मोबाइल छिनते ही 14 साल के बेटे ने की खुदकुशी, हुबली पुलिस ने माता-पिता को दी चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- हुबली के उदय नगर में 14 वर्षीय किशोर ने गुरुवार रात मां द्वारा मोबाइल छीने जाने के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
- किशोर को ऑनलाइन गेमिंग की गंभीर लत थी और वह कई दिनों से लगातार गेम खेल रहा था।
- पुलिस कमिश्नर एन. शशिधर ने कहा कि लत लगे बच्चों से अचानक मोबाइल छीनना खतरनाक हो सकता है।
- विशेषज्ञ सलाह: मोबाइल लत के मामले में मनोवैज्ञानिक या डॉक्टर की मदद से धीरे-धीरे उपयोग कम करें।
- केशवापुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, हुबली-धारवाड़ प्रशासन जागरूकता अभियान की तैयारी में है।
- पुलिस कमिश्नर ने कहा कि 10वीं बोर्ड टॉपर्स ने मोबाइल से दूरी बनाकर सफलता हासिल की — मोबाइल लत भविष्य के लिए हानिकारक है।
हुबली (कर्नाटक), 24 अप्रैल। उत्तरी कर्नाटक के हुबली शहर के उदय नगर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 14 वर्षीय किशोर ने अपनी मां द्वारा मोबाइल फोन छीने जाने के बाद गुरुवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह मामला डिजिटल लत और किशोर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पूरे देश में गंभीर बहस छेड़ रहा है।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह दुखद वारदात
पुलिस के अनुसार, उदय नगर निवासी यह किशोर पिछले कई दिनों से लगातार एक ऑनलाइन गेम में डूबा हुआ था और उसे मोबाइल फोन की गंभीर लत लग चुकी थी। गुरुवार रात जब उसकी मां ने अत्यधिक मोबाइल उपयोग पर आपत्ति जताई, डांटा और पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा, तो उन्होंने उसका फोन छीन लिया।
इस बात से आहत किशोर अपने कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। करीब 20 मिनट बाद जब वह बाहर नहीं आया, तो उसके पिता ने खिड़की से झांककर देखा। उन्हें अपना बेटा मां की साड़ी से बने फंदे पर लटका हुआ मिला।
माता-पिता ने तत्काल दरवाजा तोड़कर उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। केशवापुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस कमिश्नर की माता-पिता को सख्त चेतावनी
हुबली-धारवाड़ पुलिस कमिश्नर एन. शशिधर ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "मां ने मोबाइल की लत पर आपत्ति जताई और फोन ले लिया। इसके तुरंत बाद लड़के ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और कुछ देर बाद साड़ी का इस्तेमाल करके फांसी लगा ली।"
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन बच्चों को मोबाइल की गंभीर लत हो, उनसे अचानक फोन छीनना खतरनाक हो सकता है। ऐसे मामलों में मनोवैज्ञानिक या डॉक्टर की सलाह लेकर धीरे-धीरे मोबाइल का उपयोग कम करना बेहतर विकल्प है।
माता-पिता की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
पुलिस कमिश्नर ने यह भी रेखांकित किया कि बच्चे रातोंरात मोबाइल के आदी नहीं होते। उन्होंने कहा, "कई माता-पिता बच्चों को शांत कराने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं। खाना खिलाते वक्त या पढ़ाई के दौरान घंटों फोन इस्तेमाल करने की इजाजत दे देते हैं।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि बच्चे भावनात्मक दबाव डालते हैं और माता-पिता बिना परिणाम सोचे अचानक फोन छीन लेते हैं। उनका सुझाव था कि मोबाइल का सकारात्मक उपयोग भी सिखाया जाए — जैसे यूट्यूब, ऑनलाइन कोर्स के जरिए अंग्रेजी या अन्य कौशल सीखना।
व्यापक संदर्भ: बढ़ती डिजिटल लत और किशोर आत्महत्याएं
यह घटना अकेली नहीं है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल और गेमिंग लत से जुड़ी किशोर आत्महत्याओं के मामले तेजी से बढ़े हैं। NIMHANS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में किशोरों में इंटरनेट एडिक्शन की दर चिंताजनक स्तर पर पहुंच रही है।
गौरतलब है कि PUBG, Free Fire जैसे ऑनलाइन गेम्स पर पहले भी प्रतिबंध और चेतावनियां जारी हो चुकी हैं, लेकिन नए प्लेटफॉर्म लगातार बच्चों को अपनी ओर खींच रहे हैं। कर्नाटक सहित कई राज्यों में स्कूलों में मोबाइल प्रतिबंध लागू है, फिर भी घर पर नियंत्रण की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पुलिस कमिश्नर शशिधर ने अपील की कि 10वीं बोर्ड में 625 में से 625 अंक लाने वाले टॉपर्स ने स्वयं बताया है कि उन्होंने मोबाइल जैसी विकर्षण चीजों से दूरी बनाए रखी। यह प्रमाण है कि मोबाइल की लत सफलता की राह में बाधा है।
इस मामले में केशवापुरा पुलिस की जांच जारी है। आने वाले दिनों में हुबली-धारवाड़ प्रशासन द्वारा स्कूलों और अभिभावकों के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने की संभावना है।