पीयूष गोयल का डीपफेक वीडियो वायरल, चाणक्यपुरी थाने में एफआईआर; बोले- 'एआई का दुर्भावनापूर्ण दुरुपयोग स्वीकार नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 25 जुलाई 2026 को खुलासा किया कि सोशल मीडिया पर उनका एक डीपफेक वीडियो तेज़ी से वायरल किया जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी असली बातचीत के साथ छेड़छाड़ की गई है। मंत्री की शिकायत पर शनिवार सुबह 4.35 बजे चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
मुख्य घटनाक्रम
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि संसद के बाहर मीडिया से उनकी बातचीत की वीडियो को एआई की मदद से दुर्भावनापूर्ण तरीके से बदलकर गलत सूचना फैलाने के उद्देश्य से प्रसारित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और इसका मकसद जनता को गुमराह करना है।
मंत्री ने चेतावनी दी कि इस फर्जी वीडियो को बनाने, प्रसारित करने या जानबूझकर बढ़ावा देने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो में क्या दावा किया गया
कथित तौर पर वायरल वीडियो में दावा किया गया था कि गोयल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बारे में धमकी भरी टिप्पणियाँ की हैं। यह वीडियो उस समय फैलाया गया जब जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन जारी था। पीआईबी फैक्ट चेक ने खुलासा किया कि यह वीडियो पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा अकाउंट्स से वायरल किया जा रहा था।
मंत्री की अपील
गोयल ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'जनता को गुमराह करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस प्रकार का गैर-जिम्मेदाराना और दुर्भावनापूर्ण दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।'
उन्होंने भरोसा जताया कि 'भारत के जागरूक और तकनीक-समझ रखने वाले नागरिक, विशेषकर हमारे युवा, ऐसे फर्जी और एआई से बनी गलत जानकारी का शिकार नहीं बनेंगे।'
डीपफेक और कानूनी ढाँचा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डीपफेक से जुड़े मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। गौरतलब है कि सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और नए डिजिटल नियमों के तहत एआई-जनित फर्जी सामग्री के विरुद्ध कार्रवाई को सख्त बनाने पर विचार कर रही है। किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का इस तरह डीपफेक का शिकार होना और पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा नेटवर्क का इसमें कथित संलिप्तता, इसे महज एक व्यक्तिगत मामले से आगे राष्ट्रीय सूचना-सुरक्षा का प्रश्न बनाती है।
आगे क्या होगा
दिल्ली पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बाद जाँच शुरू कर चुकी है। वीडियो फैलाने में शामिल अकाउंट्स की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। आने वाले दिनों में यह मामला डीपफेक विनियमन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर नई बहस छेड़ सकता है।