आरडीएस में तेलंगाना के पानी के हिस्से पर कोई समझौता नहीं — सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने 22 जून 2026 को स्पष्ट किया कि राजोलीबांडा डायवर्जन स्कीम (आरडीएस) में तेलंगाना के लिए निर्धारित पानी के हिस्से पर किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हैदराबाद स्थित बी.आर. अंबेडकर तेलंगाना राज्य सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आरडीएस क्षेत्र के किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएँ।
बैठक का संदर्भ और मुख्य घटनाक्रम
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब आंध्र प्रदेश पर कृष्णा नदी के पानी को कथित तौर पर बिना अनुमति के मोड़ने के आरोप लगे हैं। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (केआरएमबी) के इंजीनियरों की एक टीम ने कर्नाटक में आरडीएस का स्थलीय निरीक्षण किया और तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक के अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक की।
मंत्री के निर्देश और सरकार का रुख
मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तुंगभद्रा के पानी के उपयोग पर तेलंगाना के अधिकारों को ट्रिब्यूनल, बोर्ड और अंतर-राज्यीय बैठकों में मजबूती से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को समेटते हुए एक विस्तृत कार्ययोजना और रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए।
मंत्री ने अधिकारियों से सतर्क रहने पर जोर दिया ताकि ऊपरी राज्यों की गतिविधियों के कारण कृष्णा नदी बेसिन के किसानों को सिंचाई में कोई व्यवधान न आए। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी निर्णय का कड़ा विरोध किया जाएगा।
किसानों पर असर
आरडीएस क्षेत्र तेलंगाना के उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जो तुंगभद्रा और कृष्णा नदियों के पानी पर निर्भर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की बुआई की तैयारियाँ चल रही हैं और पानी की उपलब्धता सीधे फसल उत्पादन को प्रभावित करती है। आलोचकों का कहना है कि अंतर-राज्यीय जल विवाद में देरी से किसानों की सिंचाई सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
समीक्षा बैठक में विधायक संजीव रेड्डी, प्रधान सचिव (सिंचाई) ई. श्रीधर, संयुक्त सचिव के. श्रीनिवास, एन.सी. रमेश बाबू और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आगे क्या होगा
तेलंगाना सरकार ने संकेत दिया है कि वह ट्रिब्यूनल और केआरएमबी के मंचों पर अपने दावों को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगी। तैयार की जा रही विस्तृत रिपोर्ट अंतर-राज्यीय वार्ताओं में तेलंगाना की स्थिति को मजबूत करने में सहायक होगी।