यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स बैंक धोखाधड़ी: ईडी ने कोलकाता में ₹85.20 करोड़ की जमीन जब्त की, कुल कुर्की ₹1,609 करोड़ पार
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसने मेसर्स यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड (यूआईएल) और अन्य संस्थाओं से जुड़े बैंक धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोलकाता के मौजा चकगरिया में स्थित 14.51 एकड़ भूमि — जिसका मूल्य लगभग ₹85.20 करोड़ है — को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कुर्की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत की गई है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुर्क या फ्रीज की गई कुल संपत्तियों का मूल्य बढ़कर लगभग ₹1,609 करोड़ हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
जब्त की गई भूमि मेसर्स सबअर्बन एग्रीकल्चर डेयरी एंड फिशरीज प्राइवेट लिमिटेड (एसएडीएएफपीएल) के नाम पर दर्ज है। ईडी की जांच के अनुसार, एसएडीएएफपीएल को यूनिटी रियल्टी एंड डेवलपर्स लिमिटेड (यूआरडीएल) के माध्यम से यूआईएल की एक स्टेप-डाउन सहायक कंपनी के रूप में पहचाना गया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, यूआईएल से प्राप्त धनराशि यूआरडीएल के ज़रिए भेजी गई और बाद में संबद्ध कंपनियों के माध्यम से संपत्तियों के अधिग्रहण में लगाई गई। चकगरिया भूमि का सीधा संबंध उन फंड्स से पाया गया जो यूआईएल और उसकी समूह संस्थाओं से प्राप्त हुए थे।
धोखाधड़ी का स्वरूप
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि यूआईएल ने अपने प्रवर्तकों, निदेशकों और संबद्ध संस्थाओं के साथ मिलकर 23 बैंकों के एक संघ से लगभग ₹3,200 करोड़ की ऋण सुविधा का दुरुपयोग किया। ब्याज सहित कुल बकाया राशि लगभग ₹3,800 करोड़ आंकी गई है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस धोखाधड़ी में फर्जी लेनदेन, धन का गबन, वित्तीय अभिलेखों में हेरफेर और फर्जी संस्थाओं के माध्यम से धन का हस्तांतरण शामिल था। यह मामला मूल रूप से सीबीआई की बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर मुंबई में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था।
पूर्व की कार्रवाइयाँ
जुलाई 2025 में ईडी ने यूआईएल के पूर्व निदेशकों और उनके परिवार के सदस्यों के आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों के साथ-साथ बैंक लॉकरों की तलाशी ली थी, जिसमें ₹31.21 करोड़ की चल संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई थी। इससे पहले तीन अलग-अलग अंतरिम कुर्की आदेशों के ज़रिए लगभग ₹1,493 करोड़ मूल्य की ज़मीन और फ्लैट कुर्क किए गए थे, जिन्हें पीएमएलए के तहत निर्णायक प्राधिकरण ने बाद में पुष्टि भी दे दी थी।
गौरतलब है कि 27 मार्च 2026 को ईडी ने ग्रेटर बॉम्बे, मुंबई की सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट के नामित विशेष न्यायालय में अभियोग शिकायत भी दर्ज कर दी है।
क्या होगा आगे
ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच जारी है। पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत की गई यह अस्थायी जब्ती इसलिए की गई है ताकि अदालती कार्रवाई लंबित रहने तक संपत्ति के हस्तांतरण या निपटान को रोका जा सके। यह मामला उन बड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों की श्रृंखला में शामिल हो गया है जहाँ एजेंसी ने सहायक कंपनियों के जटिल नेटवर्क के ज़रिए छुपाई गई संपत्तियों को सफलतापूर्वक ट्रेस किया है।