15 अगस्त 2026
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मराठी अनिवार्यता विवाद: आठवले बोले, 'हिंदी-मराठी झगड़ा पैदा करना ठीक नहीं', परमिट रद्द करने पर जताई आपत्ति

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मराठी अनिवार्यता विवाद: आठवले बोले, 'हिंदी-मराठी झगड़ा पैदा करना ठीक नहीं', परमिट रद्द करने पर जताई आपत्ति

सारांश

महायुति सरकार के मराठी अनिवार्यता के फैसले पर गठबंधन के भीतर ही दरार — केंद्रीय मंत्री आठवले ने परमिट रद्द करने की नीति को श्रमिक-विरोधी बताया। मुंबई की आर्थिक विविधता और प्रवासी कामगारों की आजीविका इस विवाद के केंद्र में है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 14 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र सरकार के मराठी अनिवार्यता फैसले का विरोध किया।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की कि मराठी ज्ञान न होने पर ऑटो-टैक्सी चालकों का लाइसेंस रद्द हो सकता है।
नियम के तहत पहले एक माह का नोटिस , फिर तीन माह का निलंबन , और बाद में स्थायी रद्दीकरण का प्रावधान है।
आठवले ने कहा, ऑटो चालक करीब ₹20,000 प्रतिमाह कमाने वाला सामान्य श्रमिक है; भाषा न आने पर तत्काल कार्रवाई उचित नहीं।
सरनाईक के अनुसार यह 1989 का पुराना नियम है, जिसे अब सख्ती से लागू किया जाएगा; मराठी कक्षाएँ भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
आठवले का दावा — महाराष्ट्र में करीब 80% गैर-मराठी लोग पहले से मराठी बोल सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने 14 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया, जिसमें ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया गया है। आठवले ने स्पष्ट कहा कि अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले लोगों के बीच विवाद खड़ा करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को घोषणा की थी कि राज्यभर में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, यदि उनके पास मराठी का व्यावहारिक ज्ञान नहीं है। इसके लिए मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026 को लागू करने का आधिकारिक शासनादेश जारी किया गया है। कानून एवं न्याय विभाग इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे चुका है।

संशोधित नियमों के अनुसार, मराठी का व्यावहारिक कौशल न रखने वाले चालकों को पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। एक माह में भाषा न सीखने पर लाइसेंस का प्राधिकरण तीन महीने तक के लिए निलंबित हो सकता है। निलंबन के बाद भी नियमों का पालन न होने पर ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।

आठवले की आपत्ति

आठवले ने कहा कि मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है और देश के कोने-कोने से लोग यहाँ रोज़गार की तलाश में आते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि मुंबई में बड़े उद्योगों के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री भी है, जहाँ देशभर के लोग काम करते हैं। ऐसे में हिंदी और मराठी को लेकर टकराव पैदा करना बिल्कुल सही नहीं है।

उन्होंने कहा, 'ऑटो रिक्शा चालक एक सामान्य कामकाजी व्यक्ति है। वह एक श्रमिक है, जो ऑटो चलाकर करीब ₹20,000 महीने कमाता है।' आठवले ने यह भी माना कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी सीखनी चाहिए, लेकिन भाषा न आने पर तत्काल कार्रवाई करना उचित नहीं है — चालकों को इसके लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

सरकार का पक्ष

परिवहन मंत्री सरनाईक ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान कोई नया नियम नहीं है, बल्कि 1989 के मौजूदा नियम में पहले से मौजूद था, जिसे अतीत में अधिकारियों द्वारा सख्ती से लागू नहीं किया गया था। उन्होंने मराठी सिखाने के लिए चालकों हेतु विशेष कक्षाएँ उपलब्ध कराने की भी घोषणा की है।

आम जनता और चालकों पर असर

आठवले ने दावा किया कि महाराष्ट्र में करीब 80 प्रतिशत गैर-मराठी लोग पहले से मराठी बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग — बच्चों सहित — मराठी समझते और बोलते हैं। कई चालक मराठी सीख रहे हैं, लेकिन भाषा न आने पर उनका परमिट रद्द करना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में भाषाई पहचान का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। मुंबई में बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय प्रवासी कामगार हैं, जिनमें से कई परिवहन क्षेत्र में काम करते हैं।

क्या होगा आगे

शासनादेश लागू हो चुका है और परिवहन विभाग इसे अमल में लाने की तैयारी कर रहा है। आठवले की आपत्ति के बाद यह देखना होगा कि महायुति गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर सहमति बनती है या नहीं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले प्रवासी मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वे खुद मानते हैं कि मराठी सीखनी चाहिए — यानी असहमति नीति के लक्ष्य से नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की गति और तरीके से है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार ने चालकों को मराठी सीखने का पर्याप्त अवसर और ढाँचा दिए बिना ही दंड का रास्ता चुन लिया। मुंबई जैसे बहुभाषी महानगर में भाषा को आजीविका से जोड़ने की नीति राजनीतिक संदेश तो देती है, लेकिन लाखों प्रवासी श्रमिकों की रोज़ी-रोटी पर इसके असर का आकलन अभी बाकी है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने का नया नियम क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026 लागू किया है, जिसमें ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य है। मराठी न जानने पर पहले एक माह का नोटिस, फिर तीन माह का लाइसेंस निलंबन और अंततः स्थायी रद्दीकरण का प्रावधान है।
रामदास आठवले ने इस फैसले का विरोध क्यों किया?
आठवले का कहना है कि मुंबई एक बहुभाषी आर्थिक केंद्र है जहाँ देशभर के लोग रोज़गार के लिए आते हैं, इसलिए हिंदी-मराठी विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने माना कि मराठी सीखनी चाहिए, लेकिन भाषा न आने पर तत्काल परमिट रद्द करने की बजाय चालकों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
क्या यह नियम नया है या पहले से मौजूद था?
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार यह 1989 के मौजूदा नियम का हिस्सा है, जिसे अतीत में सख्ती से लागू नहीं किया गया था। अब इसे औपचारिक शासनादेश के ज़रिए लागू किया जा रहा है और कानून एवं न्याय विभाग ने इसे मंजूरी दे दी है।
मराठी न जानने वाले चालकों के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
सरकार ने मराठी सिखाने के लिए विशेष कक्षाएँ उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इसके अलावा नियम में पहले एक माह का नोटिस देने का प्रावधान है, जिससे चालकों को भाषा सीखने का अवसर मिल सके।
इस विवाद का मुंबई के प्रवासी कामगारों पर क्या असर पड़ सकता है?
मुंबई में बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय और अन्य राज्यों के प्रवासी कामगार परिवहन क्षेत्र में काम करते हैं। यदि नियम सख्ती से लागू हुआ तो उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। आठवले ने बताया कि एक ऑटो चालक औसतन ₹20,000 प्रतिमाह कमाता है और परमिट रद्द होने से उसकी रोज़ी-रोटी सीधे खतरे में पड़ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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