12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने तुम्मदिहट्टी बांध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के फडणवीस को लिखा पत्र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने तुम्मदिहट्टी बांध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के फडणवीस को लिखा पत्र

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तुम्मदिहट्टी बांध की ऊंचाई 148 मीटर से अधिक करने के लिए महाराष्ट्र के CM फडणवीस को पत्र लिखा है। आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर और मेडक की जल ज़रूरतें इस अंतर-राज्यीय बातचीत की केंद्र में हैं।

मुख्य बातें

रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस को तुम्मदिहट्टी बांध की ऊंचाई पर पुनर्विचार के लिए पत्र लिखा।
23 अगस्त 2016 की अंतर-राज्यीय बोर्ड बैठक में महाराष्ट्र 148 मीटर FRL पर सहमत हुआ था, लेकिन तेलंगाना इसे अपर्याप्त मानता है।
सिंचाई विशेषज्ञों की सलाह के बाद तेलंगाना सरकार ने माना कि 148 मीटर FRL उत्तरी तेलंगाना की जल ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकता।
आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर और मेडक जिलों की सिंचाई व पेयजल आवश्यकताएँ इस प्रस्ताव के केंद्र में हैं।
CM रेवंत रेड्डी का तर्क है कि FRL बढ़ाने पर महाराष्ट्र में जलमग्नता का प्रभाव न्यूनतम रहेगा और गुरुत्वाकर्षण से जल आपूर्ति सुगम होगी।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गोदावरी नदी पर प्रस्तावित तुम्मदिहट्टी बांध की ऊंचाई और निर्माण को अंतिम रूप देने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने तेलंगाना सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक का कार्यक्रम तय करने का अनुरोध किया है, ताकि उत्तरी तेलंगाना की सिंचाई और पेयजल ज़रूरतों को लेकर नए सिरे से विचार-विमर्श हो सके।

परियोजना की पृष्ठभूमि

बीआर अंबेडकर प्राणहिता-चेवेल्ला सुजला स्रावंती परियोजना के अंतर्गत तेलंगाना सरकार ने तुम्मदिहट्टी में बांध निर्माण का प्रस्ताव रखा है। शुरुआत में इस बांध को 152 मीटर की ऊंचाई पर बनाने की योजना थी। हालांकि, 23 अगस्त 2016 को हुई अंतर-राज्यीय बोर्ड बैठक में महाराष्ट्र सरकार 148 मीटर की ऊंचाई पर बांध बनाने पर सहमत हुई थी और आवश्यक मंजूरियाँ दिलाने में सहयोग का आश्वासन भी दिया था। गौरतलब है कि पिछले वर्ष कांग्रेस सरकार ने पूर्व आदिलाबाद जिले में गोदावरी नदी पर स्थित इस परियोजना को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया था।

148 मीटर FRL क्यों अपर्याप्त माना गया

प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना को शीघ्र पूरा करने के निर्णय के बाद तेलंगाना की वर्तमान सरकार ने शीर्ष अधिकारियों और सिंचाई विशेषज्ञों के साथ कई समीक्षा बैठकें कीं। विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि 148 मीटर का पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) उत्तरी तेलंगाना की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त होगा।

मुख्यमंत्री की प्रमुख दलीलें

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर और मेडक जिलों की सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं को देखते हुए बांध की ऊंचाई पर पुनर्विचार ज़रूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि FRL को 148 मीटर से थोड़ा अधिक करने पर भी महाराष्ट्र में जलमग्नता का प्रभाव न्यूनतम रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि FRL बढ़ाने से गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से तेलंगाना में पानी लाना अधिक सुगम होगा, जिससे परियोजना की परिचालन लागत भी कम होगी।

आगे की राह

यह पत्र दोनों राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय जल साझाकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण और मध्य भारत के कई राज्य गोदावरी बेसिन के जल संसाधनों पर अपने दावे मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच बैठक का कार्यक्रम तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महाराष्ट्र नई ऊंचाई के प्रस्ताव पर कितना लचीलापन दिखाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दो राज्यों के बीच दशकों पुराने जल-राजनीति के समीकरण को फिर से परखने की कोशिश है। 2016 की सहमति के बावजूद 148 मीटर FRL पर अमल न होना यह दर्शाता है कि अंतर-राज्यीय जल समझौते कागज़ पर जितने सरल दिखते हैं, ज़मीन पर उतने ही जटिल साबित होते हैं। उत्तरी तेलंगाना के चार जिलों की पेयजल और सिंचाई ज़रूरतें वास्तविक हैं, लेकिन FRL में किसी भी बढ़ोतरी पर महाराष्ट्र की स्वीकृति बिना केंद्रीय जल आयोग और न्यायाधिकरण की मध्यस्थता के आसान नहीं होगी। असली परीक्षा यह है कि दोनों राज्य राजनीतिक इच्छाशक्ति को तकनीकी सहमति में कितनी जल्दी बदल पाते हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुम्मदिहट्टी बांध परियोजना क्या है?
तुम्मदिहट्टी बांध गोदावरी नदी पर प्रस्तावित एक जलाशय परियोजना है, जो बीआर अंबेडकर प्राणहिता-चेवेल्ला सुजला स्रावंती परियोजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य उत्तरी तेलंगाना के आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर और मेडक जिलों को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है।
तेलंगाना 148 मीटर FRL को अपर्याप्त क्यों मान रहा है?
सिंचाई विशेषज्ञों और शीर्ष अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकों के बाद तेलंगाना सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि 148 मीटर का पूर्ण जलाशय स्तर उत्तरी तेलंगाना की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। FRL बढ़ाने से गुरुत्वाकर्षण के ज़रिए पानी की आपूर्ति भी आसान होगी।
महाराष्ट्र ने पहले किस ऊंचाई पर सहमति दी थी?
23 अगस्त 2016 को हुई अंतर-राज्यीय बोर्ड बैठक में महाराष्ट्र सरकार तुम्मदिहट्टी बांध को 148 मीटर की ऊंचाई पर बनाने के लिए सहमत हुई थी और आवश्यक मंजूरियाँ दिलाने में सहयोग का आश्वासन भी दिया था।
क्या FRL बढ़ाने से महाराष्ट्र में जलमग्नता का खतरा है?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि FRL को 148 मीटर से थोड़ा अधिक करने पर भी महाराष्ट्र में जलमग्नता का प्रभाव न्यूनतम रहेगा। हालांकि, इस दावे की तकनीकी पुष्टि अभी दोनों राज्यों की बैठक में होनी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले