उकाई बांध से महाराष्ट्र को 5 टीएमसी पानी: केंद्र ने जारी किए निर्देश, सीएम फडणवीस की मांग पर बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जोरदार आग्रह के बाद नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के मूल फैसले के अनुरूप, राज्य को उकाई बांध से 5 टीएमसी (हजार मिलियन घन फुट) पानी तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 27 अक्टूबर 2026 को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की उच्च स्तरीय समीक्षा समिति की बैठक के बाद यह निर्देश जारी किए, जिससे महाराष्ट्र के दीर्घकालिक जल अधिकार विवाद में एक अहम पड़ाव तय हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के मूल निर्णय के तहत महाराष्ट्र को कुल 10 टीएमसी पानी का हिस्सा स्वीकृत किया गया था। इसमें से 5 टीएमसी नर्मदा-तापी डायवर्जन नहर योजना के माध्यम से और शेष 5 टीएमसी सीधे उकाई बांध से लिया जाना था। अब तक उकाई बांध के हिस्से की राशि अटकी हुई थी, जिसे लेकर राज्य सरकार केंद्र के समक्ष लगातार पैरवी कर रही थी।
सीएम फडणवीस की पैरवी और केंद्र का निर्णय
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र का पक्ष मजबूती से रखा और नर्मदा परियोजना के प्रति राज्य की जिम्मेदारियों की अद्यतन जानकारी भी प्रस्तुत की। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने उकाई बांध से राज्य के निर्धारित जल हिस्से का अधिकार दोहराया।
फडणवीस ने बैठक में स्पष्ट किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई पिछली बैठक में पानी छोड़ने का निर्णय पहले ही तय हो चुका था। उन्होंने कहा, 'केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई पिछली बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, महाराष्ट्र को उकाई बांध से अपने निर्धारित जल हिस्से का हकदार है। हमने केंद्रीय मंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री से इसके लिए औपचारिक स्वीकृति देने का अनुरोध किया था।'
मुख्यमंत्री की प्रस्तुति के बाद, केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने महाराष्ट्र के जल अधिकार की पुष्टि की और राज्य के हिस्से का पानी तत्काल जारी करने के लिए आवश्यक निर्देश दे दिए।
नर्मदा जल विवाद की पृष्ठभूमि
नर्मदा नदी के जल बंटवारे को लेकर महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच दशकों पुराना विवाद रहा है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने इस बंटवारे का फैसला सुनाया था, जिसके अनुसार प्रत्येक राज्य को निर्धारित मात्रा में जल मिलना तय था। गौरतलब है कि उकाई बांध गुजरात के सूरत जिले में स्थित है और तापी नदी पर बना है; यहाँ से महाराष्ट्र को पानी मिलने की प्रक्रिया तकनीकी और राजनयिक दोनों स्तरों पर जटिल रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई हिस्से, विशेष रूप से विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र, पानी की कमी से जूझते रहे हैं। अंतरराज्यीय जल विवादों में न्यायाधिकरण के आदेशों का क्रियान्वयन अक्सर धीमा रहा है, जिससे यह फैसला राज्य के लिए प्रशासनिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
आम जनता पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, 5 टीएमसी पानी की यह आपूर्ति महाराष्ट्र के उन क्षेत्रों के लिए राहतकारी होगी जो उकाई जलाशय से जुड़ी नहर योजनाओं पर निर्भर हैं। हालांकि पानी के वास्तविक वितरण और उपयोग की विस्तृत रूपरेखा अभी जारी नहीं की गई है, सरकारी विज्ञप्ति में तत्काल जल प्रवाह सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
क्या होगा आगे
केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल के निर्देश के बाद अब नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण और संबंधित राज्यों के अधिकारियों को जल प्रवाह की तकनीकी प्रक्रिया तय करनी होगी। शेष 5 टीएमसी पानी, जो नर्मदा-तापी डायवर्जन नहर योजना के माध्यम से मिलना है, उसकी प्रगति पर भी अब नजर रहेगी। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि वह पूरे 10 टीएमसी हिस्से की प्राप्ति सुनिश्चित करने तक पैरवी जारी रखेगी।