23 अक्टूबर 2026
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यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स बैंक धोखाधड़ी: ईडी ने कोलकाता में ₹85.20 करोड़ की जमीन जब्त की, कुल कुर्की ₹1,609 करोड़ पार

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यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स बैंक धोखाधड़ी: ईडी ने कोलकाता में ₹85.20 करोड़ की जमीन जब्त की, कुल कुर्की ₹1,609 करोड़ पार

सारांश

ईडी ने यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स के ₹3,800 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में कोलकाता के चकगरिया में ₹85.20 करोड़ की जमीन जब्त की; मामले में कुल कुर्की ₹1,609 करोड़ पहुँची — और जांच अभी जारी है।

मुख्य बातें

ईडी ने 23 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के चकगरिया में 14.51 एकड़ भूमि ( ₹85.20 करोड़ ) अस्थायी रूप से जब्त की।
जब्त जमीन एसएडीएएफपीएल के नाम पर है, जो यूआईएल की स्टेप-डाउन सहायक कंपनी है।
कुल आरोपित धोखाधड़ी लगभग ₹3,200 करोड़ ऋण; ब्याज सहित बकाया ₹3,800 करोड़ से अधिक, 23 बैंकों से।
इस मामले में अब तक कुल कुर्की/फ्रीज की गई संपत्तियाँ लगभग ₹1,609 करोड़ हो गई हैं।
27 मार्च 2026 को मुंबई की विशेष अदालत में अभियोग शिकायत दर्ज; आगे की जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसने मेसर्स यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड (यूआईएल) और अन्य संस्थाओं से जुड़े बैंक धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोलकाता के मौजा चकगरिया में स्थित 14.51 एकड़ भूमि — जिसका मूल्य लगभग ₹85.20 करोड़ है — को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कुर्की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत की गई है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुर्क या फ्रीज की गई कुल संपत्तियों का मूल्य बढ़कर लगभग ₹1,609 करोड़ हो गया है।

मुख्य घटनाक्रम

जब्त की गई भूमि मेसर्स सबअर्बन एग्रीकल्चर डेयरी एंड फिशरीज प्राइवेट लिमिटेड (एसएडीएएफपीएल) के नाम पर दर्ज है। ईडी की जांच के अनुसार, एसएडीएएफपीएल को यूनिटी रियल्टी एंड डेवलपर्स लिमिटेड (यूआरडीएल) के माध्यम से यूआईएल की एक स्टेप-डाउन सहायक कंपनी के रूप में पहचाना गया है।

जांचकर्ताओं के अनुसार, यूआईएल से प्राप्त धनराशि यूआरडीएल के ज़रिए भेजी गई और बाद में संबद्ध कंपनियों के माध्यम से संपत्तियों के अधिग्रहण में लगाई गई। चकगरिया भूमि का सीधा संबंध उन फंड्स से पाया गया जो यूआईएल और उसकी समूह संस्थाओं से प्राप्त हुए थे।

धोखाधड़ी का स्वरूप

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि यूआईएल ने अपने प्रवर्तकों, निदेशकों और संबद्ध संस्थाओं के साथ मिलकर 23 बैंकों के एक संघ से लगभग ₹3,200 करोड़ की ऋण सुविधा का दुरुपयोग किया। ब्याज सहित कुल बकाया राशि लगभग ₹3,800 करोड़ आंकी गई है।

जांचकर्ताओं के अनुसार, इस धोखाधड़ी में फर्जी लेनदेन, धन का गबन, वित्तीय अभिलेखों में हेरफेर और फर्जी संस्थाओं के माध्यम से धन का हस्तांतरण शामिल था। यह मामला मूल रूप से सीबीआई की बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर मुंबई में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था।

पूर्व की कार्रवाइयाँ

जुलाई 2025 में ईडी ने यूआईएल के पूर्व निदेशकों और उनके परिवार के सदस्यों के आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों के साथ-साथ बैंक लॉकरों की तलाशी ली थी, जिसमें ₹31.21 करोड़ की चल संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई थी। इससे पहले तीन अलग-अलग अंतरिम कुर्की आदेशों के ज़रिए लगभग ₹1,493 करोड़ मूल्य की ज़मीन और फ्लैट कुर्क किए गए थे, जिन्हें पीएमएलए के तहत निर्णायक प्राधिकरण ने बाद में पुष्टि भी दे दी थी।

गौरतलब है कि 27 मार्च 2026 को ईडी ने ग्रेटर बॉम्बे, मुंबई की सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट के नामित विशेष न्यायालय में अभियोग शिकायत भी दर्ज कर दी है।

क्या होगा आगे

ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच जारी है। पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत की गई यह अस्थायी जब्ती इसलिए की गई है ताकि अदालती कार्रवाई लंबित रहने तक संपत्ति के हस्तांतरण या निपटान को रोका जा सके। यह मामला उन बड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों की श्रृंखला में शामिल हो गया है जहाँ एजेंसी ने सहायक कंपनियों के जटिल नेटवर्क के ज़रिए छुपाई गई संपत्तियों को सफलतापूर्वक ट्रेस किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

800 करोड़ की कथित देनदारी के मुकाबले अब तक सिर्फ ₹1,609 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क हो सकी हैं — यह अंतर बताता है कि वसूली की राह अभी लंबी है। असली सवाल यह है कि 23 बैंकों के संघ ने इतने बड़े ऋण के दौरान ड्यू-डिलिजेंस में कहाँ चूक की — और क्या इस पर भी जवाबदेही तय होगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने कोलकाता में कौन-सी संपत्ति जब्त की है?
ईडी ने कोलकाता के मौजा चकगरिया में स्थित 14.51 एकड़ अचल भूमि जब्त की है, जिसका मूल्य लगभग ₹85.20 करोड़ है। यह भूमि एसएडीएएफपीएल के नाम पर दर्ज है, जो यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड की स्टेप-डाउन सहायक कंपनी पहचानी गई है।
यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स पर क्या आरोप हैं?
आरोप है कि यूनिटी इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने अपने प्रवर्तकों और संबद्ध संस्थाओं के साथ मिलकर 23 बैंकों के संघ से लगभग ₹3,200 करोड़ की ऋण सुविधा का दुरुपयोग किया। फर्जी लेनदेन, वित्तीय अभिलेखों में हेरफेर और फर्जी संस्थाओं के ज़रिए धन हस्तांतरण शामिल बताया गया है।
इस मामले में अब तक कितनी संपत्ति कुर्क हो चुकी है?
नवीनतम कुर्की के बाद इस मामले में अब तक कुल लगभग ₹1,609 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ कुर्क या फ्रीज की जा चुकी हैं। इनमें जुलाई 2025 में फ्रीज की गई ₹31.21 करोड़ की चल संपत्ति और तीन अंतरिम आदेशों के तहत लगभग ₹1,493 करोड़ की ज़मीन व फ्लैट शामिल हैं।
यह मामला अदालत में किस स्तर पर है?
ईडी ने 27 मार्च 2026 को ग्रेटर बॉम्बे, मुंबई की सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट के नामित विशेष न्यायालय में अभियोग शिकायत दर्ज कर दी है। एजेंसी के अनुसार, आगे की जांच अभी जारी है।
पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत अस्थायी जब्ती का क्या मतलब है?
पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत अस्थायी जब्ती एजेंसी को यह अधिकार देती है कि वह अदालती कार्रवाई लंबित रहने तक संपत्ति के हस्तांतरण या बिक्री को रोक सके। यह जब्ती स्थायी नहीं होती — इसे बाद में निर्णायक प्राधिकरण द्वारा पुष्टि या अस्वीकार किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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