27 अक्टूबर 2026
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PM मोदी का इमर्जिंग टेक कॉन्क्लेव में ऐलान: भारत अब दुनिया के लिए तकनीकी समाधान तैयार करेगा

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PM मोदी का इमर्जिंग टेक कॉन्क्लेव में ऐलान: भारत अब दुनिया के लिए तकनीकी समाधान तैयार करेगा

सारांश

मोदी का संदेश साफ था — भारत अब तकनीक का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनेगा। चंद्रयान की सफलता, स्वदेशी वैक्सीन और 500 मेगावाट फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की क्रिटिकलिटी — इन उपलब्धियों को नींव बताते हुए उन्होंने AI से परमाणु ऊर्जा तक हर मोर्चे पर वैश्विक नेतृत्व का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव को संबोधित किया।
भारत का लक्ष्य अब तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि दुनिया के लिए तकनीकी समाधान विकसित करना है।
देश के 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने हाल ही में पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की — ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम।
मोदी ने मंगल मिशन , चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने और कोरोना वैक्सीन विकास को भारत के आत्मविश्वास के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया।
AI, सेमीकंडक्टर, 5G डिजिटल स्टैक और परमाणु ऊर्जा — सभी क्षेत्रों में एक साथ तकनीकी क्षमता मज़बूत करने पर ज़ोर।
भारत में विकसित समाधान वैश्विक समस्याओं का रास्ता खोल सकते हैं — मोदी ने कुशल मानव संसाधन को देश की सबसे बड़ी ताक़त बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत अब विज्ञान और प्रौद्योगिकी में दूसरे देशों की उपलब्धियों की नकल करने वाला देश नहीं रहा — बल्कि देश का लक्ष्य भविष्य की तकनीकों का विकास करना, उनमें नवाचार को बढ़ावा देना और वैश्विक समस्याओं के समाधान तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं में जिस कौशल और आत्मविश्वास का उदय हो रहा है, वह देश के लिए अत्यंत उत्साहजनक है।

नई सोच: अनुसरण से नेतृत्व की ओर

मोदी ने कहा कि दशकों पहले भारत के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अर्थ था — दुनिया के विकसित देशों की बराबरी करने की कोशिश। उस दौर में विदेश में विकसित तकनीक कुछ वर्षों की देरी से भारत पहुँचती थी और देश उसे अपनाने या उसमें मामूली सुधार करने में जुटा रहता था। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत अब उस मानसिकता से बाहर निकल चुका है।

उन्होंने रेखांकित किया कि आज भारत का लक्ष्य न केवल देश, बल्कि पूरी दुनिया के लिए नई तकनीकें विकसित करना और वैश्विक चुनौतियों का समाधान देना है। उनके अनुसार, भारत को भविष्य की तकनीकों को अपनाने, साहस के साथ नवाचार करने और उनके निर्माण में विश्व का नेतृत्व करने की आवश्यकता है।

अंतरिक्ष और कोरोना: आत्मविश्वास के दो उदाहरण

प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुँचने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इससे भी आगे, भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुँचा — यह कारनामा इससे पहले दुनिया का कोई देश नहीं कर पाया था। मोदी ने इसे भारत के वैज्ञानिक सामर्थ्य और बढ़ते आत्मबल का प्रमाण बताया।

कोरोना महामारी के दौरान की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब दुनिया के अनेक देश वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर संघर्ष कर रहे थे, तब भारत ने अपनी स्वदेशी वैक्सीन विकसित की, बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया और दूसरे देशों को भी वैक्सीन मुहैया कराई। उन्होंने इसे 21वीं सदी के भारत के आत्मविश्वास का ठोस उदाहरण बताया।

परमाणु ऊर्जा और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर: ऊर्जा आत्मनिर्भरता की राह

मोदी ने विकसित भारत के निर्माण के लिए परमाणु ऊर्जा को अनिवार्य बताते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने हेतु देश अपनी स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं का विकास कर रहा है। उन्होंने बताया कि देश के 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने कुछ महीने पहले पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की — जो भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है।

गौरतलब है कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का अभिन्न हिस्सा है, जिसे थोरियम के विशाल भंडारों का दोहन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उपलब्धि दशकों की वैज्ञानिक मेहनत का परिणाम है।

AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल स्टैक: बहुआयामी तकनीकी छलांग

