महाराष्ट्र साइबर सेल ने ₹1.30 करोड़ की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में दो आरोपी दबोचे, 50% से अधिक रकम फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने 23 अक्टूबर 2026 को ₹1.30 करोड़ की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मामले में श्वेता विकल गुप्ता (41) और योगेश विवेकानंद देसाई (46) को गिरफ्तार किया। ठगी गई कुल राशि का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा तत्काल वित्तीय जांच के ज़रिए फ्रीज कर लिया गया है, जो पीड़ित को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लौटाया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
पीड़ित एक 68 वर्षीय व्यक्ति हैं, जिन्हें शेयर बाज़ार में भारी मुनाफे का झाँसा देकर ठगों ने विभिन्न बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई। आरोपियों ने अधिक रिटर्न का वादा कर पीड़ित का विश्वास जीता और धीरे-धीरे ₹1.30 करोड़ की राशि हड़प ली। शिकायत दर्ज होने के बाद महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।
वित्तीय जांच और धन का पता
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने बैंकिंग लेनदेन, धन के प्रवाह और खातों के बीच रकम के हस्तांतरण का विस्तृत विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से ₹30 लाख दो ऐसे बैंक खातों में पहुँचे थे, जिन्हें प्रथम स्तर के लाभार्थी खाते (फर्स्ट लेयर बेनिफिशियरी अकाउंट) के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इन खातों से रकम को आगे अन्य खातों में स्थानांतरित कर अवैध धन को छिपाने की कोशिश की गई।
आरोपियों की पहचान और भूमिका
गिरफ्तार श्वेता विकल गुप्ता MBA डिग्री धारक हैं, जबकि योगेश विवेकानंद देसाई एक बीमा कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत हैं। आरोप है कि दोनों ने जानबूझकर अपने बैंक खातों को मनी म्यूल अकाउंट के रूप में उपलब्ध कराया, जिनके ज़रिए साइबर धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और लेयरिंग का काम किया गया।
गौरतलब है कि मनी म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं जिन्हें खाताधारक कमीशन या आर्थिक लाभ के बदले साइबर अपराधियों को सौंप देते हैं। शिक्षित और नौकरीपेशा पृष्ठभूमि के बावजूद इन दोनों आरोपियों का इस नेटवर्क से जुड़ा होना इस घटनाक्रम को विशेष रूप से चिंताजनक बनाता है।
देशव्यापी साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ाव
जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों के बैंक खाते दिल्ली, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी और त्रिपुरा में दर्ज नौ अन्य साइबर अपराध मामलों से भी जुड़े हैं। यह संकेत देता है कि इन खातों का उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में हुए कई साइबर अपराधों में किया जा सकता है। महाराष्ट्र साइबर विभाग पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच जारी रखे हुए है।
एजेंसी की चेतावनी और आगे की राह
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को कमीशन या अन्य प्रलोभन के बदले अपने बैंक खाते का उपयोग न करने दें। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ऐसे खातों के धारक भी कानूनी कार्रवाई और आपराधिक जिम्मेदारी के दायरे में आ सकते हैं। फ्रीज की गई राशि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ित को वापस की जाएगी, और शेष राशि का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।