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तुंगभद्रा जल विवाद: तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने केंद्र से हस्तक्षेप की माँग, 15.9 TMC हिस्से पर बल

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तुंगभद्रा जल विवाद: तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने केंद्र से हस्तक्षेप की माँग, 15.9 TMC हिस्से पर बल

सारांश

तेलंगाना को तुंगभद्रा से मिलने वाले 15.9 टीएमसी जल-हिस्से में से वास्तविक प्रवाह मात्र 5-6 टीएमसी है — और 2004 की गाद-निष्कासन सिफारिशें आज भी धूल खा रही हैं। CM रेवंत रेड्डी की केंद्र से अपील और गुरुवार की त्रि-राज्यीय बैठक तय करेगी कि 75 गाँवों के किसानों को राहत मिलेगी या नहीं।

मुख्य बातें

तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने केंद्र से तुंगभद्रा परियोजना में हस्तक्षेप की माँग की, ताकि राज्य का 15.9 टीएमसी जल-हिस्सा सुनिश्चित हो सके।
वर्तमान में पानी का वास्तविक प्रवाह केवल 5-6 टीएमसी है, जिससे जोगुलम्बा गडवाल जिले के 75 गाँवों की 83,987 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित है।
तेलंगाना सरकार आरडीएस आधुनिकीकरण के लिए ₹59 करोड़ जमा कर चुकी है, लेकिन पैकेज 1 और 2 का काम अभी शुरू नहीं हुआ।
2004 की विशेषज्ञ समिति की गाद-निष्कासन सिफारिशें आज तक लागू नहीं हुईं; गाद-प्रभावित क्षेत्र कर्नाटक में है।
गुरुवार को होसापेटे में तीनों राज्यों के CM और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की बैठक में अटके कार्यों का मुद्दा उठाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सीडब्ल्यूसी की निगरानी में तुंगभद्रा बोर्ड को सशक्त करने की माँग की।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह तुंगभद्रा परियोजना से राज्य के 15.9 टीएमसी जल-हिस्से का वास्तविक उपयोग सुनिश्चित करे और तीन संबंधित राज्यों — तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक — के बीच समन्वय स्थापित करे। 24 जून को हैदराबाद में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने चिंता जताई कि फिलहाल पानी का वास्तविक प्रवाह मात्र पाँच से छह टीएमसी तक सीमित है।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार शाम मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तुंगभद्रा प्रोजेक्ट, राजोली बांदा डायवर्जन स्कीम (आरडीएस) और अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों पर केंद्रित एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, सांसद मल्लू रवि, सरकारी सलाहकार जितेंद्र रेड्डी, सिंचाई सलाहकार आदित्य नाथ दास, सीएमओ सचिव माणिक राज, सिंचाई सचिव श्रीधर, स्पेशल चीफ सेक्रेटरी (ऊर्जा) नवीन मित्तल और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आरडीएस और किसानों पर असर

आरडीएस के अंतर्गत जोगुलम्बा गडवाल जिले के लगभग 75 गाँवों की 83,987 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पर्याप्त जल आपूर्ति आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि आरडीएस एनीकट असुरक्षित हो चुका है और सुरक्षा संबंधी आवश्यक कार्यों की तत्काल पहचान की जानी चाहिए।

तेलंगाना सरकार आरडीएस नहर के आधुनिकीकरण के लिए पहले ही ₹59 करोड़ जमा कर चुकी है, किंतु कार्य अधूरे हैं। अधिकारियों ने बताया कि पैकेज 3 और 4 के तहत काम पूरा हो चुका है, जबकि पैकेज 1 और 2 के तहत कार्य अभी आरंभ भी नहीं हुआ।

गाद की समस्या और 2004 की सिफारिशें

इंजीनियरों ने बताया कि तेलंगाना की ओर अत्यधिक गाद जमा होने के कारण आरडीएस पर जल-डायवर्जन अपेक्षित स्तर तक नहीं हो पा रहा। एक विशेषज्ञ समिति ने 2004 में ही गाद हटाने की सिफारिश की थी, परंतु वे सिफारिशें आज तक लागू नहीं हुईं। चूँकि गाद-प्रभावित क्षेत्र कर्नाटक में स्थित है, इसलिए उस राज्य का सहयोग प्राप्त करने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि केंद्र को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा जाए, जिसमें गाद निष्कासन के साथ-साथ 2004 की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करने की माँग हो।

