दिल्ली विधानसभा का ऐतिहासिक सम्मान: अनिल गोयल बने आठवीं विधानसभा के 'सर्वश्रेष्ठ विधायक', 18 साल बाद लौटा पुरस्कार
सारांश
Key Takeaways
- अनिल गोयल (कृष्णा नगर विधायक) को 23 अप्रैल 2025 को आठवीं दिल्ली विधानसभा का 'सर्वश्रेष्ठ विधायक' घोषित किया गया।
- यह पुरस्कार 18 वर्षों के अंतराल के बाद पुनर्जीवित किया गया है।
- विजेता को ₹51,000 नकद, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह एक आगामी समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
- चयन 100 अंकों की पारदर्शी प्रणाली से हुआ — 65 अंक आधिकारिक रिकॉर्ड से, 35 अंक समिति आकलन से।
- बहस में योगदान के लिए सर्वाधिक 50 अंक निर्धारित हैं, जबकि समिति भागीदारी के लिए 30 अंक।
- चयन समिति की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने की, जिसमें पूर्व सांसद और लोकसभा के पूर्व महासचिव भी शामिल थे।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली विधानसभा ने 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने प्रतिष्ठित 'सर्वश्रेष्ठ विधायक वार्षिक पुरस्कार' को पुनर्जीवित किया है और कृष्णा नगर से विधायक अनिल गोयल को आठवीं दिल्ली विधानसभा का सर्वश्रेष्ठ विधायक घोषित किया गया है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2025 को विधानसभा परिसर में आयोजित उच्च स्तरीय चयन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
पुरस्कार की वापसी और उसका महत्व
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि इस पुरस्कार का मूल उद्देश्य उन जनप्रतिनिधियों को सम्मानित करना है जो ईमानदारी, नवाचार और समर्पण के उच्चतम मानक स्थापित कर दूसरे विधायकों के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा बेहतर शासन और लोकतंत्र में जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह पुरस्कार 18 साल से निलंबित था। इसकी पुनर्वापसी को संसदीय कार्यों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में यह पुरस्कार नहीं दिया गया था।
विजेता को मिलने वाला सम्मान
विधायक अनिल गोयल को एक आगामी औपचारिक समारोह में प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और ₹51,000 की नकद राशि प्रदान की जाएगी। यह सम्मान सदन में उनके उत्कृष्ट और सार्थक योगदान को मान्यता देता है।
स्पीकर ने स्पष्ट किया कि जो विधायक सदन में गुणवत्तापूर्ण बहस करते हैं, महत्वपूर्ण जन-मुद्दे उठाते हैं और अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता के साथ सकारात्मक संवाद बनाए रखते हैं, उन्हें इस प्रकार के पुरस्कारों से प्रोत्साहित किया जाएगा।
चयन समिति की संरचना
इस पुरस्कार के लिए चयन एक प्रतिष्ठित और बहु-सदस्यीय समिति ने किया, जिसकी अध्यक्षता स्वयं विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने की। समिति में निम्नलिखित विशेषज्ञ सदस्य शामिल थे:
पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, लोकसभा के पूर्व महासचिव पी.डी.टी. आचार्य, विधि एवं न्याय विभाग के प्रधान सचिव रितेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार महेश के. शुक्ला और विधानसभा सचिव रणजीत सिंह। इस विविध और अनुभवी समिति की उपस्थिति चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।
मूल्यांकन की पारदर्शी अंक प्रणाली
'सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार' के लिए चयन एक 100 अंकों की पारदर्शी स्कोरिंग प्रणाली पर आधारित है। इसमें 65 अंक विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर और 35 अंक चयन समिति के समग्र आकलन से दिए जाते हैं।
सर्वाधिक 50 अंक सदन की बहस में योगदान के लिए आरक्षित हैं, जिनमें 20 अंक बहस की गुणवत्ता, 15 अंक उपस्थिति और 15 अंक विधायी कार्यों के लिए निर्धारित हैं। विभिन्न संसदीय समितियों में सक्रिय भागीदारी के लिए 30 अंक दिए जाते हैं।
शेष 20 अंक आचरण, अनुशासन और आधुनिक डिजिटल प्रणाली के उपयोग पर आधारित हैं। इनमें 12 अंक अध्यक्ष के निर्देशों के अनुपालन और 8 अंक पेपरलेस कार्यप्रणाली अपनाने के लिए दिए जाते हैं।
व्यापक संदर्भ और राजनीतिक निहितार्थ
यह पुरस्कार ऐसे समय में पुनर्जीवित हुआ है जब भारतीय जनता पार्टी ने फरवरी 2025 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को हराकर दिल्ली की सत्ता वापस हासिल की है। नई विधानसभा में संसदीय मानकों को ऊंचा उठाने का यह प्रयास सत्तारूढ़ दल की उस छवि को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है जो शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पुरस्कार प्रणाली विधायकों को सदन में अधिक सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है। आने वाले समय में यह पुरस्कार दिल्ली विधानसभा की कार्यसंस्कृति को बदलने में सहायक हो सकता है।