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12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम पर NDA नेताओं का संदेश: लोकतंत्र और वैश्विक शांति की राह निकलेगी

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12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम पर NDA नेताओं का संदेश: लोकतंत्र और वैश्विक शांति की राह निकलेगी

सारांश

नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम पर NDA के शीर्ष नेताओं ने एक सुर में कहा — यह मंच दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लोकतांत्रिक संवाद का नया अध्याय लिख सकता है। वैश्विक अशांति के बीच भारत की मेजबानी में यह सम्मेलन संसदीय कूटनीति की बड़ी परीक्षा है।

मुख्य बातें

12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सम्मेलन के निष्कर्ष पूरी दुनिया के लिए उपयोगी होंगे।
BJP सांसद संजय जायसवाल ने भारत, चीन, ब्राज़ील, रूस, UAE और ईरान की भागीदारी का उल्लेख किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन में यह सम्मेलन PM मोदी के ब्रिक्स प्रस्ताव पर आधारित है।
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने वैश्विक अशांति के बीच भारत की शांतिदूत भूमिका पर जोर दिया।
अगले दो दिनों में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने पर सार्थक चर्चा होने की उम्मीद।

नई दिल्ली में 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम को लेकर विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी है। मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा अध्यक्षों के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसदों ने इस सम्मेलन को वैश्विक सहयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने का असाधारण अवसर बताया।

मुख्य घटनाक्रम

मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस सम्मेलन से निकलने वाले निष्कर्ष भविष्य में पूरी दुनिया के लिए उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने कहा, 'वैश्विक स्तर पर पहले भी कई मंच मौजूद रहे हैं, लेकिन वर्तमान समय में ब्रिक्स देशों का मंच विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है।'

तोमर ने यह भी कहा कि जब ब्रिक्स देशों के संसदीय प्रतिनिधि एक साथ बैठते हैं, तो वे अपने विचार साझा करते हैं और मौजूदा चुनौतियों से निपटने के उपायों पर चर्चा करते हैं।

प्रमुख देशों की भागीदारी और एजेंडा

BJP सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि इस फोरम में दुनिया की प्रमुख शक्तियाँ हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने भारत, चीन, ब्राज़ील, रूस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान सहित प्रमुख देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों के प्रतिनिधि इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे हैं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी देश के सामने संकट आने पर किस तरह के कदम उठाए जाएं।

जायसवाल ने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स देशों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, और इस मंच पर साझा चुनौतियों पर ठोस विचार-विमर्श हो रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष और PM मोदी की भूमिका

बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि उन्हें बिहार की ओर से इस फोरम में भाग लेने का अवसर मिला है और इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। उन्होंने हाल में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया के अनेक देशों के प्रतिनिधियों के भारत आने से सकारात्मक संदेश गया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बताया कि हाल के ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसी के आधार पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से ब्रिक्स पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन आयोजित किया गया है।

भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर

पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने इस सम्मेलन को भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों की सराहना की। संधवां ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और दुनिया के कई हिस्सों में अशांति बढ़ रही है।

उन्होंने जोड़ा कि ऐसे में विश्व में शांति के प्रसार के लिए भारत को आगे आना चाहिए और संसदीय लोकतंत्र विभिन्न देशों को एक साथ लाने और आपसी सहयोग बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

आगे की राह

महाना ने उम्मीद जताई कि अगले दो दिनों के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए सार्थक विचार सामने आएंगे। गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक असमानता और वैश्विक संघर्षों के बीच बहुपक्षीय संसदीय संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह बयानबाज़ी से आगे नहीं जाएगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत, चीन और रूस जैसे देश — जिनके रणनीतिक हित कई बिंदुओं पर टकराते हैं — एक ही मेज पर हैं। मुख्यधारा की कवरेज उत्साहजनक उद्धरणों पर केंद्रित है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि दो दिनों के बाद सामने आने वाला दस्तावेज़ कितना क्रियान्वयन-योग्य है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम क्या है?
12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम ब्रिक्स देशों के पीठासीन अधिकारियों और संसदीय प्रतिनिधियों का एक बहुपक्षीय सम्मेलन है, जो 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और वैश्विक चुनौतियों पर साझा रणनीति तैयार करना है।
इस सम्मेलन में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
BJP सांसद संजय जायसवाल के अनुसार, भारत, चीन, ब्राज़ील, रूस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान सहित प्रमुख ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। ये सभी देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं।
यह सम्मेलन क्यों आयोजित किया गया?
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के अनुसार, हाल के ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पारित एक प्रस्ताव के आधार पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से ब्रिक्स पीठासीन अधिकारियों का यह सम्मेलन आयोजित किया गया है।
इस सम्मेलन से क्या उम्मीदें हैं?
नेताओं के अनुसार, अगले दो दिनों में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने, वैश्विक संकट प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर सार्थक चर्चा होगी। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उम्मीद जताई कि इससे निकलने वाले निष्कर्ष पूरी दुनिया के लिए उपयोगी होंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की इसमें क्या भूमिका है?
बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मार्गदर्शन और प्रयासों की सराहना की। संधवां ने कहा कि बिरला की यह पहल दुनिया में लोकतंत्र को मजबूत करने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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