तुंगभद्रा बेसिन: 3 राज्यों की ऐतिहासिक सहमति, 33 नए स्पिलवे गेट का उद्घाटन; डी.के. शिवकुमार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 25 जून 2026 को कोप्पल जिले के मुनिराबाद स्थित तुंगभद्रा जलाशय पर 33 नए स्पिलवे गेट का उद्घाटन करने के बाद घोषणा की कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच तुंगभद्रा नदी बेसिन पर निर्भर किसानों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक आम सहमति बन गई है। यह समझौता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एक घंटे से अधिक चली बातचीत के बाद संभव हुआ।
संकट से सबक: 19वें गेट के टूटने से शुरू हुई पहल
शिवकुमार ने उस संकट का स्मरण किया जब पिछले वर्ष जलाशय का 19वाँ स्पिलवे गेट बह गया था। उन्होंने बताया कि जिले के प्रभारी मंत्री शिवराज तंगदागी और अधिकारियों ने आधी रात को उनसे संपर्क कर बांध को खतरे की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा, 'जब 19वाँ गेट टूटा, तो मैं अगली ही सुबह मौके पर गया और विशेषज्ञों से सलाह ली। एक सप्ताह के भीतर खराब गेट को बदल दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों के हितों की रक्षा हुई।'
उस घटना के बाद विपक्षी दलों की आलोचना के बावजूद राज्य सरकार ने बांध की सुरक्षा और परिचालन क्षमता को मज़बूत करने के लिए सभी 33 स्पिलवे गेट बदलने का निर्णय लिया।
तीन राज्यों की सहमति: क्या तय हुआ
तीनों राज्यों के नेताओं ने जल संसाधन संरक्षण के लिए कई प्रस्तावों पर सहमति जताई। इनमें जलाशय में 33 टीएमसी पानी संरक्षित करना, नवली समानांतर जलाशय का निर्माण करना और गाद हटाने (डी-सिल्टिंग) का कार्य करना शामिल है। शिवकुमार ने कहा, 'केंद्रीय जल शक्ति मंत्री इस समझौते का विस्तृत ब्यौरा देंगे। यह भारत की सिंचाई और संघीय शासन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जाएगा।'
तुंगभद्रा परियोजना: इतिहास और महत्व
शिवकुमार ने तुंगभद्रा परियोजना के ऐतिहासिक संदर्भ पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस नदी पर जलाशय बनाने का विचार सर्वप्रथम 1860 में ब्रिटिश इंजीनियर सर आर्थर कॉटन ने प्रस्तुत किया था। 1949 में इसका निर्माण आरंभ हुआ और कालांतर में यह दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई स्रोतों में से एक बन गया। यह जलाशय कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लाखों किसानों की आजीविका का आधार है।
किसानों के प्रति प्रतिबद्धता
खेती और किसान समुदाय के महत्व को रेखांकित करते हुए शिवकुमार ने कहा कि किसान बिना वेतन, पदोन्नति, पेंशन या सेवानिवृत्ति लाभ के काम करते हुए देश का पेट भरते हैं। उन्होंने कहा, 'आपके आशीर्वाद से हमने किसानों की जिंदगी बचाने और इस 'राइस बाउल' क्षेत्र को संरक्षित करने का पक्का संकल्प लिया है।' उन्होंने 'हमारा पानी, हमारा अधिकार' के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सहमति टिकाऊ जल प्रबंधन की दिशा में एक सामूहिक कदम है।
तीनों राज्यों के बीच बनी यह आम सहमति दक्षिण भारत में अंतर-राज्यीय जल सहयोग की एक नई मिसाल कायम करती है। आने वाले समय में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय इस समझौते का औपचारिक ब्यौरा सार्वजनिक करेगा, जिस पर सभी की नज़रें टिकी हैं।