवार को ताजा हमले किए, जिनमें कई आवासीय घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये हमले आधी रात के बाद शुरू हुए और बुधवार की सुबह तक जारी रहे। पूर्वी अफगानिस्तान में सीमा पार से होने वाली झड़पें पिछले दो महीनों में लगातार बढ़ती जा रही हैं।

हमलों का विवरण और प्रभावित क्षेत्र

अफगानिस्तान के प्रमुख समाचार संस्थान खामा प्रेस के अनुसार, सरकानो जिले के कई इलाकों में भारी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। पाकिस्तानी सेना ने असदाबाद के आसपास के क्षेत्रों को भी निशाना बनाया। सामने आए वीडियो फुटेज में कम से कम एक आवासीय घर पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दिया।

इससे पहले 13 अप्रैल को पाकिस्तानी सेना ने खास कुनार जिले के शाली दारा इलाके में रॉकेट हमले किए थे। यह हमलों की एक निरंतर श्रृंखला का हिस्सा है जो पिछले कई हफ्तों से जारी है।

मानवीय संकट की गहराती खाई

आईसीआरएस की एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तालिबान बलों और पाकिस्तान के बीच हफ्तों से चल रही सीमा झड़पों के कारण नूरिस्तान प्रांत में 17,000 परिवारों के लगभग 1,36,000 लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं।

अफगानिस्तान के अर्थव्यवस्था मंत्री कारी मोहम्मद हनीफ ने 2 अप्रैल को बताया था कि पाकिस्तानी सेना के हमलों के कारण नौ प्रांतों में 27,000 से अधिक अफगान परिवार विस्थापित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाकों में भारी हथियारों के इस्तेमाल से आम नागरिकों की जानें गई हैं और यह कार्रवाई इस्लामी सिद्धांतों के भी खिलाफ है।

तालिबान-पाकिस्तान तनाव की जड़ें

पिछले दो महीनों में तालिबान और पाकिस्तान के बीच संबंध तेजी से बिगड़े हैं। तालिबान अधिकारियों ने खुलकर पाकिस्तानी सेना पर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में बार-बार तोपखाने की गोलाबारी और हवाई हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं।

गौरतलब है कि डूरंड रेखा को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराना विवाद है। तालिबान ने कभी भी इस सीमा को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है, जिसे पाकिस्तान अपनी पश्चिमी सीमा मानता है। यह वर्तमान तनाव उसी ऐतिहासिक विवाद की नई कड़ी है।

आम जनता पर असर और भविष्य की आशंकाएं

प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों से उनका दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बुनियादी ढांचा — सड़कें, घर, बाजार — सब कुछ क्षतिग्रस्त हो रहा है। सुरक्षा की चिंता से परिवार अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हैं।

मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि ये झड़पें नहीं रुकीं तो कुनार और नूरिस्तान में एक बड़ा मानवीय संकट उत्पन्न हो सकता है। पहले से ही 1,36,000 लोग खाद्य असुरक्षा की चपेट में हैं और विस्थापितों की संख्या बढ़ती जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से अभी तक कोई ठोस हस्तक्षेप सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शक्तियां इस बढ़ते संकट पर क्या रुख अपनाती हैं।

Point of View

बल्कि एक परमाणु-सशस्त्र देश द्वारा अपने कमजोर पड़ोसी पर बल प्रयोग की रणनीति है — और विडंबना यह है कि जो पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार होने का दावा करता है, वही आज आवासीय इलाकों पर तोपखाने चला रहा है। 27,000 से अधिक विस्थापित परिवार और 1,36,000 भूख से जूझते लोग — ये आंकड़े एक मानवीय आपदा की चीख हैं जिसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मुख्यधारा अनदेखा कर रही है। डूरंड रेखा विवाद दशकों पुराना है, लेकिन तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान की यह आक्रामकता नई है — शायद इसलिए कि वह जानता है तालिबान अफगानिस्तान को वैश्विक समर्थन नहीं मिलेगा। भारत के लिए यह क्षेत्रीय अस्थिरता सीधे रणनीतिक महत्व रखती है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के किस हिस्से पर हमला किया?
पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के कुनार प्रांत के सरकानो जिले और असदाबाद के इलाकों पर हमला किया। इसके अलावा 13 अप्रैल को खास कुनार जिले के शाली दारा इलाके में भी रॉकेट हमले किए गए थे।
पाकिस्तान के हमलों से कितने अफगान परिवार विस्थापित हुए?
अफगानिस्तान के अर्थव्यवस्था मंत्री के अनुसार 9 प्रांतों में 27,000 से अधिक परिवार विस्थापित हो चुके हैं। नूरिस्तान प्रांत में अकेले 17,000 परिवारों के 1,36,000 लोग गंभीर खाद्य संकट में हैं।
तालिबान और पाकिस्तान के बीच तनाव का कारण क्या है?
दोनों देशों के बीच डूरंड रेखा को लेकर दशकों पुराना सीमा विवाद है जिसे तालिबान ने कभी मान्यता नहीं दी। पिछले दो महीनों में सीमावर्ती क्षेत्रों में बार-बार गोलीबारी और हवाई हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं।
क्या पाकिस्तान के इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत माना जा रहा है?
तालिबान अधिकारियों ने पाकिस्तानी सेना पर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। अफगान मंत्री ने इन कार्रवाइयों को गंभीर मानवीय उल्लंघन और इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
कुनार प्रांत में हमले कब से हो रहे हैं?
कुनार प्रांत में पाकिस्तानी हमलों की रिपोर्टें पिछले कई हफ्तों से आ रही हैं। 13 अप्रैल और 23 अप्रैल को हुए हमले इसी श्रृंखला की ताजा कड़ियां हैं, जिससे कुनार संघर्ष का प्रमुख केंद्र बन गया है।
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