तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने तुम्मदिहट्टी बांध की ऊंचाई बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के फडणवीस को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गोदावरी नदी पर प्रस्तावित तुम्मदिहट्टी बांध की ऊंचाई और निर्माण को अंतिम रूप देने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने तेलंगाना सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक का कार्यक्रम तय करने का अनुरोध किया है, ताकि उत्तरी तेलंगाना की सिंचाई और पेयजल ज़रूरतों को लेकर नए सिरे से विचार-विमर्श हो सके।
परियोजना की पृष्ठभूमि
बीआर अंबेडकर प्राणहिता-चेवेल्ला सुजला स्रावंती परियोजना के अंतर्गत तेलंगाना सरकार ने तुम्मदिहट्टी में बांध निर्माण का प्रस्ताव रखा है। शुरुआत में इस बांध को 152 मीटर की ऊंचाई पर बनाने की योजना थी। हालांकि, 23 अगस्त 2016 को हुई अंतर-राज्यीय बोर्ड बैठक में महाराष्ट्र सरकार 148 मीटर की ऊंचाई पर बांध बनाने पर सहमत हुई थी और आवश्यक मंजूरियाँ दिलाने में सहयोग का आश्वासन भी दिया था। गौरतलब है कि पिछले वर्ष कांग्रेस सरकार ने पूर्व आदिलाबाद जिले में गोदावरी नदी पर स्थित इस परियोजना को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया था।
148 मीटर FRL क्यों अपर्याप्त माना गया
प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना को शीघ्र पूरा करने के निर्णय के बाद तेलंगाना की वर्तमान सरकार ने शीर्ष अधिकारियों और सिंचाई विशेषज्ञों के साथ कई समीक्षा बैठकें कीं। विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि 148 मीटर का पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) उत्तरी तेलंगाना की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त होगा।
मुख्यमंत्री की प्रमुख दलीलें
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर और मेडक जिलों की सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं को देखते हुए बांध की ऊंचाई पर पुनर्विचार ज़रूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि FRL को 148 मीटर से थोड़ा अधिक करने पर भी महाराष्ट्र में जलमग्नता का प्रभाव न्यूनतम रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि FRL बढ़ाने से गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से तेलंगाना में पानी लाना अधिक सुगम होगा, जिससे परियोजना की परिचालन लागत भी कम होगी।
आगे की राह
यह पत्र दोनों राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय जल साझाकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण और मध्य भारत के कई राज्य गोदावरी बेसिन के जल संसाधनों पर अपने दावे मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच बैठक का कार्यक्रम तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महाराष्ट्र नई ऊंचाई के प्रस्ताव पर कितना लचीलापन दिखाता है।