पीएम मोदी के डीपफेक वीडियो फैला रहे पाकिस्तानी हैंडल, छात्र प्रदर्शन भड़काने की साज़िश: इंटेलिजेंस
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियों ने 1 अगस्त को खुलासा किया कि पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए डीपफेक वीडियो की एक सुनियोजित मुहिम चला रहे हैं, जिसका मकसद नई दिल्ली सहित देश भर में छात्र प्रदर्शनों को फिर से भड़काना है। अधिकारियों के अनुसार, ये वीडियो जानबूझकर युवाओं को प्रधानमंत्री के विरुद्ध उकसाने के इरादे से तैयार किए गए हैं।
डीपफेक अभियान का स्वरूप
इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक, तेज़ी से वायरल हो रहे इन फर्ज़ी वीडियो में दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी हालिया विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की योजना बना रहे हैं। एक वीडियो में प्रधानमंत्री की आवाज़ के साथ यह कहलवाया जा रहा है कि 'भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।' वास्तव में, यह पीएम मोदी का एक पुराना वीडियो है जिसमें उन्होंने पेपर माफिया के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प लिया था और छात्रों को परीक्षा सुधार के सकारात्मक सुझावों के लिए धन्यवाद दिया था — उस मूल संदर्भ को पूरी तरह बदल दिया गया है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो की चेतावनी
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि 'यह सिस्टमैटिक टारगेटिंग है, जिसका साफ इरादा छात्रों को सड़कों पर वापस लाना है — और इस बार सिर्फ प्रधानमंत्री को निशाना बनाया जा रहा है।' अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी हैंडल यह उम्मीद पाले हैं कि छात्र आंदोलन के ज़रिए भारत की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर किया जा सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और शांति की अपील
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र ने पिछले सप्ताह छात्रों को यह आश्वासन दिया था। दिल्ली सरकार ने गुरुवार को यह भी स्पष्ट किया कि नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन से जुड़ी 13 एफआईआर में चल रही कार्यवाही बंद कर दी गई है। इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो साझा कर संयम और क्षमा की अपील की। उन्होंने कहा, 'गाली देने से कुछ हल नहीं होता। आइए भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाएं और साथ मिलकर काम करें। आइए भारत के लिए काम करें।'
पृष्ठभूमि: नीट विवाद और प्रदर्शन
हालिया छात्र आंदोलन की जड़ में नीट पेपर लीक विवाद था। केंद्र सरकार ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के बाद स्थिति काफी हद तक शांत हो गई थी। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि 'पाकिस्तानी तत्वों की निराशा यह है कि सरकार समाधान निकालने में सफल रही और प्रदर्शन समाप्त हो गए — वे चाहते थे कि यह आंदोलन और लंबा खिंचे।'
व्यापक साज़िश का हिस्सा
अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान पाकिस्तान की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं में नागरिकों का भरोसा कमज़ोर करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फर्ज़ी वीडियो का प्रसार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान की अपनी आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की रणनीति भी हो सकती है। आने वाले दिनों में एजेंसियाँ इन हैंडल की पहचान और उन्हें ब्लॉक करने की प्रक्रिया तेज़ करने की तैयारी में हैं।