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महाराष्ट्र साइबर सेल ने ₹1.30 करोड़ की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में दो आरोपी दबोचे, 50% से अधिक रकम फ्रीज

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महाराष्ट्र साइबर सेल ने ₹1.30 करोड़ की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में दो आरोपी दबोचे, 50% से अधिक रकम फ्रीज

सारांश

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने ₹1.30 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी में एक MBA डिग्रीधारक महिला और बीमा कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव को गिरफ्तार किया। इनके खाते देशभर के नौ अन्य साइबर मामलों से जुड़े हैं — यह मनी म्यूल नेटवर्क के बढ़ते खतरे की बड़ी तस्वीर उजागर करता है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने ₹1.30 करोड़ की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में श्वेता विकल गुप्ता (41) और योगेश विवेकानंद देसाई (46) को गिरफ्तार किया।
पीड़ित 68 वर्षीय व्यक्ति को शेयर बाज़ार में भारी रिटर्न का प्रलोभन देकर ठगा गया।
ठगी की रकम का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा फ्रीज; कानूनी प्रक्रिया बाद पीड़ित को लौटाया जाएगा।
आरोपियों के खाते दिल्ली, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी और त्रिपुरा के नौ अन्य साइबर मामलों से जुड़े।
दोनों आरोपियों ने अपने खातों को मनी म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल होने दिया।
एजेंसी ने चेतावनी दी — बैंक खाता किसी को सौंपना आपराधिक दायित्व का कारण बन सकता है।

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने 23 अक्टूबर 2026 को ₹1.30 करोड़ की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मामले में श्वेता विकल गुप्ता (41) और योगेश विवेकानंद देसाई (46) को गिरफ्तार किया। ठगी गई कुल राशि का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा तत्काल वित्तीय जांच के ज़रिए फ्रीज कर लिया गया है, जो पीड़ित को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लौटाया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि

पीड़ित एक 68 वर्षीय व्यक्ति हैं, जिन्हें शेयर बाज़ार में भारी मुनाफे का झाँसा देकर ठगों ने विभिन्न बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई। आरोपियों ने अधिक रिटर्न का वादा कर पीड़ित का विश्वास जीता और धीरे-धीरे ₹1.30 करोड़ की राशि हड़प ली। शिकायत दर्ज होने के बाद महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।

वित्तीय जांच और धन का पता

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने बैंकिंग लेनदेन, धन के प्रवाह और खातों के बीच रकम के हस्तांतरण का विस्तृत विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से ₹30 लाख दो ऐसे बैंक खातों में पहुँचे थे, जिन्हें प्रथम स्तर के लाभार्थी खाते (फर्स्ट लेयर बेनिफिशियरी अकाउंट) के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इन खातों से रकम को आगे अन्य खातों में स्थानांतरित कर अवैध धन को छिपाने की कोशिश की गई।

आरोपियों की पहचान और भूमिका

गिरफ्तार श्वेता विकल गुप्ता MBA डिग्री धारक हैं, जबकि योगेश विवेकानंद देसाई एक बीमा कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत हैं। आरोप है कि दोनों ने जानबूझकर अपने बैंक खातों को मनी म्यूल अकाउंट के रूप में उपलब्ध कराया, जिनके ज़रिए साइबर धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और लेयरिंग का काम किया गया।

गौरतलब है कि मनी म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं जिन्हें खाताधारक कमीशन या आर्थिक लाभ के बदले साइबर अपराधियों को सौंप देते हैं। शिक्षित और नौकरीपेशा पृष्ठभूमि के बावजूद इन दोनों आरोपियों का इस नेटवर्क से जुड़ा होना इस घटनाक्रम को विशेष रूप से चिंताजनक बनाता है।

देशव्यापी साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ाव

जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों के बैंक खाते दिल्ली, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी और त्रिपुरा में दर्ज नौ अन्य साइबर अपराध मामलों से भी जुड़े हैं। यह संकेत देता है कि इन खातों का उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में हुए कई साइबर अपराधों में किया जा सकता है। महाराष्ट्र साइबर विभाग पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच जारी रखे हुए है।

एजेंसी की चेतावनी और आगे की राह

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को कमीशन या अन्य प्रलोभन के बदले अपने बैंक खाते का उपयोग न करने दें। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ऐसे खातों के धारक भी कानूनी कार्रवाई और आपराधिक जिम्मेदारी के दायरे में आ सकते हैं। फ्रीज की गई राशि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ित को वापस की जाएगी, और शेष राशि का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संगठित राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के धागे हैं — जिसे उखाड़ने के लिए केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि राज्यों के बीच समन्वित जांच की ज़रूरत है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने किस मामले में गिरफ्तारी की?
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने एक 68 वर्षीय व्यक्ति से ₹1.30 करोड़ की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मामले में श्वेता विकल गुप्ता और योगेश विवेकानंद देसाई को गिरफ्तार किया। इन पर आरोप है कि उन्होंने अपने बैंक खातों को मनी म्यूल अकाउंट के रूप में उपलब्ध कराया।
मनी म्यूल अकाउंट क्या होता है और यह कानूनी रूप से कितना खतरनाक है?
मनी म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता है जिसे खाताधारक कमीशन या अन्य लाभ के बदले साइबर अपराधियों को धन के लेनदेन के लिए सौंप देते हैं। महाराष्ट्र साइबर विभाग के अनुसार, ऐसे खातों के धारक भी आपराधिक जिम्मेदारी और कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
फ्रीज की गई रकम पीड़ित को कब मिलेगी?
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने बताया कि ठगी गई ₹1.30 करोड़ में से 50 प्रतिशत से अधिक राशि फ्रीज कर ली गई है। यह राशि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ित को वापस की जाएगी।
क्या ये खाते केवल महाराष्ट्र के साइबर मामले से जुड़े हैं?
नहीं। जांच में सामने आया कि आरोपियों के बैंक खाते दिल्ली, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी और त्रिपुरा में दर्ज नौ अन्य साइबर अपराध मामलों से भी जुड़े हैं। यह एक व्यापक राष्ट्रीय नेटवर्क की ओर संकेत करता है।
ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि शेयर बाज़ार में असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के वादों पर भरोसा न करें और किसी को भी अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने की अनुमति न दें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर पुलिस को दें।
राष्ट्र प्रेस
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