होर्मुज संकट के बीच जापान का बड़ा फैसला: 1 मई से 20 दिनों का अतिरिक्त तेल भंडार होगा जारी
सारांश
मुख्य बातें
टोक्यो, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। होर्मुज स्ट्रेट पर गहराते संकट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव के मद्देनजर जापानी सरकार ने एक अहम रणनीतिक निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि वह 1 मई 2026 से लगभग 20 दिनों के लिए अतिरिक्त राष्ट्रीय तेल भंडार बाजार में उतारेगी। यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को स्थिर रखने की दिशा में उठाया गया है।
होर्मुज संकट की पृष्ठभूमि
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए जोरदार सैन्य हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई। यह संकीर्ण समुद्री गलियारा फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
होर्मुज मार्ग के बाधित होने की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मचा दी है। जापान जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं, इस संकट से सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं।
जापान का दूसरा बड़ा तेल रिलीज
जापान की क्योडो न्यूज एजेंसी के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद जापान सरकार ने पहले चरण में सरकारी और निजी भंडार से लगभग 50 दिनों के तेल की पहली खेप जारी की थी। अब दूसरे चरण में 5.8 मिलियन किलोलीटर तेल बाजार में उतारा जाएगा।
जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, इस दूसरी रिलीज की कुल कीमत 540 अरब येन यानी लगभग 3.4 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई है। यह जापान के ऊर्जा संकट प्रबंधन इतिहास में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जापान की ऊर्जा निर्भरता और रणनीतिक चुनौती
जापान अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 90 फीसदी से अधिक पश्चिम एशिया से आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। यही कारण है कि इस मार्ग पर कोई भी व्यवधान जापान की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को सीधे प्रभावित करता है।
गौरतलब है कि जापान के पास परमाणु ऊर्जा के विकल्प सीमित हैं और 2011 की फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना के बाद से देश जीवाश्म ईंधन पर और अधिक निर्भर हो गया है। ऐसे में होर्मुज संकट जापान के लिए महज एक भू-राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि सीधा अस्तित्वगत ऊर्जा संकट है।
प्रधानमंत्री ताकाइची की कूटनीतिक पहल
23 अप्रैल को जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर बातचीत की। उन्होंने ईरानी हमलों में हुई जान-माल की क्षति पर सऊदी अरब के साथ संवेदना व्यक्त की और युद्धविराम बनाए रखने की अपील की।
पीएम ताकाइची ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के जरिए स्थायी समझौता होना जरूरी है और जापान मध्यस्थ देशों के राजनयिक प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है। उन्होंने यानबू पोर्ट के रास्ते तेल आपूर्ति जारी रखने के लिए सऊदी अरब का विशेष आभार भी जताया।
जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, क्राउन प्रिंस मोहम्मद ने जापान सहित वैश्विक बाजारों में ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने और होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित नौवहन बहाल करने के लिए सऊदी अरब की सकारात्मक प्रतिबद्धता जताई।
वैश्विक प्रभाव और आगे की राह
जापान का यह कदम एक व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाता है — होर्मुज संकट ने न केवल तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, बल्कि एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को अपनी ऊर्जा रणनीति पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया है। भारत, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं क्योंकि उनकी भी बड़ी तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
आने वाले हफ्तों में अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति और होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्थिति पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी। यदि तनाव और बढ़ा तो कई देशों को अपने आपातकालीन ऊर्जा भंडार का और अधिक उपयोग करना पड़ सकता है।