महाराष्ट्र में टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य: नियम न मानने पर 3 महीने लाइसेंस निलंबन
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 14 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (थर्ड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 जारी करते हुए राज्य में इलेक्ट्रॉनिक मीटर से चलने वाली टैक्सियों के सभी अधिकृत चालकों और परमिट धारकों के लिए मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। नियम का पालन न करने पर चालक का लाइसेंस पहले तीन महीने के लिए निलंबित और फिर परमिट पूरी तरह रद्द किया जा सकता है। यह निर्णय महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स नियम, 1989 में सीधे संशोधन के ज़रिए लागू किया गया है।
नए नियमों में क्या बदला
संशोधन के तहत नियम 4 में 'पूर्ववृत्त' शब्द के बाद 'और मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान' जोड़ा गया है। नियम 22 का शीर्षक बदलकर 'इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगी मोटर कैब के चालकों के लिए अतिरिक्त नियम' कर दिया गया है।
सबसे महत्त्वपूर्ण बदलाव नियम 24 में किया गया है, जिसके अनुसार प्रत्येक अधिकृत टैक्सी चालक के लिए मराठी का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य है। इसके अलावा नियम 78 और नियम 85 में भी संशोधन हुआ है — अब टैक्सी परमिट के नवीनीकरण के लिए भी मराठी ज्ञान की शर्त पूरी करनी होगी और प्राधिकरण के संतुष्ट होने पर ही परमिट रिन्यू किया जाएगा।
उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रक्रिया
यदि किसी चालक के पास मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं है, तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी उसे एक महीने का नोटिस देगी। इस अवधि में चालक को भाषा सीखनी होगी। नोटिस के बाद भी अनुपालन न होने पर अथॉरिटी लिखित कारण दर्ज कर ड्राइविंग लाइसेंस पर अधिकृतता तीन महीने तक निलंबित कर सकती है।
यदि निलंबन के बाद भी स्थिति नहीं सुधरती, तो उचित सुनवाई के बाद चालक का अधिकृत परमिट स्थायी रूप से रद्द भी किया जा सकता है। यह क्रमिक दंड प्रक्रिया चालकों को सुधार का अवसर देती है।
सरकार का तर्क
राज्य सरकार के अनुसार इस फैसले का प्राथमिक उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच संवाद को सुगम बनाना है। महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में नागरिक मराठी बोलते हैं और स्थानीय भाषा की जानकारी न होने से यात्रियों को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
गौरतलब है कि यह नीति ऐसे समय में आई है जब देश के कई राज्यों में स्थानीय भाषा को सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ने की माँग तेज़ हो रही है। मुंबई जैसे बहुभाषी महानगर में, जहाँ हिंदी, मराठी, गुजराती और अन्य भाषाएँ एक साथ प्रचलित हैं, यह नियम व्यावहारिक चुनौतियाँ भी खड़ी कर सकता है।
आम चालकों पर असर
राज्य में हज़ारों टैक्सी चालक ऐसे हैं जो अन्य राज्यों से आए हैं और मराठी से अपरिचित हैं। इन चालकों को अब सीमित समय में भाषा सीखनी होगी, अन्यथा उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। आलोचकों का कहना है कि एक महीने की समय-सीमा अपर्याप्त है और इससे पहले से ही कम होती टैक्सी आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
यह नियम केवल इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली टैक्सियों पर लागू होता है — ऑटो-रिक्शा या अन्य श्रेणी के वाहनों पर इसका विस्तार अभी स्पष्ट नहीं है। आने वाले हफ्तों में लाइसेंसिंग अथॉरिटी की ओर से क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा जारी होने की उम्मीद है।