तुंगभद्रा बोर्ड को मजबूत करने की माँग

तीन राज्यों के बीच समन्वय की जटिलता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने माँग की कि केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की देखरेख में तुंगभद्रा बोर्ड को सशक्त किया जाए, ताकि तीनों राज्यों के बीच जल-हिस्सेदारी का उचित क्रियान्वयन हो सके। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद दक्षिण भारत में एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में हैं।

आगे की राह

यह तय हुआ कि गुरुवार को तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के बीच होने वाली बैठक में पैकेज 1 और 2 के अटके कार्यों का मुद्दा प्राथमिकता से उठाया जाएगा। यह बैठक कर्नाटक के होसापेटे में तुंगभद्रा बाँध के नवस्थापित क्रेस्ट गेट्स के उद्घाटन के अवसर पर होगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तुंगभद्रा लिफ्ट सिंचाई योजना के तहत अधिकतम जल-उपयोग के वैकल्पिक विकल्पों पर भी विचार करने का निर्देश दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ₹59 करोड़ जमा होने के बावजूद आधुनिकीकरण के दो पैकेज ज़मीन पर नहीं उतरे। असली सवाल यह है कि गुरुवार की त्रि-राज्यीय बैठक एक और औपचारिकता बनेगी या कर्नाटक और आंध्र प्रदेश को गाद-निष्कासन पर बाध्य करने वाला कोई ठोस तंत्र सामने आएगा। दक्षिण भारत में जल-राजनीति की यह पुरानी प्रवृत्ति है — बाँध के उद्घाटन पर मुस्कुराहटें, और नहर के अंतिम छोर पर सूखे खेत।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना का तुंगभद्रा परियोजना में जल-हिस्सा कितना है और समस्या क्या है?
तेलंगाना को तुंगभद्रा बाँध और नदी-प्रवाह से 15.9 टीएमसी पानी मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान में वास्तविक प्रवाह केवल 5-6 टीएमसी तक सीमित है। इसका प्रमुख कारण आरडीएस क्षेत्र में अत्यधिक गाद जमा होना है, जिससे जल-डायवर्जन बाधित हो रहा है।
आरडीएस (राजोली बांदा डायवर्जन स्कीम) क्या है और यह किसे प्रभावित करती है?
आरडीएस एक जल-डायवर्जन योजना है जो जोगुलम्बा गडवाल जिले के लगभग 75 गाँवों की 83,987 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए तुंगभद्रा नदी के पानी का उपयोग करती है। पर्याप्त जल न मिलने से इन गाँवों के किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं।
गाद की समस्या कब से है और इसे क्यों नहीं सुलझाया गया?
एक विशेषज्ञ समिति ने 2004 में ही गाद हटाने की सिफारिश की थी, लेकिन दो दशक बाद भी ये सिफारिशें लागू नहीं हुईं। चूँकि गाद-प्रभावित क्षेत्र कर्नाटक में है, इसलिए इस काम के लिए उस राज्य के सहयोग और केंद्रीय समन्वय की आवश्यकता है।
गुरुवार की त्रि-राज्यीय बैठक में क्या होगा?
गुरुवार को कर्नाटक के होसापेटे में तुंगभद्रा बाँध के नए क्रेस्ट गेट्स के उद्घाटन के अवसर पर तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री मिलेंगे। इस बैठक में आरडीएस के पैकेज 1 और 2 के अटके कार्यों और गाद-निष्कासन का मुद्दा प्राथमिकता से उठाया जाएगा।
तुंगभद्रा बोर्ड को मजबूत करने की माँग क्यों की जा रही है?
तुंगभद्रा परियोजना में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक — तीन राज्य शामिल हैं, जिससे जल-वितरण में समन्वय जटिल हो जाता है। CM रेवंत रेड्डी ने माँग की है कि केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की देखरेख में तुंगभद्रा बोर्ड को अधिक अधिकार और संसाधन दिए जाएँ, ताकि तीनों राज्यों के बीच उचित जल-बँटवारा सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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