जुराला प्रोजेक्ट पर किसानों का विरोध तेज, BRS नेता हिरासत में; पूर्व मंत्री भी नजरबंद
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के जोगुलम्बा गडवाल जिले में जुराला प्रोजेक्ट के इर्द-गिर्द 21 सितंबर 2026 को उस समय तनाव चरम पर पहुँच गया, जब पुलिस ने भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेताओं और सैकड़ों किसानों को बांध की ओर बढ़ने से रोक दिया। पानी की माँग पर हाथापाई और व्यापक हिरासत के बाद आत्माकुर-गडवाल हाईवे पर यातायात भी थम गया।
विरोध का कारण और पृष्ठभूमि
किसानों की मुख्य माँग है कि अधिकारी उनकी धान की फसल को बचाने के लिए तत्काल सिंचाई पानी छोड़ें। प्रोजेक्ट अधिकारियों ने अल नीनो के प्रभाव और वरिष्ठ अधिकारियों से मंजूरी न मिलने का हवाला देते हुए पानी छोड़ने से इनकार किया। अधिकारियों का यह भी तर्क था कि खेती के लिए पानी छोड़ने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित होगी — जिसे किसानों ने सिरे से खारिज किया।
गौरतलब है कि तनाव 19 सितंबर से ही बढ़ रहा था, जब किसानों ने अधिकारियों की उदासीनता के विरोध में आंदोलन शुरू किया था। इसके बाद बांध पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।
पुलिस कार्रवाई और हिरासत
BRS के धरने के आह्वान को देखते हुए बांध के 12 किलोमीटर के दायरे में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए और पुलिस वाहनों से आवाजाही रोकी गई, जिससे आत्माकुर-गडवाल हाईवे पर लंबा जाम लग गया।
जब प्रदर्शनकारियों ने घेराबंदी तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की तो हाथापाई हो गई। पुलिस ने पूर्व विधायक चित्तम राममोहन रेड्डी सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पूर्व मंत्री निरंजन रेड्डी और लक्ष्मा रेड्डी को भी नजरबंद किया गया। BRS के मंडल-स्तरीय नेताओं को सुबह से ही एहतियातन हिरासत में ले लिया गया था।
प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति
जुराला प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 8.81 टीएमसी फीट है, जबकि इस समय इसकी लाइव क्षमता 5.1 टीएमसी फीट है। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ फसल का मौसम अपने निर्णायक दौर में है और देरी से हर दिन किसानों के नुकसान का खतरा बढ़ रहा है।
BRS की प्रतिक्रिया
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने किसानों और पार्टी नेताओं की हिरासत की कड़ी निंदा की। उन्होंने तेलंगाना सरकार से माँग की कि जुराला आयाकट के किसानों के लिए तुरंत सिंचाई पानी छोड़ा जाए और खड़ी फसलों की रक्षा की जाए।
आगे की स्थिति
फिलहाल प्रशासन और BRS के बीच तनाव बना हुआ है। किसानों का आंदोलन तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक अधिकारी सिंचाई पानी छोड़ने पर कोई निर्णय नहीं लेते। खड़ी धान फसल की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है।