कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची जारी: SIR-2026 के बाद 99.32 लाख नाम हटे, कुल वोटर 4.55 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने 27 अक्टूबर 2026 को राज्य की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की, जिसमें कुल 4,55,00,011 मतदाता पंजीकृत हैं। यह सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 की समाप्ति के बाद जारी की गई, जिसके तहत पहले की सूची से 99.32 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं।
पुनरीक्षण से पहले और बाद का फ़र्क
SIR शुरू होने से पहले कर्नाटक में 5,54,32,314 मतदाता थे। पुनरीक्षण के दौरान 1,07,96,339 मतदाताओं (कुल का 19.48 प्रतिशत) ने अपने गणना फॉर्म बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को जमा नहीं किए, जिस कारण उन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया। सीईओ कार्यालय के अनुसार इन मतदाताओं को 'अनुपस्थित', 'स्थायी रूप से स्थानांतरित', 'मृत' और 'दोहरी प्रविष्टि' की श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया।
इनमें 19,00,926 अनुपस्थित (3.43%), 65,45,679 स्थायी रूप से स्थानांतरित (11.81%), 16,39,864 मृत (2.96%) और 7,09,870 दोहरी प्रविष्टियाँ (1.28%) शामिल हैं।
मतदाता सूची का विस्तृत विवरण
प्रकाशित अंतिम सूची के अनुसार राज्य में 2,25,40,493 पुरुष मतदाता, 2,29,12,355 महिला मतदाता और 2,841 तृतीय लिंग के मतदाता हैं। इसके अलावा 44,322 सेवा मतदाता (सर्विस वोटर) और 3,252 अनिवासी भारतीय (NRI) मतदाता भी सूची में शामिल हैं।
18-19 वर्ष की आयु के 6,83,364 युवा मतदाता पहली बार मतदाता सूची में जगह पाने के हकदार बने हैं। 20-29 आयु वर्ग में 86,56,838 मतदाता दर्ज हैं। दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 5,65,340 है, जबकि 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के 3,92,134 वरिष्ठ मतदाता सूची में शामिल हैं।
दावे, आपत्तियाँ और नोटिस प्रक्रिया
दावों और आपत्तियों की अवधि 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 तक रही। इस दौरान 43,82,824 नोटिस जारी किए गए और सभी मामलों में सुनवाई हुई। कुल 61,867 मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल होने के लिए अयोग्य घोषित किया गया। नाम हटाने के अनुरोध से जुड़े 'फॉर्म-7' के तहत मृत्यु के 1,091, दोहरी प्रविष्टियों के 762, स्थायी स्थानांतरण के 1,24,327, अनुपस्थिति के 184 और अन्य श्रेणियों के 61,960 मामले दर्ज हुए।
प्रक्रिया में लगा तंत्र
BLO द्वारा घर-घर सत्यापन 30 जून से 17 अगस्त 2026 तक चला। नोटिस और निपटारे की प्रक्रिया 22 अक्टूबर तक जारी रही। इस पूरी कवायद में राज्य के सभी 34 चुनावी जिलों के जिला चुनाव अधिकारी, 224 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO), 60,923 BLO और सात पंजीकृत राजनीतिक दलों के 1,33,092 बूथ-स्तरीय एजेंट शामिल रहे। सीईओ कार्यालय ने सफलता का श्रेय राज्यभर के अधिकारियों और चुनाव कर्मियों के समन्वित प्रयासों को दिया।
आगे क्या होगा
सीईओ कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में साल भर नाम जुड़वाने, सुधार कराने, निवास बदलने और दिव्यांग श्रेणी में नाम दर्ज कराने की सुविधा खुली रहेगी। यदि कोई ERO के निर्णय से असंतुष्ट हो तो वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24(A) के तहत जिला मजिस्ट्रेट और आगे धारा 24(B) के तहत सीईओ के पास अपील कर सकता है। अंतिम मतदाता सूची की प्रतियाँ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ पहले ही साझा कर दी गई हैं।