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फर्जी एआई वीडियो पर बिहार कांग्रेस प्रवक्ता की गिरफ्तारी क्यों नहीं: रिटायर्ड कर्नल अजय रैना का सवाल

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फर्जी एआई वीडियो पर बिहार कांग्रेस प्रवक्ता की गिरफ्तारी क्यों नहीं: रिटायर्ड कर्नल अजय रैना का सवाल

सारांश

रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने बिहार कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा पोस्ट चीन-अरुणाचल डीपफेक वीडियो को 'देश के खिलाफ विद्रोह' बताया और गिरफ्तारी न होने पर सरकार व एडीजीपीआई से जवाब माँगा। पीओके में जारी अशांति और पाकिस्तान के आंतरिक संकट को भी उन्होंने रेखांकित किया।

मुख्य बातें

रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने बिहार कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा पोस्ट किए गए डीपफेक एआई वीडियो को 'देश के खिलाफ विद्रोह' बताया और गिरफ्तारी की माँग की।
उन्होंने एडीजीपीआई की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में 'कार्रवाई और तेजी से होनी चाहिए।' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कश्मीर समर्थन बयान को उन्होंने खोखला राजनीतिक बयान बताया, और कहा कि बलूचिस्तान , खैबर पख्तूनख्वा व पीओजेके में अलगाव की स्थितियाँ बन रही हैं।
पूर्व CM फारूक अब्दुल्ला के बयान पर कहा कि कश्मीर में संघर्ष के दौर में आती फंडिंग बंद होने से कई लोगों के हित प्रभावित हुए — उन्होंने स्वयं 11 साल कश्मीर में सेवा की।
22 अक्टूबर के 'ब्लैक डे' नैरेटिव पर कहा कि 2019 के बाद स्थिति बदल चुकी है और पुराना नैरेटिव कमजोर पड़ रहा है।

सेवानिवृत्त कर्नल अजय रैना ने 27 अक्टूबर 2026 को जम्मू में चीन और अरुणाचल प्रदेश को लेकर वायरल हुए फर्जी एआई (डीपफेक) वीडियो को 'देश के खिलाफ विद्रोह' करार देते हुए सवाल उठाया कि बिहार कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा पोस्ट किए गए उस डीपफेक वीडियो पर अब तक कोई गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि भारतीय सेना के रणनीतिक संचार विभाग एडीजीपीआई ने इस मामले में अब तक चुप्पी क्यों साधी हुई है।

डीपफेक वीडियो और कानूनी कार्रवाई की माँग

रिटायर्ड कर्नल रैना ने कहा कि आज के दौर में एआई तकनीक के कारण डीपफेक वीडियो बनाना आसान हो गया है और दुश्मन इसका पूरा फायदा उठाएंगे। उन्होंने कहा, 'दुश्मन अपना काम करेगा। जैसे-जैसे तकनीक बढ़ेगी, उसका दुरुपयोग भी होगा।' उनका कहना था कि सेना से जुड़े अनुभवी लोग ऐसे वीडियो में रैंक और पद की गलतियाँ तुरंत पकड़ लेते हैं, लेकिन आम नागरिक इन्हें असली समझ सकते हैं।

उन्होंने भारत सरकार और एडीजीपीआई से सीधे सवाल किया कि 'ये जो डीपफेक वीडियो बिहार कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता ने पोस्ट किए, वो अब तक जेल के अंदर क्यों नहीं है?' उनके अनुसार जानबूझकर फर्जी वीडियो फैलाना देश के खिलाफ विद्रोह की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में 'कार्रवाई और तेजी से होनी चाहिए।'

पाकिस्तान के आंतरिक संकट और कश्मीर बयानबाज़ी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कश्मीर समर्थन वाले बयान पर कर्नल रैना ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान के नेता 'लाहौर और इस्लामाबाद के अंदर' समर्थन करते रहें, उधर बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओजेके के अलग होने की प्रक्रिया जारी रहेगी। उनका कहना था कि ऐसे राजनीतिक बयानों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण जमीनी हकीकत होती है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान में सत्ता व्यवस्था पर सेना का प्रभाव बहुत अधिक है और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश उसी परिप्रेक्ष्य में आते हैं। इसलिए ऐसे बयानों को उसी संदर्भ में देखना चाहिए।