प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर — इन सभी क्षेत्रों में भारत अपनी तकनीकी क्षमता और आत्मविश्वास को एक साथ मज़बूत कर रहा है। उन्होंने भारत के डिजिटल स्टैक और 5G तकनीक को इसका उदाहरण बताया और कहा कि देश की तकनीकी प्रगति केवल घरेलू ज़रूरतों तक सीमित नहीं — इसमें वैश्विक स्तर पर उपयोगी समाधान देने की क्षमता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता की जड़ें ज्ञान और खोज की परंपरा में रही हैं — शून्य की खोज, संख्या प्रणाली के विकास और खगोल विज्ञान की प्रगति से लेकर आज की आधुनिक तकनीकों तक यह सिलसिला अटूट है।

आगे की राह: वैश्विक समाधानकर्ता की भूमिका

मोदी ने कहा कि यदि भारत में विकसित कोई समाधान सफल होता है, तो उससे दुनिया के अनेक देशों की समस्याओं का रास्ता भी खुलता है। उन्होंने कुशल मानव संसाधन तैयार करने की भारत की क्षमता को देश की सबसे बड़ी ताक़त करार दिया और वैज्ञानिक समुदाय तथा युवाओं से भविष्य की तकनीकों में नेतृत्व करने का आह्वान किया। यह कॉन्क्लेव ऐसे समय पर हुआ जब भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में तेज़ी से अपनी जगह बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आलोचकों का कहना है कि भाषण और ज़मीनी हक़ीक़त के बीच की खाई को पाटने के लिए ठोस रोडमैप चाहिए — न सिर्फ उपलब्धियों की सूची। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की क्रिटिकलिटी निःसंदेह महत्त्वपूर्ण है, लेकिन यह तकनीक दशकों से विकासाधीन है और व्यावसायिक पैमाने तक पहुँचने में अभी लंबा रास्ता तय करना है। AI और सेमीकंडक्टर में भारत की महत्त्वाकांक्षाएँ तब विश्वसनीय बनेंगी जब R&D पर सार्वजनिक खर्च GDP के 2% के वैश्विक मानक के करीब पहुँचे — जो अभी मात्र 0.65% के आसपास है। असली परीक्षा यह है कि इस 'समाधान निर्माता' की भूमिका के लिए कितना निवेश, कितना संस्थागत सुधार और कितनी निजी-सार्वजनिक साझेदारी सुनिश्चित की जाती है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने इमर्जिंग टेक कॉन्क्लेव में क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत अब केवल दूसरे देशों की तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है — देश का लक्ष्य भविष्य की तकनीकें विकसित करना और वैश्विक समस्याओं के समाधान तैयार करना है। उन्होंने AI, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित किया।
भारत के 500 मेगावाट फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की क्रिटिकलिटी का क्या महत्त्व है?
500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल करना भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक निर्णायक पड़ाव है, जिसका लक्ष्य देश के विशाल थोरियम भंडारों का उपयोग कर दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना है। यह तकनीक भारत में स्वदेशी रूप से विकसित की गई है।
भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में कौन-सी उपलब्धियाँ हासिल की हैं जिनका मोदी ने ज़िक्र किया?
मोदी ने दो प्रमुख अंतरिक्ष उपलब्धियों का उल्लेख किया — पहले प्रयास में ही मंगल ग्रह तक पहुँचना (मंगलयान) और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सफलतापूर्वक उतरना (चंद्रयान-3), जो दुनिया के इतिहास में पहली बार किसी देश ने किया।
कोरोना महामारी के दौरान भारत की वैज्ञानिक उपलब्धि क्या थी?
जब कई देश वैक्सीन की उपलब्धता से जूझ रहे थे, तब भारत ने अपनी स्वदेशी वैक्सीन विकसित की, देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया और अन्य देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। मोदी ने इसे 21वीं सदी के भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।
भारत का डिजिटल स्टैक वैश्विक समाधान के रूप में कैसे काम कर सकता है?
मोदी के अनुसार, भारत का डिजिटल स्टैक और 5G तकनीक केवल घरेलू ज़रूरतों तक सीमित नहीं है — यदि भारत में विकसित कोई समाधान सफल होता है, तो वह दुनिया के कई देशों की समस्याओं को हल करने का रास्ता भी खोल सकता है। उन्होंने इसे भारत की वैश्विक तकनीकी भूमिका का आधार बताया।
राष्ट्र प्रेस
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