मराठी न जानने वाले ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों का लाइसेंस रद्द होगा, महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को ऐलान किया कि मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। जो ड्राइवर इस शर्त को पूरा नहीं करेंगे, उनका ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है। इसी दिन सरकार ने महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026 को लागू करने वाला आधिकारिक सरकारी आदेश भी जारी किया।
नए नियमों में क्या है
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत लागू इन संशोधित नियमों के अनुसार, मराठी का कामचलाऊ ज्ञान न रखने वाले ड्राइवरों को पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। यदि वे इस अवधि में भाषा नहीं सीखते, तो उनका लाइसेंस अधिकतम तीन महीने के लिए निलंबित हो जाएगा। निलंबन के बाद भी पालन न करने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा। कानून और न्याय विभाग पहले ही इस प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे चुका है।
1989 के पुराने कानून को मिली नई धार
मंत्री सरनाईक ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया कानून नहीं, बल्कि 1989 के मौजूदा नियम का सख्त क्रियान्वयन है। उन्होंने कहा, 'यह कानून 1989 का है और इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र में काम करने के लिए मराठी जानना जरूरी है। हमने कुछ महीने पहले इसे सख्ती से लागू करने का आदेश दिया था लेकिन किसी के साथ अन्याय न हो, इसलिए हमने ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया। हालांकि कई ड्राइवरों ने इसमें हिस्सा लिया और भाषा सीखी लेकिन कुछ लोग अभी भी अकड़ दिखाते हुए कह रहे हैं कि वे नहीं सीखेंगे। हमने खास तौर पर ऐसी मनमानी को रोकने के लिए ये कानूनी संशोधन किए हैं।' महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 4 के उप-नियम (4) में संशोधन कर 'मराठी भाषा का कामचलाऊ ज्ञान' वाक्यांश जोड़ा गया है।
ऐप-आधारित कैब चालकों पर भी लागू
नए नियम 22(3ए) के तहत इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली ऐप-आधारित मोटर कैब चलाने वाले ड्राइवरों के लिए भी मराठी का कामचलाऊ ज्ञान अनिवार्य किया गया है। नियम 78 के उप-नियम (2) में नया क्लॉज (डी) जोड़कर परमिट धारकों पर भी यह शर्त लागू की गई है। संशोधित नियम 85(1) के अनुसार, कैब और टैक्सी परमिट नवीनीकरण के लिए स्थानीय परिवहन प्राधिकरण की संतुष्टि के अनुसार मराठी में व्यावहारिक दक्षता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा।
सरकार का तर्क और उद्देश्य
परिवहन विभाग के अनुसार, ड्राइवर और यात्री के बीच सहज संवाद और स्पष्ट समझ सुरक्षित यात्रा के लिए आवश्यक है। मंत्री सरनाईक ने यह भी बताया कि इन संशोधनों से 1989 के नियमों की उन कमियों को दूर किया गया है जिनका उपयोग पहले गैर-मराठी ड्राइवर कानूनी विवादों के दौरान करते थे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मराठी भाषा के संरक्षण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है।
आगे क्या होगा
लाइसेंसिंग अधिकारियों को अब यह अधिकार है कि वे नियमों का पहली बार उल्लंघन करने पर ड्राइवर के लाइसेंस ऑथराइजेशन को अधिकतम तीन महीने के लिए निलंबित कर सकते हैं और बार-बार उल्लंघन पर उसे स्थायी रूप से रद्द कर सकते हैं। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये वास्तविक नियामक संशोधन हैं, न कि केवल दिशानिर्देश। आने वाले हफ्तों में क्रियान्वयन की रूपरेखा स्पष्ट होने की उम्मीद है।