कर्जत पंप स्टोरेज परियोजना: CM फडणवीस का बचाव — '3,000 MW की यह परियोजना महाराष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनिवार्य'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को रायगढ़ जिले के कर्जत में प्रस्तावित 3,000 मेगावाट की पंप स्टोरेज हाइड्रो परियोजना का दृढ़ता से बचाव किया और विपक्ष के विरोध को 'तकनीकी समझ से परे राजनीति' करार दिया। उन्होंने इस परियोजना को महाराष्ट्र के बिजली ग्रिड की स्थिरता और दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा भविष्य के लिए अनिवार्य बताया।
परियोजना का महत्व और तकनीकी आधार
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सौर और पवन ऊर्जा, हालाँकि स्वच्छ हैं, 24/7 निर्बाध बिजली आपूर्ति में असमर्थ हैं और ग्रिड को अस्थिर कर सकती हैं। उनके अनुसार, पंप स्टोरेज तकनीक एक प्रदूषण-रहित समाधान है जो नवीकरणीय स्रोतों को संतुलित करती है और चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली सुनिश्चित करती है।
उन्होंने यह भी बताया कि पारंपरिक बैटरी भंडारण प्रणालियाँ लगभग 25 वर्षों तक चलती हैं, जबकि पंप स्टोरेज अवसंरचना 80 वर्षों तक प्रभावी रहती है — जो इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दीर्घकालिक निवेश बनाता है।
पर्यावरण विवाद और वृक्षारोपण योजना
परियोजना के लिए व्यापक वृक्ष कटाई की ज़रूरत ने पर्यावरणविदों और विपक्ष में गंभीर चिंता उत्पन्न की है। हालाँकि, फडणवीस ने कुछ पेड़ों की कटाई स्वीकार करते हुए कहा कि यह पर्यावरणीय प्रभाव अस्थायी है। उनके अनुसार, वन विभाग द्वारा 90,000 पेड़ लगाए जाएंगे और कर्जत परियोजना स्थल पर सीधे 60,000 अतिरिक्त पेड़ रोपे जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि इतनी ही ऊर्जा पारंपरिक कोयला आधारित संयंत्रों से उत्पन्न करने पर वह प्रदूषण होगा जो 4 करोड़ वाहनों के उत्सर्जन के बराबर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि थर्मल पावर उत्पादन की इस भरपाई के लिए अन्यथा 28 करोड़ पेड़ लगाने पड़ते। राज्य सरकार का यह भी कहना है कि यह परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमाओं से बाहर स्थित है।
विपक्ष पर पलटवार और आरे विवाद से तुलना
फडणवीस ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह तकनीकी आवश्यकताओं की उचित समझ के बिना एक महत्वपूर्ण हरित ऊर्जा पहल का राजनीतिकरण कर रहा है। उन्होंने इस विरोध की तुलना आरे कार शेड परियोजना से जुड़े पुराने कानूनी विवादों से की, जिसे अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में बड़े बुनियादी ढाँचा प्रकल्पों पर पर्यावरण बनाम विकास की बहस लगातार तेज हो रही है। गौरतलब है कि चीन ने इसी तकनीक पर आधारित 60,000 मेगावाट से अधिक की पंप स्टोरेज अवसंरचना विकसित की है — एक तथ्य जिसे फडणवीस ने परियोजना की वैश्विक स्वीकार्यता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।
स्थान चुनाव पर स्पष्टीकरण
आलोचकों की उस माँग पर — कि परियोजना को मराठवाड़ा या विदर्भ जैसे अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए — मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंप स्टोरेज अवसंरचना के लिए विशिष्ट भौगोलिक भूभाग और स्थलाकृति आवश्यक होती है। उनके अनुसार, कठोर व्यवहार्यता मूल्यांकन के बाद ही कर्जत को आदर्श स्थान के रूप में चुना गया।
आगे की राह
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह वास्तविक पर्यावरणीय चिंताओं को सुनने के लिए तत्पर है, लेकिन परियोजना को आवश्यक ऊर्जा परिवर्तन का हिस्सा मानते हुए आगे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना की स्वीकार्यता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की योजनाओं को पारदर्शी ढंग से लागू करती है या नहीं।