ब्रिक्स संसदीय फोरम: शशि थरूर ने भारत की अध्यक्षता को सराहा, BJP-कांग्रेस में रैली पर तकरार
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स के 12वें संसदीय फोरम के समापन पर 27 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सम्मेलन को अत्यंत सफल करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की निरंतर और सक्रिय भूमिका की सराहना की। इसके साथ ही रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के बीच वाकयुद्ध भी छिड़ गया।
ब्रिक्स फोरम: भारत की अध्यक्षता और संयुक्त घोषणा पत्र
थरूर ने कहा कि सम्मेलन में विभिन्न सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधि एक मंच पर आए और संयुक्त घोषणा पत्र की भाषा पर आम सहमति बनाने के लिए गहन विचार-विमर्श हुआ। उनके अनुसार एक सदस्य देश विशेष प्रावधान चाहता था, जिसे अन्य देशों ने स्वीकार नहीं किया — हालांकि अंततः सभी मुद्दों पर सहमति बन गई। उन्होंने बताया कि भारत ने शांतिपूर्ण ढंग से फोरम की अध्यक्षता चीन को सौंपी और उम्मीद जताई कि संसदीय कूटनीति के जरिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भारत की भूमिका आगे भी बरकरार रहेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत G-20 की अध्यक्षता के बाद से वैश्विक बहुपक्षीय मंचों पर अपनी उपस्थिति को और मज़बूत करने की कोशिश में लगा है। गौरतलब है कि ब्रिक्स संसदीय फोरम नीति-स्तरीय विमर्श का नहीं, बल्कि विधायी-स्तरीय संवाद का मंच है, जो सदस्य देशों के संसदों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया: भारत का बढ़ता वैश्विक कद
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ब्रिक्स संसदीय फोरम भारत के लिए एक उत्कृष्ट अवसर है, जहाँ सदस्य देशों की संसदों में हुई चर्चाओं और सफल कार्यों को साझा किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से अन्य देशों को भारत की उपलब्धियों और सकारात्मक पहलों से परिचित होने का मौका मिला।
BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने सम्मेलन को भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण बताया और कहा कि भारत अब वैश्विक नीतिगत निर्णयों में केवल अनुसरणकर्ता नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता की भूमिका की ओर अग्रसर है। उन्होंने G-20 के सफल आयोजन को इसी क्रम में एक अहम उदाहरण बताया।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में दो दिवसीय इस फोरम का आयोजन अत्यंत सुचारु रहा और देशभर की विधानसभाओं के अध्यक्षों की भागीदारी से इसकी व्यापकता और बढ़ी।
कांग्रेस की प्रस्तावित रैली पर राजनीतिक तकरार
रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित रैली और उससे व्यापारियों को होने वाली संभावित परेशानी के सवाल पर शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी देशहित में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की विरोधी नहीं है, बल्कि वह चाहती है कि व्यापारी स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। थरूर ने यह भी कहा कि यदि सरकार नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस की माँगें स्वीकार कर ले, तो विरोध प्रदर्शन रोकने का रास्ता निकल सकता है।
थरूर ने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस को रामलीला मैदान के अलावा अन्यत्र अनुमति नहीं मिल रही और विपक्ष के रूप में जनता की आवाज उठाना उनका संवैधानिक दायित्व है।
BJP का पलटवार: अराजकता और दीपावली का मुद्दा
मेघवाल ने विपक्ष की प्रस्तावित रैली पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अराजकता फैलाना चाहती है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात और सर्वोच्च न्यायालय में याचिका के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने में नाकाम रहा। दीपावली नज़दीक होने के कारण व्यापारियों के कारोबार पर पड़ने वाले असर की चिंता का भी उन्होंने हवाला दिया।
ठाकुर ने 1 नवंबर की तारीख का उल्लेख करते हुए दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों का संदर्भ दिया और सवाल किया कि क्या विपक्ष इस तारीख के ज़रिए कोई संकेत देना चाहता है। उन्होंने विदेशों में हुई हिंसा और आगजनी जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे किसी मंसूबे को भारत में स्वीकार नहीं किया जाएगा और दिल्ली पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
आगे क्या
ब्रिक्स संसदीय फोरम की अध्यक्षता अब चीन के पास है, और भारत की बहुपक्षीय कूटनीति के अगले चरण पर नज़र रहेगी। वहीं, रामलीला मैदान रैली को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच बयानबाज़ी आने वाले दिनों में और तेज़ होने के आसार हैं, विशेषकर दीपावली से पहले दिल्ली की राजनीतिक सरगर्मी को देखते हुए।