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बड़ा झटका: राघव चड्ढा समेत आप के 7 राज्यसभा सांसदों का भाजपा में विलय

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बड़ा झटका: राघव चड्ढा समेत आप के 7 राज्यसभा सांसदों का भाजपा में विलय

सारांश

राघव चड्ढा सहित आप के 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में विलय किया। चड्ढा ने इसे संवैधानिक प्रावधान के तहत दो-तिहाई बहुमत का विलय बताया। आप ने इसे 'ऑपरेशन लोटस' करार देते हुए ईडी-सीबीआई के दबाव का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

राघव चड्ढा सहित आप के 7 राज्यसभा सांसदों ने 24 अप्रैल 2025 को भाजपा में औपचारिक विलय किया।
राज्यसभा में आप के कुल 10 सांसद हैं — विलय करने वाले 7 यानी दो-तिहाई से अधिक हैं, जो दसवीं अनुसूची के तहत कानूनी रूप से वैध माना जाता है।
विलय करने वाले प्रमुख नामों में हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल हैं।
आप ने इसे भाजपा का 'ऑपरेशन लोटस' बताया और ईडी-सीबीआई के दबाव का आरोप लगाया।
संजय सिंह ने चेतावनी दी कि इस विलय का मकसद पंजाब में भगवंत मान सरकार को अस्थिर करना है।
राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के नेतृत्व की सराहना करते हुए भाजपा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (आप) को शुक्रवार को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित पार्टी के सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय की औपचारिक घोषणा कर दी। राघव चड्ढा ने इसे राज्यसभा में 'आप' के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का भाजपा में संवैधानिक विलय करार दिया।

विलय की औपचारिक प्रक्रिया और दस्तावेज

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए बताया कि भारत के संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए राज्यसभा में आप के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने भाजपा में विलय कर लिया है। उन्होंने कहा कि सात सांसदों ने उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिसे राज्यसभा सभापति को सौंपा गया। चड्ढा ने स्वयं दो अन्य सांसदों के साथ व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज सभापति को सुपुर्द किए।

विलय करने वाले सांसदों में राघव चड्ढा के अलावा हरभजन सिंह (विश्व-स्तरीय क्रिकेटर), राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। राज्यसभा में आप के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें से सात यानी दो-तिहाई से अधिक इस विलय का हिस्सा बने।

राघव चड्ढा के आरोप और भाजपा में जाने की वजह

राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने के निर्णय को उचित ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस आम आदमी पार्टी को उन्होंने 15 वर्षों तक अपना सर्वस्व समर्पित किया, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और उद्देश्यों से पूरी तरह भटक चुकी है। उनके अनुसार पार्टी अब देशहित के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए काम कर रही है।

चड्ढा ने यह भी कहा कि दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार के लिए सभी नेताओं ने मिलकर अथक परिश्रम किया था, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। उन्होंने घोषणा की कि वे आप से दूर होकर जनता के बीच आ रहे हैं। भाजपा में शामिल होने के फैसले पर चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने वे निर्णय लिए जिन्हें लेने से पहले कई नेता हिचकिचाते थे और जनता ने इस नेतृत्व पर तीन बार भरोसा जताया है।

आप का पलटवार — 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप

आम आदमी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा का 'ऑपरेशन लोटस' करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी का आरोप है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का भय दिखाकर आप नेताओं को तोड़ने की सुनियोजित साजिश रची गई।

आप के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि ऑपरेशन लोटस के जरिए भाजपा, पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे पंजाब और वहाँ की जनता के साथ घोर विश्वासघात बताया और कहा कि पंजाब की जनता इस धोखे को कभी नहीं भूलेगी।

गहन विश्लेषण — राजनीतिक पैटर्न और व्यापक प्रभाव

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब आम आदमी पार्टी पहले से ही दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार और अरविंद केजरीवाल से जुड़े कानूनी विवादों के बाद कमज़ोर स्थिति में है। 'ऑपरेशन लोटस' का यह आरोप नया नहीं है — कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी विपक्षी दलों ने इसी तरह के आरोप लगाए थे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दल-बदल की यह प्रवृत्ति भारतीय लोकतंत्र में एक चिंताजनक पैटर्न बन चुकी है।

दसवीं अनुसूची (एंटी-डिफेक्शन लॉ) के तहत यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एकजुट होकर किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिलती है — यही संवैधानिक प्रावधान राघव चड्ढा ने उद्धृत किया। इस विलय का सीधा असर पंजाब की भगवंत मान सरकार की राजनीतिक स्थिरता और राज्यसभा में आप की संख्याबल पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में राज्यसभा सभापति के फैसले और संभावित कानूनी चुनौतियों पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस राजनीतिक संकट की परिणति है जो दिल्ली चुनाव में करारी हार के बाद से आप को भीतर से खोखला कर रहा था। विडंबना यह है कि जिस पार्टी ने 'ईमानदार राजनीति' के नाम पर जन्म लिया, उसके संस्थापक सदस्य आज उसी पर भ्रष्टाचार और स्वार्थ के आरोप लगाकर जा रहे हैं। 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप पुराना है — कर्नाटक से लेकर महाराष्ट्र तक यही कहानी दोहराई गई है — लेकिन दसवीं अनुसूची की आड़ में होने वाले ये विलय भारतीय लोकतंत्र की उस खामी को उजागर करते हैं जहाँ जनादेश से नहीं, प्रलोभन या दबाव से सरकारें बनती और बिगड़ती हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और अब देशहित की बजाय निजी स्वार्थों के लिए काम कर रही है। उन्होंने 15 वर्षों की मेहनत का हवाला देते हुए भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में काम करने का फैसला किया।
आप के कितने राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हुए?
राज्यसभा में आप के कुल 10 सांसदों में से 7 सांसदों ने भाजपा में विलय किया, जो दो-तिहाई से अधिक है। इनमें राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी प्रमुख नाम हैं।
क्या यह विलय कानूनी रूप से वैध है?
दसवीं अनुसूची (एंटी-डिफेक्शन लॉ) के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई या उससे अधिक सदस्य एकजुट होकर किसी अन्य दल में विलय करें, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिलती है। राघव चड्ढा ने इसी संवैधानिक प्रावधान का हवाला दिया है, हालांकि अंतिम निर्णय राज्यसभा सभापति करेंगे।
आम आदमी पार्टी ने इस विलय पर क्या कहा?
आप ने इसे भाजपा का 'ऑपरेशन लोटस' करार दिया और आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का भय दिखाकर नेताओं को तोड़ा गया। संजय सिंह ने कहा कि इसका मकसद पंजाब में भगवंत मान सरकार को अस्थिर करना है।
इस विलय का पंजाब की राजनीति पर क्या असर होगा?
राज्यसभा में आप की संख्याबल कमज़ोर होने से पंजाब की भगवंत मान सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार यह विलय पंजाब में भाजपा को मज़बूत करने और आप को कमज़ोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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