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जुराला बांध से पानी छोड़ा गया: BJP तेलंगाना अध्यक्ष रामचंद्र राव बोले — किसानों की जीत, नेशनल हेराल्ड पर ED जांच जारी रहनी चाहिए

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जुराला बांध से पानी छोड़ा गया: BJP तेलंगाना अध्यक्ष रामचंद्र राव बोले — किसानों की जीत, नेशनल हेराल्ड पर ED जांच जारी रहनी चाहिए

सारांश

भाजपा के नेतृत्व में महबूबनगर में हुई गिरफ्तारियों और आंदोलन के बाद जुराला बांध से पानी छोड़ा गया — BJP तेलंगाना अध्यक्ष रामचंद्र राव ने इसे किसानों की जीत बताया। साथ ही नेशनल हेराल्ड मामले में ED जांच को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने की माँग की।

मुख्य बातें

BJP तेलंगाना अध्यक्ष रामचंद्र राव ने 23 सितंबर को जुराला बांध से पानी छोड़े जाने को किसानों की जीत बताया।
22 सितंबर को महबूबनगर में भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं — जिनमें राव स्वयं शामिल थे — को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया गया था।
तेलंगाना सरकार के मंत्रियों ने कर्नाटक जाकर वार्ता की, जिसके बाद पानी छोड़ने पर सहमति बनी।
राव ने नेशनल हेराल्ड मामले में ED की जांच जारी रखने की वकालत की और कांग्रेस पर जांच के राजनीतिकरण का आरोप लगाया।
राव के अनुसार, राहुल गांधी और सोनिया गांधी इस मामले में मुख्य आरोपी हैं और सर्वोच्च न्यायालय मामले की निगरानी कर रहा है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष रामचंद्र राव ने 23 सितंबर को हैदराबाद में कहा कि जुराला बांध से पानी छोड़ा जाना भाजपा के नेतृत्व में चले किसान आंदोलन की सीधी जीत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के अपनी जांच जारी रखने का अधिकार मिलना चाहिए।

जुराला बांध विवाद और किसानों का संघर्ष

महबूबनगर जिले में जुराला परियोजना के अंतर्गत खेती करने वाले किसान लंबे समय से सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे थे। रामचंद्र राव ने बताया कि भाजपा ने इस मुद्दे पर आंदोलन छेड़ा, जिसके बाद 22 सितंबर को महबूबनगर में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं — जिनमें राव स्वयं भी शामिल थे — को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया गया।

राव ने कहा, 'तेलंगाना सरकार जो जुराला का पानी छोड़ रही है, वह किसानों की जीत है। जुराला प्रोजेक्ट के तहत अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसान पानी छोड़ने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे।'

कर्नाटक से बनी सहमति, पानी छोड़ा गया

रामचंद्र राव के अनुसार, भाजपा के आंदोलन के बाद तेलंगाना सरकार के मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधि कर्नाटक गए और वहाँ के मंत्रियों से वार्ता की। इस बातचीत के बाद कर्नाटक सरकार जुराला बांध से पानी छोड़ने पर सहमत हुई और पानी छोड़ा भी गया। राव ने इसे किसानों के दीर्घकालिक संघर्ष की स्वाभाविक परिणति बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और विपक्षी भाजपा के बीच कृषि मुद्दों पर तनाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि जुराला परियोजना कृष्णा नदी पर आधारित है और इसके जल बंटवारे को लेकर तेलंगाना व कर्नाटक के बीच पहले भी विवाद रहे हैं।

नेशनल हेराल्ड मामले पर BJP का रुख

नेशनल हेराल्ड केस पर रामचंद्र राव ने कहा कि ED इस मामले में अतिरिक्त साक्ष्य जुटा रही है और इसके लिए आरोपियों से दोबारा पूछताछ आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी इस मामले में मुख्य आरोपी हैं और सर्वोच्च न्यायालय भी इस मामले की निगरानी कर रहा है।

राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी जांच प्रक्रिया का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है और नहीं चाहती कि ED इस मामले में आगे बढ़े। उन्होंने कहा, 'नेशनल हेराल्ड मामला कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। सच सामने लाने के लिए जांच एजेंसियों को जांच जारी रखने की इजाजत दी जानी चाहिए।'

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और भाजपा के बीच यह टकराव राज्य की राजनीति में नई परतें जोड़ रहा है। जुराला मुद्दे पर भाजपा की सक्रियता और नेशनल हेराल्ड पर उसके आक्रामक रुख से स्पष्ट है कि पार्टी आगामी समय में कांग्रेस को दोनों मोर्चों पर घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। किसानों के लिए पानी मिलना एक तात्कालिक राहत है, लेकिन जुराला परियोजना के दीर्घकालिक जल प्रबंधन का सवाल अभी भी अनुत्तरित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह एकमुश्त राहत है या दीर्घकालिक जल-साझाकरण समझौते की शुरुआत। कृष्णा नदी जल बंटवारे पर तेलंगाना और कर्नाटक के बीच विवाद पुराना है और एक आंदोलन के दबाव में हुई बातचीत स्थायी समाधान नहीं है। नेशनल हेराल्ड मामले पर भाजपा का आक्रामक रुख चुनावी रणनीति का हिस्सा लगता है — ED की जांच न्यायालय की निगरानी में है, और इसे 'राजनीतिकरण' बनाम 'जवाबदेही' के चश्मे से देखना दोनों पक्षों की सुविधा के अनुसार बदलता रहता है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि जुराला के किसानों की मूल समस्या — सिंचाई अवसंरचना की कमी — किसी एक पानी छोड़ने से हल नहीं होती।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुराला बांध से पानी छोड़े जाने का विवाद क्या है?
जुराला परियोजना तेलंगाना के महबूबनगर जिले में कृष्णा नदी पर स्थित है। इस परियोजना के अंतर्गत खेती करने वाले किसान लंबे समय से सिंचाई के लिए पानी की मांग कर रहे थे। भाजपा के आंदोलन के बाद तेलंगाना सरकार ने कर्नाटक से वार्ता की और पानी छोड़ा गया।
BJP तेलंगाना अध्यक्ष रामचंद्र राव ने क्या कहा?
रामचंद्र राव ने जुराला बांध से पानी छोड़े जाने को किसानों की जीत बताया और कहा कि भाजपा के आंदोलन के बाद ही सरकार ने यह कदम उठाया। उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले में ED की जांच जारी रखने की भी वकालत की।
नेशनल हेराल्ड मामले में ED की जांच किस स्तर पर है?
रामचंद्र राव के अनुसार, ED इस मामले में अतिरिक्त साक्ष्य जुटा रही है और आरोपियों से दोबारा पूछताछ की योजना है। सर्वोच्च न्यायालय भी इस मामले की निगरानी कर रहा है।
महबूबनगर में भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी क्यों हुई?
22 सितंबर को महबूबनगर में भाजपा ने जुराला बांध से पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर आंदोलन किया, जिसके दौरान रामचंद्र राव सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
कांग्रेस पर राजनीतिकरण का आरोप क्यों लगाया गया?
रामचंद्र राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी नेशनल हेराल्ड मामले में ED की जांच को रोकने की कोशिश कर रही है और इस प्रक्रिया का राजनीतिकरण कर रही है। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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