छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: 15 नवंबर से धान खरीदी, कैशलेस इलाज और नए विकास मिशनों को मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर 2026 को रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हुई मंत्रिपरिषद बैठक में किसान, कर्मचारी, अधोसंरचना, पर्यटन, उद्योग और खेल विकास से जुड़े एक दर्जन से अधिक अहम प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी आरंभ करने, बिजली बिल रियायत योजना की अवधि बढ़ाने और कई नए विकास मिशन स्थापित करने का निर्णय लिया।
धान खरीदी: ₹3,100 प्रति क्विंटल, 27.50 लाख किसानों को राहत
राज्य के 27.50 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों से ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी की जाएगी। एग्रीस्टैक आईडी से जुड़े पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को इस बार दोबारा पंजीयन की अनिवार्यता से छूट दी गई है, जिससे उनकी प्रशासनिक परेशानी कम होगी।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमैट्रिक व्यवस्था अनिवार्य की जाएगी। इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र खोले जाएँगे, जिससे कुल केंद्रों की संख्या 3,100 हो जाएगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य में धान उत्पादक किसान लंबे समय से खरीदी केंद्रों की दूरी और देरी की समस्या उठाते रहे हैं।
बिजली बिल रियायत: 7.25 लाख परिवारों को 31 मार्च 2027 तक राहत
मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (एम-ऊर्जा) योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में मिलने वाली रियायत जारी रखने का फैसला किया। 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं के लिए योजना की पात्रता अवधि 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है।
इस निर्णय से लगभग 7.25 लाख परिवारों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। गौरतलब है कि महँगाई के दबाव के बीच बिजली खर्च मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर बड़ा बोझ बनता जा रहा है।
कैशलेस चिकित्सा और सड़क निर्माण राहत
राज्य के शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने को मंजूरी दी गई। अब सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज के लिए कर्मचारियों को पहले भुगतान नहीं करना होगा और पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी — यह उन कर्मचारियों के लिए खासतौर पर राहतकारी है जिन्हें अब तक बड़ी रकम अग्रिम चुकानी पड़ती थी।
सड़क निर्माण परियोजनाओं को गति देने के लिए बिटुमिन (डामर) की कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर ठेकेदारों को मूल्य राहत देने का निर्णय लिया गया। ग्रामीण सड़क विकास और राज्य वित्त पोषित परियोजनाओं में डामर उपयोग पर यह राहत मिलेगी।
अधोसंरचना, पर्यटन और खेल मिशन: ₹1,100 करोड़ का प्रावधान
मंत्रिमंडल ने 'मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026' और 'मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन' को मंजूरी दी। दोनों मिशनों के लिए अगले पाँच वर्षों में लगभग ₹500-500 करोड़ खर्च किए जाएँगे। पर्यटन मिशन के ज़रिये युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोज़गार सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन' को भी स्वीकृति मिली। वर्ष 2026-27 में इसके लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मिशन के तहत राज्यभर में प्रतिभा खोज अभियान चलाया जाएगा और चयनित खिलाड़ियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण एवं आधुनिक खेल सुविधाएँ दी जाएँगी।
औद्योगिक और रेल विकास: ₹8,000 करोड़ की रेल परियोजना को भी हरी झंडी
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन कर ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही लगभग ₹8,000 करोड़ की लागत वाली 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी निवेश करने का निर्णय भी लिया गया।
इसके अलावा राजनांदगांव जिले में केंद्रीय भंडारण निगम के लिए भूमि आवंटन, सोमनी में ₹400 करोड़ की मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी की स्थापना और विभिन्न विभागों में नए पद सृजित करने के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई। रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर 'कुंवरगढ़' करने का प्रस्ताव भी पारित हुआ।
कृषक उन्नति योजना में संशोधन के तहत आदान सहायता राशि अब प्रति क्विंटल के बजाय प्रति एकड़ के आधार पर दी जाएगी, जिससे फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की उम्मीद है। आगामी सप्ताहों में इन फैसलों के क्रियान्वयन की दिशा तय होगी, जो राज्य सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं की असली परीक्षा होगी।