कृष्णा नदी जल विवाद: कर्नाटक ने तेलंगाना के जुराला प्रोजेक्ट के लिए 3 टीएमसी पानी छोड़ने की सहमति दी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को तेलंगाना के जुराला प्रोजेक्ट के लिए कृष्णा नदी से 3 टीएमसी पानी चरणों में छोड़ने पर सहमति दे दी। यह निर्णय पुराने महबूबनगर जिले में 5.5 लाख एकड़ में खड़ी फसलों को सूखे से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। तेलंगाना सरकार के अनुरोध पर बेंगलुरु में हुई बैठक के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नारायणपुर बांध से पानी छोड़ने की स्वीकृति दी।
मुख्य घटनाक्रम
पुराने महबूबनगर जिले के मंत्रियों जुपल्ली कृष्णा राव और वकाती श्रीहरि के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु में मुख्यमंत्री शिवकुमार से मुलाकात की। तेलंगाना के मंत्रियों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जुराला प्रोजेक्ट के तहत किसानों की सिंचाई समस्याओं का विस्तृत विवरण रखा। तेलंगाना के प्रतिनिधिमंडल ने 30 दिनों तक लगातार 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का अनुरोध किया था, ताकि जुराला, भीमा, नेत्तेमपाडु और कोइलसागर प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत फसलों को पानी मिल सके।
मंगलवार को हुई बैठक में शिवकुमार ने आश्वासन दिया, जिसके बाद बुधवार सुबह मंत्री वकाती श्रीहरि ने सिंचाई अधिकारियों को निर्देश दिया कि जुराला प्रोजेक्ट से नहरों में पानी छोड़ा जाए। अधिकारियों ने तत्काल गेट खोले और पानी नहरों में प्रवाहित किया।
किसानों का संकट और विरोध प्रदर्शन
पुराने महबूबनगर जिले के किसान पिछले कई दिनों से अपनी खड़ी फसलों को बचाने के लिए पानी की माँग करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। विपक्षी दलों भारत राष्ट्र समिति (BRS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में जोगुलम्बा गडवाल जिले में परियोजना स्थल के निकट विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए थे।
सिंचाई अधिकारियों ने पहले पानी न छोड़ने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि ऊपरी क्षेत्रों से जल आवक कम होने के कारण जलाशय का स्तर काफी नीचे था। मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव ने कहा कि सरकार किसानों से अल नीनो के प्रभाव के चलते कम वर्षा की स्थिति में सूखा-प्रतिरोधी फसलें उगाने की अपील कर रही है।
दोनों राज्यों के नेताओं की प्रतिक्रिया
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह दो अलग-अलग राज्यों के बीच आपसी सद्भाव का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और भारत के लोगों के प्रेम तथा भाईचारे का प्रतीक है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब अंतरराज्यीय जल विवाद अक्सर राजनीतिक तनाव का कारण बनते हैं। इस मामले में दोनों राज्य सरकारों के बीच सहयोग को एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
आम जनता और किसानों पर असर
पुराने महबूबनगर जिले में कृषि पर निर्भर हजारों परिवारों के लिए यह राहत की खबर है। 5.5 लाख एकड़ में फैली खड़ी फसलें — जिनमें खरीफ की फसलें शामिल हैं — पानी की कमी के कारण सूखने के कगार पर थीं। जुराला, भीमा, नेत्तेमपाडु और कोइलसागर परियोजनाओं के लाभार्थी किसानों को अब सिंचाई का पानी मिलना शुरू हो जाएगा।
क्या होगा आगे
पानी चरणों में छोड़ा जाएगा, और इसकी मात्रा कुल 3 टीएमसी होगी। गौरतलब है कि तेलंगाना ने 30 दिनों तक 5,000 क्यूसेक पानी की माँग की थी, लेकिन सहमति 3 टीएमसी चरणबद्ध रिलीज़ पर बनी है। दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग मिलकर पानी के प्रवाह की निगरानी करेंगे। अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए भविष्य में ऐसी स्थितियाँ और भी उत्पन्न हो सकती हैं, जिसके लिए एक स्थायी अंतरराज्यीय जल-साझेदारी तंत्र की ज़रूरत महसूस की जा रही है।