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दिल्ली पुलिस का खुलासा: जंतर-मंतर विरोध में इस्तीफा देने वाले 'सब-इंस्पेक्टर' का वायरल वीडियो फर्जी

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दिल्ली पुलिस का खुलासा: जंतर-मंतर विरोध में इस्तीफा देने वाले 'सब-इंस्पेक्टर' का वायरल वीडियो फर्जी

सारांश

जंतर-मंतर छात्र विरोध के बीच एक वायरल वीडियो में 'सब-इंस्पेक्टर के इस्तीफे' का दावा दिल्ली पुलिस ने सिरे से खारिज किया। पुलिस रिकॉर्ड में ऐसा कोई कर्मचारी नहीं मिला। साथ ही, 400 से अधिक पाकिस्तानी अकाउंट्स पर भारत में भ्रामक सामग्री फैलाने का आरोप।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने वायरल वीडियो को फर्जी और गुमराह करने वाला घोषित किया, जिसमें व्यक्ति ने खुद को सब-इंस्पेक्टर बताकर इस्तीफे का दावा किया था।
पुलिस रिकॉर्ड की जाँच में वीडियो के विवरण से मेल खाने वाला कोई सब-इंस्पेक्टर नहीं मिला ।
फर्जी कंटेंट बनाने, फैलाने या बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
खुफिया टीमों ने 400 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की, जो भ्रामक सामग्री फैला रहे हैं।
इनमें से कई अकाउंट्स ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सक्रिय थे।

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा एक वीडियो पूरी तरह फर्जी है, जिसमें एक व्यक्ति खुद को दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बताते हुए दावा कर रहा था कि उसने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शन के समर्थन में नौकरी से इस्तीफा दे दिया। पुलिस के अनुसार, रिकॉर्ड की जाँच में ऐसा कोई कर्मचारी नहीं मिला जो वीडियो में बताए गए विवरण से मेल खाता हो।

क्या था वायरल दावा

वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने दावा किया था कि वह दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत था और उसने जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के साथ एकजुटता जताने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी। यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर साझा किया गया और इसने व्यापक ध्यान आकर्षित किया।

दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया

दिल्ली पुलिस ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी स्पष्टीकरण में कहा, 'सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति खुद को दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बता रहा है और दावा कर रहा है कि उसने हाल ही में चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। यह दावा झूठा है।'

पुलिस ने आगे कहा, 'पुलिस के रिकॉर्ड की जाँच करने पर ऐसा कोई सब-इंस्पेक्टर नहीं मिला जिसकी जानकारी वीडियो में बताए गए विवरण से मेल खाती हो। यह वीडियो झूठा और गुमराह करने वाला है और ऐसा लगता है कि यह जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने की कोशिश है।'

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

पुलिस ने स्पष्ट किया कि 'ऐसे फर्जी कंटेंट बनाने, फैलाने या बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।' जनता से अपील की गई कि वे केवल दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और बिना पुष्टि वाले दावों को साझा करने से बचें।

पाकिस्तान समर्थित दुष्प्रचार अभियान का आरोप

इसी संदर्भ में, दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगाया कि वह भारत की मौजूदा स्थिति का फायदा उठाने के लिए सोशल मीडिया पर सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चला रहा है। एक पुलिस अधिकारी ने इंस्टाग्राम पर जारी वीडियो संदेश में बताया कि खुफिया टीमों ने 400 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की है जो सक्रिय रूप से भ्रामक सामग्री फैला रहे हैं।

अधिकारी ने बताया कि इनमें से कई अकाउंट्स ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सक्रिय थे, जो बार-बार के दखलंदाजी के पैटर्न को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान भारत में मौजूदा हालात का फायदा उठा रहा है। जानबूझकर अशांति फैलाने के लिए गलत जानकारी फैलाई जा रही है। ये सोशल मीडिया अकाउंट्स छेड़छाड़ किए गए वीडियो, बिना पुष्टि किए गए दावों और भड़काऊ कंटेंट पोस्ट करके संवेदनशील मुद्दों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।'

आगे की कार्रवाई

अधिकारियों ने इन संदिग्ध अकाउंट्स को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से पहले उसे आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करें, विशेषकर ऐसे संवेदनशील समय में।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि छिटपुट घटना। हालाँकि, मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह सवाल चूक जाती है कि इस तरह के फर्जी कंटेंट को वायरल होने से रोकने में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही कहाँ है। पुलिस की चेतावनी ज़रूरी है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को भी जवाब देना होगा।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने किस वीडियो को फर्जी बताया है?
दिल्ली पुलिस ने उस वायरल वीडियो को फर्जी बताया है जिसमें एक व्यक्ति खुद को दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बताते हुए दावा कर रहा था कि उसने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शन के समर्थन में नौकरी छोड़ दी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति दिल्ली पुलिस का कर्मचारी नहीं है।
दिल्ली पुलिस ने इस दावे को कैसे खारिज किया?
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक रिकॉर्ड की जाँच की और पाया कि वीडियो में बताए गए विवरण से मेल खाने वाला कोई सब-इंस्पेक्टर उनके रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। इसके बाद पुलिस ने आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया।
फर्जी वीडियो फैलाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
दिल्ली पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसे फर्जी कंटेंट बनाने, फैलाने या बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों से अपुष्ट जानकारी साझा न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की गई है।
पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, खुफिया टीमों ने 400 से अधिक पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की है जो भारत में भ्रामक और भड़काऊ सामग्री फैला रहे हैं। इनमें से कई अकाउंट्स ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सक्रिय थे और इन्हें ब्लॉक किया जा रहा है।
इस तरह की फर्जी खबरों से खुद को कैसे बचाएँ?
दिल्ली पुलिस ने जनता को सलाह दी है कि किसी भी वीडियो या खबर को साझा करने से पहले उसे आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करें। केवल दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित सोशल मीडिया हैंडल से मिली जानकारी पर भरोसा करें।
राष्ट्र प्रेस
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