जंतर-मंतर सीजेपी प्रदर्शन: महिला की मौत की खबर फर्जी, दिल्ली पुलिस ने एक्स पर जारी किया फैक्ट चेक
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर जारी सीजेपी (CJP) प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर एक महिला प्रदर्शनकारी की मौत की खबर तेज़ी से फैलने लगी, जिसे दिल्ली पुलिस ने 23 जुलाई 2026 को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर फैक्ट चेक जारी कर पूरी तरह गलत और भ्रामक करार दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि संबंधित महिला जीवित हैं और डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में उनका उपचार जारी है।
पुलिस का फैक्ट चेक: क्या है सच्चाई
दिल्ली पुलिस ने अपने एक्स पोस्ट में साफ़ कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान किसी महिला प्रदर्शनकारी की मौत नहीं हुई है। आरएमएल अस्पताल के चिकित्सकों ने पुष्टि की है कि महिला की स्थिति स्थिर है और वह खतरे से बाहर हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी खबर को सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी जाँच अवश्य करें।
महिला की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार
आरएमएल अस्पताल के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान गंभीर रूप से घायल हुई महिला की हालत में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है। उन्हें 24 घंटे पहले वेंटिलेटर से हटा दिया गया है और अब वह स्वयं सांस ले रही हैं। महिला होश में हैं और चिकित्सकों के निर्देशों का पालन कर रही हैं। डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।
प्रदर्शन में हिंसा: घायलों का आँकड़ा
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर के पास सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में 118 से अधिक पुलिसकर्मी और 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पथराव और हिंसा में 20 से अधिक पुलिस वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए। घायल पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी कार्रवाई
पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने हिंसा से जुड़े मामलों में अलग-अलग थानों में कई एफआईआर दर्ज की हैं और जाँच जारी है। पुलिस ने ज़िम्मेदार डिजिटल व्यवहार पर ज़ोर देते हुए कहा कि बिना जाँचे-परखे किसी भी जानकारी को आगे न फैलाया जाए।
प्रदर्शन जारी, केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की माँग
इस बीच, सीजेपी का प्रदर्शन अब भी जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग पर अडिग हैं। यह ऐसे समय में आया है जब फर्जी खबरों के प्रसार को लेकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से सतर्क हैं। गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने के मामलों में पुलिस कार्रवाई के कई उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं।