PM मोदी के मॉर्फ्ड वीडियो पर हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने दर्ज की FIR, 20 अकाउंट्स जाँच के घेरे में
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित मॉर्फ्ड वीडियो और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार के मामले में औपचारिक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज यह मामला उन 20 सोशल मीडिया अकाउंट्स के विरुद्ध है, जिन पर भारत की संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाली सामग्री फैलाने का आरोप है।
शिकायत कैसे दर्ज हुई
यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी (BJP) तेलंगाना राज्य के सोशल मीडिया संयोजक सुमिरन कवी के निर्देश पर दर्ज कराई गई। पार्टी के सोशल मीडिया पदाधिकारी साईकिरण गौड़ ने पार्टी सदस्यों अजय और अश्विन के साथ हैदराबाद के साइबर क्राइम स्टेशन में जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में 20 संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स की सूची पुलिस को सौंपी गई।
शिकायत में क्या माँगा गया
शिकायतकर्ताओं ने माँग की कि मॉर्फ्ड वीडियो फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, सोशल मीडिया कंपनी मेटा के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की माँग रखी गई। शिकायत में कहा गया, 'हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस पर पूरा भरोसा है और अनुरोध है कि देश के हितों की रक्षा व कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून के अनुसार जरूरी कार्रवाई करें।'
मेटा पर सरकार की कार्रवाई
इस घटनाक्रम से पहले, पीएम मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने मेटा से विस्तृत जवाब माँगा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को सरकार के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह बैठक अगले सात से दस दिनों के भीतर होने की संभावना है।
मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार नीतिगत और तकनीकी — दोनों स्तरों पर मेटा से स्पष्टीकरण चाहती है। उन्होंने कहा, 'भारत अपनी चिंताएँ सीधे मेटा तक पहुँचाना चाहता है और उन हालात के बारे में पूरी जानकारी चाहता है जिनकी वजह से यह अस्थायी रोक लगाई गई थी।'
जाँच की स्थिति
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद कथित आपत्तिजनक सामग्री फैलाने में शामिल संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स की जाँच शुरू कर दी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक हस्तियों से जुड़ी फर्जी और मॉर्फ्ड सामग्री को लेकर देशभर में कानूनी कार्रवाइयों की संख्या बढ़ रही है। गौरतलब है कि IT अधिनियम और BNS के तहत ऐसे मामलों में अभियुक्तों को कठोर दंड का प्रावधान है।