क्या प्रवर्तन निदेशालय ने सुरेका ग्रुप की कंपनी की 99.26 करोड़ की संपत्ति कुर्क की?

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क्या प्रवर्तन निदेशालय ने सुरेका ग्रुप की कंपनी की 99.26 करोड़ की संपत्ति कुर्क की?

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने आम्रपाली ग्रुप के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुरेका ग्रुप की कंपनी मौर्या उद्योग लिमिटेड की संपत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई 99.26 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर की गई है, जिसमें कंपनी के कार्यालय और फैक्ट्री शामिल हैं। जानें इस मामले की पेचीदगियाँ और क्या है इसका असर।

Key Takeaways

  • ईडी ने सुरेका ग्रुप की कंपनी की संपत्तियों को कुर्क किया है।
  • कुल संपत्तियों की कीमत 99.26 करोड़ रुपए है।
  • यह कुर्की पीएमएलए 2002 के तहत की गई है।
  • इस मामले में 33 लोग आरोपी हैं।
  • जांच कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।

लखनऊ, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आम्रपाली ग्रुप से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुरेका ग्रुप की कंपनी मौर्या उद्योग लिमिटेड की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर दिया है। इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 99.26 करोड़ रुपए है, जिसमें कंपनी के कार्यालय, फैक्ट्री, भूमि और इमारतें शामिल हैं। कंपनी के प्रमोटर नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका हैं। यह कुर्की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है।

यह मामला आम्रपाली ग्रुप के बड़े घोटाले से संबंधित है जिसमें हजारों घर खरीदारों को धोखा दिया गया। आम्रपाली ग्रुप ने खरीदारों से अरबों रुपए एकत्र किए, लेकिन समय पर फ्लैट्स नहीं सौंपे। आरोप है कि ग्रुप के निदेशकों अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार ने आपराधिक साजिश रचकर खरीदारों के पैसे को गलत तरीके से दूसरी जगहों पर लगाया और हड़प लिया। इसमें फर्जी लेनदेन, जालसाजी और धोखाधड़ी शामिल थी।

ईडी की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि आम्रपाली के निदेशकों ने मौर्या उद्योग लिमिटेड और जोतिंद्रा स्टील एंड ट्यूब्स लिमिटेड के निदेशकों नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका के साथ मिलकर निर्माण सामग्री और टीएमटी बार खरीदने के बहाने फर्जी लेनदेन किए। इसके जरिए घर खरीदारों के पैसे को शेल कंपनियों और फर्जी सप्लायरों के जाल में फंसाया गया। पैसा कई परतों में घुमाया गया, बड़ी रकम नकद निकाली गई और हमेशा के लिए खर्च कर दी गई। इससे अपराध से कमाई हुई संपत्ति बनी और मनी लॉन्ड्रिंग हुई।

जांच में यह भी सामने आया कि आम्रपाली से मौर्या उद्योग लिमिटेड को 110.39 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए, जो सीधे घर खरीदारों के पैसे से आए थे। चूंकि मूल पैसा पहले ही खर्च हो चुका था और उसे सीधे कुर्क नहीं किया जा सकता था, इसलिए ईडी ने पीएमएलए के नियमों के तहत बराबर कीमत की संपत्ति कुर्क की।

ईडी ने यह जांच उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई 2019 को बिक्रम चटर्जी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में पीड़ित खरीदारों की याचिकाओं पर आदेश दिया था, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी।

इससे पहले ईडी ने आम्रपाली के निदेशक अनिल शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार के अलावा स्टेट्यूटरी ऑडिटर अनिल मित्तल और सीएफओ चंदर प्रकाश वधवा को गिरफ्तार किया था। अब तक इस मामले में छह मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 33 लोग और कंपनियां आरोपी हैं। ईडी ने कुल छह अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए हैं, जिनसे 303.08 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क हुई हैं।

Point of View

बल्कि यह मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को भी दर्शाता है। यह देश के आर्थिक तंत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाए।
NationPress
04/01/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने संपत्ति क्यों कुर्क की?
ईडी ने आम्रपाली ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुरेका ग्रुप की कंपनी की संपत्तियों को कुर्क किया है क्योंकि इसमें फर्जी लेनदेन और धोखाधड़ी का संदेह है।
कुल संपत्तियों की कीमत कितनी है?
कुल संपत्तियों की कीमत लगभग 99.26 करोड़ रुपए है।
इस मामले में कितने लोग आरोपी हैं?
इस मामले में कुल 33 लोग और कंपनियां आरोपी हैं।
कौन से अधिनियम के तहत कुर्की की गई है?
यह कुर्की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है।
ईडी की जांच कब शुरू हुई थी?
ईडी की जांच कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
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