पीएम मोदी और पीयूष गोयल के मॉर्फ्ड वीडियो पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस की एफआईआर, अज्ञात आरोपी की तलाश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने 31 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के कथित मॉर्फ्ड वीडियो प्रसारित करने के मामले में अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है। यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक सोशल मीडिया पदाधिकारी ने नोडल साइबर पुलिस के समक्ष दर्ज कराई थी।
मामले का मूल घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, छात्रों के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कई सोशल मीडिया अकाउंट्स से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कथित तौर पर डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया हुआ अथवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से निर्मित वीडियो फैलाया गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर भी आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की गई।
शिकायतकर्ता ने बताया कि 'महाराष्ट्र धर्म' नामक एक फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया गया था, जिसके कैप्शन में दावा किया गया था कि पीयूष गोयल ने प्रदर्शनकारियों को 'कॉकरोच' कहते हुए उन्हें 'सार्वजनिक रूप से फाँसी' देने की बात कही है।
वीडियो में छेड़छाड़ का खुलासा कैसे हुआ
शिकायतकर्ता ने प्रसारित वीडियो क्लिप की तुलना एक मीडिया एजेंसी द्वारा पोस्ट किए गए मूल वीडियो से की। इस तुलना के आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वायरल वीडियो को डिजिटल रूप से संपादित किया गया था अथवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से तैयार किया गया था।
इसके अतिरिक्त, शिकायत में प्रधानमंत्री मोदी की एक मॉर्फ की हुई तस्वीर, इंस्टाग्राम पर प्रसारित एक आपत्तिजनक वीडियो और उनके विरुद्ध अपशब्दों वाले एक अन्य वीडियो को भी चिह्नित किया गया है।
शिकायतकर्ता के आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन पोस्ट्स को जानबूझकर झूठी सूचनाएँ फैलाने, जनता में असंतोष भड़काने और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की छवि को नुकसान पहुँचाने के इरादे से प्रसारित किया गया। पुलिस के अनुसार, यह सामग्री छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुनियोजित तरीके से फैलाई गई।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएँ
शिकायत के आधार पर नोडल साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 336, 352, 353(1), 353(2), 356(1) और 356(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66(डी) और 67 के तहत एफआईआर दर्ज की है।
पुलिस अब उन सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालकों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने ये पोस्ट शेयर किए। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में डीपफेक और AI-जनित भ्रामक सामग्री को लेकर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
आगे क्या होगा
साइबर पुलिस डिजिटल फॉरेंसिक जाँच के ज़रिए सोशल मीडिया अकाउंट्स के मूल संचालकों तक पहुँचने की कोशिश करेगी। संबंधित प्लेटफॉर्म्स से डेटा माँगा जा सकता है। यह मामला भारत में AI-जनित फर्जी सामग्री के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है।