भाई जगताप के X अकाउंट पर AI-निर्मित फर्जी वीडियो: महाराष्ट्र साइबर ने दर्ज की FIR
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने 1 अगस्त 2026 को एक कथित भड़काऊ और फर्जी वीडियो के मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह वीडियो कांग्रेस नेता भाई जगताप के आधिकारिक एक्स (X) अकाउंट से 30 जुलाई 2026 को शाम 6:09 बजे प्रसारित किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है और इसमें दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी की आवाज़ तथा संवाद में कृत्रिम रूप से बदलाव किया गया है।
वीडियो में क्या था
प्रश्नगत वीडियो में एक व्यक्ति को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का अधिकारी बताया गया है, जो कथित तौर पर यह कहते हुए दिखाई देता है कि वह 'तत्काल प्रभाव से IPS से इस्तीफा दे रहा है' और सरकार पर उसे 'सड़कों पर हक की माँग कर रहे छात्रों के बारे में झूठ बोलने' के लिए दबाव डालने का आरोप लगाता है। वीडियो के कैप्शन में लिखा था — 'दिल्ली पुलिस के सरकार पर गंभीर आरोप'। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस वीडियो का उद्देश्य समाज में भ्रम फैलाना, सरकार के विरुद्ध दुष्प्रचार करना और जनमानस में असंतोष उत्पन्न करना था।
पीआईबी फैक्ट-चेक और FIR का आधार
उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने 28 जुलाई 2026 को ही इस वीडियो की तथ्य-जाँच कर इसे पूरी तरह फर्जी घोषित कर दिया था और अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी जानकारी सार्वजनिक की थी। इसके बावजूद, शिकायतकर्ता के अनुसार, वीडियो की सत्यता की जाँच किए बिना उसे भाई जगताप के एक्स अकाउंट से प्रसारित किया गया। शिकायतकर्ता ने 31 जुलाई को दोपहर लगभग 2:00 बजे इस पोस्ट को देखने के बाद पुलिस को सूचित किया।
FIR की विशेषता: अज्ञात आरोपी
ध्यान देने योग्य है कि यद्यपि वीडियो भाई जगताप के आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट किया गया था, तथापि एफआईआर अज्ञात आरोपी के विरुद्ध दर्ज की गई है। इसका अर्थ यह है कि जाँच एजेंसी अभी यह निर्धारित करने की प्रक्रिया में है कि वीडियो पोस्ट करने के पीछे वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है — अकाउंट स्वामी की, किसी तीसरे पक्ष की, या अकाउंट से छेड़छाड़ की संभावना की।
जाँच की स्थिति
महाराष्ट्र साइबर सेल अब डिजिटल साक्ष्य, अकाउंट की तकनीकी जानकारी और पोस्ट से जुड़े अन्य पहलुओं की विस्तृत जाँच कर रही है। AI-निर्मित डीपफेक वीडियो के ज़रिये दुष्प्रचार का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में साइबर अपराध और डिजिटल फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि आगे किसके खिलाफ कार्रवाई होगी।