31 जुलाई 2026
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पीएम मोदी और पीयूष गोयल के मॉर्फ्ड वीडियो पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस की एफआईआर, अज्ञात आरोपी की तलाश

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पीएम मोदी और पीयूष गोयल के मॉर्फ्ड वीडियो पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस की एफआईआर, अज्ञात आरोपी की तलाश

सारांश

छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच पीएम मोदी और पीयूष गोयल के कथित AI-निर्मित मॉर्फ्ड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। BJP पदाधिकारी की शिकायत पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने BNS और IT अधिनियम की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर अज्ञात आरोपियों की तलाश शुरू की है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने 31 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के मॉर्फ्ड वीडियो मामले में एफआईआर दर्ज की।
शिकायत BJP के एक सोशल मीडिया पदाधिकारी ने दर्ज कराई; 'महाराष्ट्र धर्म' फेसबुक अकाउंट को मुख्य रूप से चिह्नित किया गया।
वायरल वीडियो में दावा था कि पीयूष गोयल ने प्रदर्शनकारियों को 'सार्वजनिक रूप से फाँसी' देने की बात कही — शिकायतकर्ता ने इसे AI-जनित बताया।
पुलिस ने BNS धारा 318(2), 336, 352, 353(1), 353(2), 356(1), 356(2) और IT अधिनियम धारा 66(डी), 67 के तहत मामला दर्ज किया।
अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों की पहचान के लिए डिजिटल फॉरेंसिक जाँच जारी।

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने 31 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के कथित मॉर्फ्ड वीडियो प्रसारित करने के मामले में अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है। यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक सोशल मीडिया पदाधिकारी ने नोडल साइबर पुलिस के समक्ष दर्ज कराई थी।

मामले का मूल घटनाक्रम

शिकायत के अनुसार, छात्रों के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कई सोशल मीडिया अकाउंट्स से केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कथित तौर पर डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किया हुआ अथवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से निर्मित वीडियो फैलाया गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर भी आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की गई।

शिकायतकर्ता ने बताया कि 'महाराष्ट्र धर्म' नामक एक फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया गया था, जिसके कैप्शन में दावा किया गया था कि पीयूष गोयल ने प्रदर्शनकारियों को 'कॉकरोच' कहते हुए उन्हें 'सार्वजनिक रूप से फाँसी' देने की बात कही है।

वीडियो में छेड़छाड़ का खुलासा कैसे हुआ

शिकायतकर्ता ने प्रसारित वीडियो क्लिप की तुलना एक मीडिया एजेंसी द्वारा पोस्ट किए गए मूल वीडियो से की। इस तुलना के आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वायरल वीडियो को डिजिटल रूप से संपादित किया गया था अथवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से तैयार किया गया था।

इसके अतिरिक्त, शिकायत में प्रधानमंत्री मोदी की एक मॉर्फ की हुई तस्वीर, इंस्टाग्राम पर प्रसारित एक आपत्तिजनक वीडियो और उनके विरुद्ध अपशब्दों वाले एक अन्य वीडियो को भी चिह्नित किया गया है।

शिकायतकर्ता के आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन पोस्ट्स को जानबूझकर झूठी सूचनाएँ फैलाने, जनता में असंतोष भड़काने और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की छवि को नुकसान पहुँचाने के इरादे से प्रसारित किया गया। पुलिस के अनुसार, यह सामग्री छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुनियोजित तरीके से फैलाई गई।

पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएँ

शिकायत के आधार पर नोडल साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 336, 352, 353(1), 353(2), 356(1) और 356(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66(डी) और 67 के तहत एफआईआर दर्ज की है।

पुलिस अब उन सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालकों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने ये पोस्ट शेयर किए। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में डीपफेक और AI-जनित भ्रामक सामग्री को लेकर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।

आगे क्या होगा

साइबर पुलिस डिजिटल फॉरेंसिक जाँच के ज़रिए सोशल मीडिया अकाउंट्स के मूल संचालकों तक पहुँचने की कोशिश करेगी। संबंधित प्लेटफॉर्म्स से डेटा माँगा जा सकता है। यह मामला भारत में AI-जनित फर्जी सामग्री के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या विशेष डीपफेक-विरोधी कानून की ज़रूरत है — जो अभी तक संसद में पेश नहीं हुआ।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मॉर्फ्ड वीडियो मामले में एफआईआर क्यों दर्ज की?
BJP के एक सोशल मीडिया पदाधिकारी की शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के AI-निर्मित या डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाए गए। इन वीडियो में झूठे दावे किए गए थे जो संवैधानिक पदाधिकारियों की छवि को नुकसान पहुँचाने के इरादे से प्रसारित किए गए बताए गए।
'महाराष्ट्र धर्म' फेसबुक अकाउंट का इस मामले में क्या रोल है?
शिकायत के अनुसार, 'महाराष्ट्र धर्म' नामक फेसबुक अकाउंट से एक मॉर्फ्ड वीडियो शेयर किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि पीयूष गोयल ने प्रदर्शनकारियों को 'सार्वजनिक रूप से फाँसी' देने की बात कही। शिकायतकर्ता ने इस वीडियो की तुलना मूल क्लिप से कर इसे फर्जी बताया।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 336, 352, 353(1), 353(2), 356(1) और 356(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66(डी) और 67 के तहत एफआईआर दर्ज की है। ये धाराएँ धोखाधड़ी, मानहानि और अश्लील सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक प्रसार से संबंधित हैं।
क्या किसी को अब तक गिरफ्तार किया गया है?
अभी तक एफआईआर अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध दर्ज की गई है। साइबर पुलिस संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स के संचालकों की पहचान के लिए डिजिटल फॉरेंसिक जाँच कर रही है और किसी की गिरफ्तारी की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
AI-जनित मॉर्फ्ड वीडियो के खिलाफ भारत में क्या कानूनी प्रावधान हैं?
भारत में अभी कोई विशेष डीपफेक-विरोधी कानून नहीं है, लेकिन IT अधिनियम की धारा 66(डी) और 67 तथा BNS की विभिन्न धाराओं के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI-जनित फर्जी सामग्री से निपटने के लिए समर्पित कानून की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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