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ESTIC 2026 में PM मोदी का संदेश: AI और रिसर्च को आम जनता की सेवा में लगाएं, 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

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ESTIC 2026 में PM मोदी का संदेश: AI और रिसर्च को आम जनता की सेवा में लगाएं, 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

सारांश

ESTIC 2026 में PM मोदी ने भारत के वैज्ञानिकों को स्पष्ट संदेश दिया — AI और तकनीक को हथियार नहीं, मानवता की सेवा का साधन बनाएं। 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को लेकर उनका यह आह्वान देश के वैज्ञानिक समुदाय के लिए नई प्रेरणा बनकर उभरा।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ESTIC 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया।
मोदी ने AI और अन्य तकनीकों को हथियारों की बजाय मानवता की सेवा के लिए विकसित करने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों को रिसर्च को प्रयोगशालाओं से बाहर आम जनता तक पहुँचाने का आह्वान किया।
2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कृषि, ऊर्जा, AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों पर फोकस का संदेश दिया।
ICAR, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिन सहित देशभर के वैज्ञानिकों ने संबोधन को प्रेरणादायी बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2026 के उद्घाटन समारोह में वैज्ञानिकों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों और नवप्रवर्तकों को संबोधित करते हुए जोर दिया कि अनुसंधान को प्रयोगशालाओं की सीमाओं से बाहर निकलकर आम जनता के जीवन में बदलाव लाना चाहिए। कार्यक्रम में शामिल वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री के संबोधन को 'विकसित भारत 2047' के विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा बताया।

AI को हथियार नहीं, मानवता की सेवा का साधन बनाएं

कार्यक्रम में भाग लेने वाली वैज्ञानिक डॉ. श्वेता ने प्रधानमंत्री के संबोधन का सार साझा करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि AI और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल हथियारों के रूप में करने के बजाय, मानवता की सेवा के लिए कैसे किया जा सकता है। ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित करने पर फोकस करना चाहिए, जिससे मानव की सेवा की जा सके।" यह संदेश वैश्विक स्तर पर AI के दुरुपयोग को लेकर चल रही बहसों के बीच विशेष रूप से प्रासंगिक माना जा रहा है।

एक अन्य वैज्ञानिक ने बताया कि प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि शोधकर्ताओं को खुद को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए — रिसर्च आम जनता के लिए समर्पित होनी चाहिए।

2047 विजन: आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक नींव

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के अनुराग तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री का 2047 के लिए विजन विज्ञान और तकनीक की मदद से भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि मोदी ने कार्यक्रम में AI और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया। तिवारी के अनुसार, रिसर्च और इनोवेशन को सरकार का समर्थन मिलने से आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य अधिक सुलभ होगा।

पारंपरिक चिकित्सा से कृषि तक — बहुआयामी वैज्ञानिक सत्र

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिन के डॉ. हर्षा एकाडे ने उद्घाटन समारोह और वैज्ञानिक सत्रों को 'अत्यंत जानकारीपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिकों को किन प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और वे 'विकसित भारत' के निर्माण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी.वी. सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री ने युवा वैज्ञानिकों और इनोवेटर्स से 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कृषि, ऊर्जा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका

ICAR के वैज्ञानिक डॉ. विक्रम सिंह ने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर तेज़ी से उभर रहा है और देश के भीतर तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत से बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि सभी वैज्ञानिक प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित मार्ग और विजन पर चलने तथा उनके प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ा रही है। ESTIC 2026 जैसे मंच इस रणनीतिक दिशा को ज़मीनी स्तर पर आकार देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी नीतिगत अनुवाद है — क्या सरकार ANRF जैसे फंडिंग ढाँचों में 'जन सेवा केंद्रित रिसर्च' को मापने योग्य मानदंड बनाएगी? भारत का R&D खर्च अभी भी GDP के लगभग 0.65% पर है, जो वैश्विक नवप्रवर्तन नेताओं की तुलना में काफी कम है। AI और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य तब तक कागज़ी रहेंगे, जब तक फैब्रिकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल जनशक्ति में ठोस निवेश नहीं होता। मोदी का 2047 विजन दिशा देता है — लेकिन दिशा और गंतव्य के बीच की दूरी सिर्फ भाषणों से नहीं, बजट आवंटन और जवाबदेही तंत्र से तय होगी।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ESTIC 2026 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
ESTIC 2026 यानी इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव एक राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन है जो 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इसमें PM मोदी ने उद्घाटन संबोधन दिया और देशभर के वैज्ञानिक, स्टार्टअप प्रतिनिधि एवं नवप्रवर्तक शामिल हुए।
ESTIC 2026 में PM मोदी ने AI के बारे में क्या कहा?
PM मोदी ने कहा कि AI और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल हथियारों के रूप में करने के बजाय मानवता की सेवा के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों से ऐसी तकनीक विकसित करने पर ध्यान देने की अपील की जो सीधे आम जनता के जीवन को बेहतर बनाए।
PM मोदी का 2047 के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विजन क्या है?
मोदी का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत विज्ञान और तकनीक की मदद से एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बने। इसके लिए उन्होंने कृषि, ऊर्जा, AI, सेमीकंडक्टर जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में शोध और नवाचार को केंद्रित करने पर जोर दिया।
ESTIC 2026 में किन संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया?
कार्यक्रम में ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिन और इंदौर के एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च सहित देशभर के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल हुए।
ESTIC 2026 में रिसर्च को आम जनता तक पहुँचाने पर क्यों जोर दिया गया?
PM मोदी ने वैज्ञानिकों को याद दिलाया कि शोध का अंतिम उद्देश्य समाज की सेवा है, न कि केवल प्रयोगशाला में परिणाम प्राप्त करना। यह संदेश इस संदर्भ में अहम है क्योंकि भारत अपने R&D निवेश को जन कल्याण परिणामों से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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