नेपाल में भारतीय सामान पर 100 NPR कस्टम ड्यूटी नियम — भारत ने जताई कड़ी चिंता, MEA बोला

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नेपाल में भारतीय सामान पर 100 NPR कस्टम ड्यूटी नियम — भारत ने जताई कड़ी चिंता, MEA बोला

सारांश

भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल द्वारा 100 NPR से अधिक भारतीय सामान पर कस्टम ड्यूटी लागू करने पर चिंता जताई। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा — बातचीत जारी है। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी, सामाजिक संगठन ने तत्काल बदलाव की मांग की।

Key Takeaways

  • MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अप्रैल 2025 को पुष्टि की कि भारत नेपाल के 100 NPR कस्टम ड्यूटी नियम पर नेपाल से बातचीत कर रहा है।
  • नेपाल का यह नियम वर्षों पुराना है, लेकिन नई सरकार ने इसे हाल ही में सख्ती से लागू करना शुरू किया है।
  • नेपाल कस्टम विभाग के निदेशक किशोर बरतौला के अनुसार यह नियम तस्करी रोकने के लिए लागू किया गया है, न कि राजस्व बढ़ाने के लिए।
  • नेपाल-इंडिया ओपन बॉर्डर इंटरैक्शन ग्रुप ने सरकार से इस नीति में तत्काल बदलाव की मांग की है।
  • नेपाल के वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि निजी या घरेलू उपयोग का सामान लाने वाले यात्रियों को नहीं रोका जाएगा।
  • यह विवाद भारत-नेपाल खुली सीमा नीति और दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2025भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत सरकार नेपाल द्वारा 100 नेपाली रुपए (NPR) से अधिक मूल्य के भारतीय सामान पर कस्टम ड्यूटी वसूलने के मामले से पूरी तरह अवगत है और इस मुद्दे पर नेपाल सरकार के साथ सक्रिय रूप से बातचीत जारी है। यह विवाद उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सीमा पर भारतीय सामान लाने वाले यात्रियों से ड्यूटी वसूली के दृश्य दिखे।

MEA प्रवक्ता का आधिकारिक बयान

नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने भी ऐसी खबरें देखी हैं कि नेपाली अधिकारी एक पुराने नियम को सख्ती से लागू कर रहे हैं, जिसके तहत भारत से खरीदा हुआ 100 नेपाली रुपए से अधिक का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी ली जाती है।"

उन्होंने आगे कहा कि नेपाल सरकार का यह कदम मुख्य रूप से गैर-आधिकारिक व्यापार और तस्करी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। जायसवाल ने यह भी बताया कि नेपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निजी या घरेलू उपयोग का सामान लाने वाले यात्रियों को नहीं रोका जाएगा।

पुराना नियम, नया विवाद — पृष्ठभूमि

यह नियम वास्तव में कई वर्ष पहले बनाया गया था, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों की आजीविका और दैनिक जरूरतों को देखते हुए इसे लागू नहीं किया जा रहा था। अब नेपाल की नई सरकार ने इसे सख्ती से लागू करना शुरू किया है, जिससे सीमा पर रहने वाले लाखों लोगों में नाराजगी फैल गई है।

गौरतलब है कि नेपाल-भारत खुली सीमा पर दशकों से लोग बिना किसी बाधा के आवाजाही करते रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों के लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं, क्योंकि वहां सामान सस्ता और सुलभ मिलता है। यह नीति उनके लिए सीधा आर्थिक बोझ बन गई है।

सामाजिक संगठन की मांग और स्थानीय आक्रोश

नेपाल-इंडिया ओपन बॉर्डर इंटरैक्शन ग्रुप ने शनिवार को नेपाल सरकार से इस नीति में तत्काल बदलाव की मांग की। संगठन का कहना है कि यह नियम गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है।

संगठन ने अपने बयान में कहा कि नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं, इसलिए ऐसे फैसले लिए जाने चाहिए जो आपसी रिश्तों को मजबूत करें, न कि उन्हें कमजोर करें। समूह ने मांग की कि घरेलू उपयोग के सामान पर कोई ड्यूटी नहीं लगाई जाए।

