प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना: तेलंगाना सरकार प्रतिबद्ध, IIT हैदराबाद के 4 प्रस्तावों की होगी समीक्षा

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प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना: तेलंगाना सरकार प्रतिबद्ध, IIT हैदराबाद के 4 प्रस्तावों की होगी समीक्षा

सारांश

तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना को पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। IIT हैदराबाद और RV एसोसिएट्स के चार प्रस्ताव समीक्षा में हैं, जबकि कालेश्वरम के तीन बांधों का मानसून से पहले जीर्णोद्धार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

Key Takeaways

  • सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने 29 अप्रैल को प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
  • IIT हैदराबाद और RV एसोसिएट्स ने संयुक्त रूप से 4 प्रस्ताव प्रस्तुत किए; CM रेवंत रेड्डी के साथ बैठक में अंतिम निर्णय होगा।
  • कालेश्वरम परियोजना के मेडिगड्डा, सुंडिला और अन्नाराम बांधों का मानसून से पहले जीर्णोद्धार अनिवार्य।
  • SPT परीक्षण हर 1.5 मीटर पर और पारगम्यता परीक्षण हर 3 मीटर पर किए जाने के निर्देश।
  • CWPRS निदेशक को स्थल पर उपस्थित रहने और NDSA को नियमित प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश।

तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने बुधवार, 29 अप्रैल को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना के निर्माण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और घोषणापत्र में दिए गए वादे के अनुरूप सभी आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर लिए गए हैं। सरकार तुम्मदिहट्टी से येल्लमपल्ली तक पानी मोड़कर लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है।

चार प्रस्तावों की गहन समीक्षा

आरवी एसोसिएट्स और IIT हैदराबाद ने संयुक्त रूप से चार प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, जिनमें तुम्मदिहट्टी से येल्लमपल्ली तक वैकल्पिक मार्गों का विस्तृत विवरण दिया गया है। प्रत्येक प्रस्ताव का लागत, व्यवहार्यता, संभावित लाभ और तकनीकी बाधाओं के आधार पर गहन विश्लेषण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ विशेष समीक्षा बैठक में इन प्रस्तावों की जाँच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम: मंत्री के कैंप कार्यालय में विशेष बैठक

मंत्री के कैंप कार्यालय में आयोजित विशेष समीक्षा बैठक में तुम्मदिहट्टी से येल्लमपल्ली तक वैकल्पिक मार्गों और कालेश्वरम परियोजना के अंतर्गत मेडिगड्डा, सुंडिला तथा अन्नाराम बांधों के जीर्णोद्धार कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब मानसून सत्र निकट है और बांधों की संरचनात्मक स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठते रहे हैं।

प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना की पृष्ठभूमि

तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने पिछले वर्ष पूर्व आदिलाबाद जिले में गोदावरी नदी पर प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया था। सरकार ने इसे पूर्ववर्ती भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार की उस 'ऐतिहासिक गलती' को सुधारने का प्रयास बताया, जिसमें मूल प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना को कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना में विलीन कर दिया गया था। गौरतलब है कि कालेश्वरम परियोजना की संरचनात्मक खामियाँ बाद में सार्वजनिक जाँच के दायरे में आईं।

कालेश्वरम बांधों के जीर्णोद्धार के निर्देश

उत्तम कुमार रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मानसून शुरू होने से पहले कालेश्वरम परियोजना के तीनों बैराजों — मेडिगड्डा, सुंडिला और अन्नाराम — के जीर्णोद्धार कार्यों के लिए सभी आवश्यक परीक्षण पूरे किए जाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानक प्रवेश परीक्षण (SPT) हर 1.5 मीटर के अंतराल पर और पारगम्यता परीक्षण हर 3 मीटर पर किए जाएँ। ड्रिलिंग के दौरान चट्टान मिलने पर बोरहोल को चट्टान में 5 मीटर तक बढ़ाया जाना अनिवार्य होगा।

निगरानी और जवाबदेही का ढाँचा

बांधों के जीर्णोद्धार के लिए नियुक्त समन्वय समिति को स्थलों का दौरा कर समयसीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है। कार्यों की त्वरित प्रगति सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र (CWPRS) के निदेशक को स्थल पर उपस्थित रहने को कहा गया है। इसके अलावा, परीक्षण और जीर्णोद्धार कार्यों की प्रगति की नियमित जानकारी राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) को दी जाएगी। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ अंतिम समीक्षा बैठक के बाद परियोजना की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Point of View

लेकिन अब तक ठोस निर्णय की जगह 'प्रस्तावों की समीक्षा' का दौर जारी है — जो बताता है कि यह परियोजना तकनीकी और वित्तीय जटिलताओं से घिरी है। कालेश्वरम परियोजना की विफलता पहले ही तेलंगाना की सिंचाई योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर चुकी है, ऐसे में नई परियोजना के लिए IIT जैसी संस्था की भागीदारी सकारात्मक संकेत है। परंतु मानसून की दस्तक से पहले बांधों के जीर्णोद्धार की समयसीमा और प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय न होना — दोनों मिलकर प्रशासनिक तत्परता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना क्या है?
प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना तेलंगाना में गोदावरी नदी पर प्रस्तावित एक बड़ी सिंचाई योजना है, जिसका उद्देश्य पूर्व आदिलाबाद जिले सहित लाखों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई जल उपलब्ध कराना है। पूर्ववर्ती BRS सरकार ने इसे कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना में विलीन कर दिया था, जिसे कांग्रेस सरकार ने 'ऐतिहासिक गलती' बताया।
IIT हैदराबाद और RV एसोसिएट्स ने कितने प्रस्ताव दिए हैं?
IIT हैदराबाद और RV एसोसिएट्स ने संयुक्त रूप से चार प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, जिनमें तुम्मदिहट्टी से येल्लमपल्ली तक वैकल्पिक जल मार्गों का विवरण है। इन प्रस्तावों का लागत, व्यवहार्यता और लाभ के आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है।
कालेश्वरम परियोजना के बांधों का जीर्णोद्धार कब तक होगा?
सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने निर्देश दिया है कि मानसून शुरू होने से पहले मेडिगड्डा, सुंडिला और अन्नाराम बांधों के जीर्णोद्धार के लिए सभी आवश्यक परीक्षण पूरे किए जाएँ। CWPRS निदेशक को स्थल पर उपस्थित रहकर कार्यों की निगरानी करने को कहा गया है।
प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना पर अंतिम निर्णय कब लिया जाएगा?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ विशेष समीक्षा बैठक में चारों प्रस्तावों की जाँच के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अभी तक बैठक की तिथि सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की भूमिका क्या है?
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) को कालेश्वरम बांधों के परीक्षण और जीर्णोद्धार कार्यों की नियमित प्रगति रिपोर्ट दी जाएगी। यह निर्देश बांध सुरक्षा की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है।
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