कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को होगी जारी, 43.82 लाख नोटिसों पर सुनवाई पूरी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने 23 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत 2026 की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। यह घोषणा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जारी सभी नोटिसों पर सुनवाई पूरी होने के बाद सामने आई है।
मुख्य आँकड़े और प्रक्रिया
CEO कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य भर में कुल 43,82,824 नोटिस जारी एवं वितरित किए गए और उन सभी पर सुनवाई संपन्न हो चुकी है। इसके साथ ही 16 जून से 22 अक्टूबर 2026 के बीच विभिन्न श्रेणियों में कुल 25,87,461 आवेदन प्राप्त हुए।
प्राप्त आवेदनों का वर्गीकरण इस प्रकार रहा — मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने हेतु प्रपत्र 6 के तहत 10,42,863 आवेदन; विदेशी मतदाताओं को शामिल करने संबंधी प्रपत्र 6ए के तहत 4,840 आवेदन; नाम दर्ज करने या हटाने पर आपत्ति के लिए प्रपत्र 7 के तहत 2,28,917 आवेदन; तथा प्रविष्टियों में सुधार व अन्य परिवर्तनों के लिए प्रपत्र 8 के तहत 13,10,841 आवेदन।
दावे और आपत्तियों का निपटारा
CEO कार्यालय ने स्पष्ट किया कि 23 सितंबर 2026 तक — जो दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने की अंतिम तिथि थी — प्राप्त सभी प्रपत्र 7 आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर निपटा दिया गया है। कार्यालय ने यह भी बताया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करना और प्रविष्टियों में सुधार करना एक सतत प्रक्रिया है। पात्र नागरिक संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के पास लागू प्रपत्र जमा कर सकते हैं। आवेदन ECINet ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अथवा बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) और ERO कार्यालयों में ऑफलाइन भी दाखिल किए जा सकते हैं।
फर्जी आवेदनों का विवाद
गौरतलब है कि कर्नाटक में SIR प्रक्रिया को लेकर तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में पहले से भरे हुए प्रपत्र 7 आवेदन जमा किए जा रहे हैं, जिनके ज़रिए कथित तौर पर कांग्रेस विधायकों द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा था। पार्टी ने CEO कार्यालय में विरोध दर्ज कराया और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने आवेदनों को फर्जी बताए जाने का खंडन किया और तर्क दिया कि चुनावी आपत्तियाँ दर्ज करना कानूनी अधिकार है और उनका सत्यापन चुनाव अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रतिक्रिया
कर्नाटक के मुख्य चुनाव आयुक्त वी. अनबुकुमार ने संदिग्ध फर्जी आवेदनों की जाँच के आदेश दिए और अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहाँ भी गड़बड़ी साबित हो, वहाँ तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रपत्र 7 पर आपत्ति दर्ज करने मात्र से किसी मतदाता का नाम स्वतः नहीं हटाया जाता — इसके लिए उचित प्रक्रिया और स्वतंत्र सत्यापन अनिवार्य है।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में अगले विधानसभा चुनावों से पूर्व मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता चरम पर है। 27 अक्टूबर को अंतिम सूची के प्रकाशन के साथ ही इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नज़र और तेज़ हो जाएगी।