तस्करी रोकना असली मकसद — कस्टम विभाग का तर्क

नेपाल के कस्टम विभाग के निदेशक किशोर बरतौला ने इस नियम का बचाव करते हुए कहा कि तस्कर आम लोगों का इस्तेमाल करते हैं, जो भारत से बार-बार थोड़ा-थोड़ा सामान लाते हैं और उस पर ड्यूटी नहीं देते। बाद में यह सामान इकट्ठा करके बड़े पैमाने पर बेचा जाता है।

उन्होंने माना कि 100 NPR से अधिक के सामान पर ड्यूटी से सरकार को कोई बड़ा राजस्व नहीं मिलता, लेकिन यह कदम अनौपचारिक व्यापार नेटवर्क को तोड़ने के लिए जरूरी बताया गया है।

भारत-नेपाल संबंधों पर व्यापक असर

विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा महज कस्टम ड्यूटी तक सीमित नहीं है — यह भारत-नेपाल द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक तस्वीर का हिस्सा है। हाल के वर्षों में नेपाल ने चीन के साथ व्यापारिक और बुनियादी ढांचा संबंध मजबूत किए हैं, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ी हैं।

यह नीति ऐसे समय में लागू हुई है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध स्थिर रखना चाहता है। नेपाल के साथ किसी भी तरह का व्यापारिक विवाद भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के लिए एक परीक्षा बन सकता है।

आने वाले दिनों में भारत और नेपाल के बीच राजनयिक चैनलों के जरिए इस मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। MEA ने संकेत दिया है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में है और जल्द ही कोई स्पष्ट नतीजा सामने आ सकता है।

Point of View

लेकिन इसका समय और तरीका सवाल उठाता है — खासकर तब जब नेपाल चीन के साथ व्यापारिक नजदीकी बढ़ा रहा है। विडंबना यह है कि जिस नियम से सरकार को कोई बड़ा राजस्व नहीं मिलता, वह गरीब सीमावर्ती परिवारों की जेब जरूर काट रहा है। भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की असली परीक्षा यही है कि वह राजनयिक दबाव से इस मुद्दे को कितनी जल्दी और कितने प्रभावी तरीके से सुलझाता है। अगर यह विवाद लंबा खिंचा तो यह दोनों देशों के जनसंपर्क को कमजोर करेगा — और यही चीन को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाएगी।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

नेपाल ने भारतीय सामान पर कस्टम ड्यूटी क्यों लगाई?
नेपाल सरकार ने एक पुराने नियम को सख्ती से लागू किया है जिसका मकसद तस्करी और गैर-आधिकारिक व्यापार रोकना है। नेपाल के कस्टम विभाग के अनुसार, तस्कर आम लोगों के जरिए बार-बार थोड़ा-थोड़ा सामान लाकर बड़े पैमाने पर बेचते हैं।
भारत ने नेपाल के इस फैसले पर क्या कहा?
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस मुद्दे से अवगत है और नेपाल के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू उपयोग का सामान लाने वालों को नहीं रोका जाएगा।
100 नेपाली रुपए की सीमा से कितने लोग प्रभावित हैं?
यह नियम मुख्य रूप से नेपाल-भारत सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को प्रभावित करता है जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है।
नेपाल-इंडिया ओपन बॉर्डर ग्रुप ने क्या मांग की है?
इस सामाजिक संगठन ने नेपाल सरकार से 100 NPR से अधिक सामान पर कस्टम ड्यूटी का नियम तत्काल खत्म करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि घरेलू उपयोग के सामान पर कोई ड्यूटी नहीं लगनी चाहिए।
क्या भारत-नेपाल के बीच यह विवाद जल्द सुलझेगा?
MEA ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में है। नेपाल के वरिष्ठ अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि निजी उपयोग का सामान लाने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी, जिससे जल्द समाधान की उम्मीद है।
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