पीओके में हालात और 'ब्लैक डे' का बदलता नैरेटिव

रिटायर्ड कर्नल रैना ने पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ रोज एलएमजी से फायरिंग हो रही है और लोग चार महीने से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 22 अक्टूबर को 'ब्लैक डे' के रूप में देखने का नजरिया 2019 के बाद बदल चुका है — यह दिन अब उस लूटपाट, हत्या और हिंसा की याद दिलाता है जो पाकिस्तान समर्थित कबायलियों के कश्मीर में घुसने के बाद हुई थी।

उनके मुताबिक जो लोग इस मुद्दे पर शोर मचाते हैं, उन्हें इस बात की तकलीफ है कि 'उनका वर्षों पुराना नैरेटिव अब कमजोर पड़ रहा है।'

फारूक अब्दुल्ला के बयान और फंडिंग का सवाल

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला के बयान पर कर्नल रैना ने कहा कि वे 'अपनी जगह निराश दिखाई देते हैं।' उन्होंने कहा कि कश्मीर में लंबे समय तक संघर्ष और आतंकवाद के दौर में बड़ी मात्रा में फंडिंग आती थी — और स्वयं 11 साल कश्मीर में सेवा के दौरान उन्होंने देखा कि कई परियोजनाएं कागजों पर बनती थीं और कागजों पर ही समाप्त हो जाती थीं। जब ऐसी व्यवस्थाएं बंद हुईं तो कई लोगों के हित प्रभावित हुए।

आगे क्या होगा

रिटायर्ड कर्नल रैना का मानना है कि जब तक ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी जो जानबूझकर फर्जी वीडियो फैलाते हैं, ये प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने इसे 'हमारी कमजोरी' बताया। यह मामला डीपफेक और एआई-जनित दुष्प्रचार पर भारत में कानूनी ढाँचे की मजबूती की बहस को नई धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसका प्रवर्तन धीमा और असमान रहा है। यह पहली बार नहीं है कि सेना या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फर्जी वीडियो वायरल हुए हों और जवाबी कार्रवाई महीनों बाद या बिल्कुल न हुई हो। एडीजीपीआई की चुप्पी सिर्फ संस्थागत सुस्ती नहीं, बल्कि रणनीतिक संचार की विफलता भी है — जो दुष्प्रचार को और फैलने का मौका देती है। जब तक डीपफेक मामलों में त्वरित और दृश्यमान कार्रवाई नहीं होगी, भविष्य में ऐसे प्रयास और बेखौफ होंगे।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने किस वीडियो पर गिरफ्तारी की माँग की है?
रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने बिहार कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा पोस्ट किए गए उस डीपफेक एआई वीडियो पर गिरफ्तारी की माँग की है, जो चीन और अरुणाचल प्रदेश को लेकर वायरल हुआ था। उन्होंने इसे 'देश के खिलाफ विद्रोह' बताते हुए तत्काल कानूनी कार्रवाई की अपील की।
एडीजीपीआई क्या है और कर्नल रैना ने उस पर सवाल क्यों उठाए?
एडीजीपीआई (ADGPI) भारतीय सेना का रणनीतिक संचार विभाग है जो सेना से जुड़े सूचना प्रसार और काउंटर-नैरेटिव का काम देखता है। कर्नल रैना ने सवाल किया कि सेना से जुड़े डीपफेक वीडियो वायरल होने के बावजूद एडीजीपीआई ने कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कश्मीर बयान पर कर्नल रैना का क्या कहना है?
कर्नल रैना ने शहबाज शरीफ के कश्मीर समर्थन बयान को खोखली राजनीतिक बयानबाज़ी करार दिया। उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान खुद बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओजेके में आंतरिक अलगाव की समस्याओं से जूझ रहा है, तब ऐसे बयानों की जमीनी हकीकत से कोई प्रासंगिकता नहीं।
22 अक्टूबर के 'ब्लैक डे' नैरेटिव पर कर्नल रैना का क्या मत है?
कर्नल रैना ने कहा कि 2019 के बाद 22 अक्टूबर को देखने का नजरिया बदल चुका है — यह दिन अब उस हिंसा, लूटपाट और अत्याचार की याद दिलाता है जो पाकिस्तान समर्थित कबायलियों के घुसने के बाद हुई थी। उन्होंने कहा कि जो लोग इस पर शोर मचाते हैं, उन्हें पुराने नैरेटिव के कमजोर पड़ने की चिंता है।
डीपफेक वीडियो पर कानूनी कार्रवाई न होने से क्या खतरा है?
कर्नल रैना के अनुसार जब तक जानबूझकर फर्जी वीडियो फैलाने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने इसे 'हमारी कमजोरी' बताया और कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
राष्ट्र प्रेस
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