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विकसित भारत 2047: KPMG रिपोर्ट में तेजी, क्षमता और जवाबदेही को बताया अनिवार्य

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विकसित भारत 2047: KPMG रिपोर्ट में तेजी, क्षमता और जवाबदेही को बताया अनिवार्य

सारांश

केपीएमजी की नई रिपोर्ट कहती है कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना तभी पूरा होगा जब भारत तेजी, क्षमता और जवाबदेही — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करे। AI, सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।

मुख्य बातें

केपीएमजी इन इंडिया ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 'विकसित भारत 2047' रिपोर्ट जारी की।
रिपोर्ट के अनुसार तेजी , क्षमता और जवाबदेही 2047 के लक्ष्यों की कुंजी हैं।
AI, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि प्रसंस्करण को रणनीतिक क्षेत्र बताया गया।
केपीएमजी सीईओ येज्दी नागपोरवाला ने क्षमताओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धी उद्यमों में बदलने पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 'अग्रसर भारत मंच' को आकांक्षाओं का प्रभावशाली प्रतीक बताया।
रिपोर्ट में सरकार, उद्योग और समाज के बीच समन्वित प्रयास को अनिवार्य बताया गया।

केपीएमजी इन इंडिया की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को हासिल करने की सफलता तीन मूलभूत स्तंभों पर टिकी है — तेजी (Agility), क्षमता (Ability) और जवाबदेही (Accountability)। 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जारी यह रिपोर्ट 'अग्रसर भारत मंच' में प्रस्तुत की गई, जो केपीएमजी की सार्वजनिक क्षेत्र उत्कृष्टता (PSX) पहल का हिस्सा है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भू-राजनीतिक बदलावों, तकनीकी व्यवधानों और नागरिकों की बदलती अपेक्षाओं के बीच इन तीनों तत्वों का आपसी तालमेल ही देश की आकांक्षाओं को वास्तविकता में बदल सकता है।

रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को पिछले एक दशक में बुनियादी ढाँचे, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे, वित्तीय समावेशन, विनिर्माण और सार्वजनिक निवेश के क्षेत्र में तैयार मज़बूत आधार को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता, मज़बूती, नवाचार और अवसरों में बदलने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। रिपोर्ट बदलाव के तीन प्रमुख वाहकों की पहचान करती है: पूंजी आधारित विकास, प्रौद्योगिकी आधारित प्रक्रियाएँ और लोगों पर केंद्रित संस्थाएँ।

रणनीतिक क्षेत्रों पर ज़ोर

रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में क्षमताओं को मज़बूत करने का विशेष आह्वान किया गया है। गौरतलब है कि ये वही क्षेत्र हैं जिन्हें केंद्र सरकार अपनी उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से भी प्राथमिकता दे रही है, जो इस रिपोर्ट को सरकारी नीति की दिशा के अनुरूप बनाती है।

विशेषज्ञों की राय

केपीएमजी इन इंडिया में पार्टनर और सरकारी एवं सार्वजनिक सेवाओं (G&PS) के प्रमुख नीलाचल मिश्रा ने कहा, 'इन तीन सिद्धांतों के बीच तालमेल यह तय करेगा कि भारत अपनी आकांक्षाओं को उपलब्धियों में, निवेश को मूल्य में और विकास को व्यापक प्रभाव में कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाता है।'

केपीएमजी इन इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी येज्दी नागपोरवाला ने कहा, 'हमारी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम अपनी क्षमताओं और ताकत को अधिक उत्पादकता, मज़बूत सामर्थ्य और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमों में कितनी प्रभावी ढंग से बदलते हैं।'

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 'अग्रसर भारत मंच' को देश की आकांक्षाओं और संकल्प को प्रदर्शित करने का एक प्रभावशाली विचार बताया। उन्होंने उद्योग, शिक्षा जगत और अन्य हितधारकों के बीच नवाचार, निरंतर प्रतिबद्धता और करीबी सहयोग पर जोर दिया।

आगे की राह

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सरकार, उद्योग और समाज के बीच समन्वित प्रयास अनिवार्य हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका-चीन व्यापार तनावों का लाभ उठाने के लिए नीतिगत स्तर पर सक्रिय है। रिपोर्ट की सिफारिशें आने वाले वर्षों में नीति-निर्माण की रूपरेखा तय करने में सहायक भूमिका निभा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मापन योग्य मील के पत्थर अब भी अस्पष्ट हैं। तेजी, क्षमता और जवाबदेही जैसे शब्द तब तक रिपोर्ट की शब्दावली बने रहते हैं जब तक उनसे जुड़ी ठोस समयसीमाएँ और जवाबदेही तंत्र न हों। गौरतलब है कि GDP में विनिर्माण की हिस्सेदारी एक दशक से 17% के आसपास बनी हुई है, जबकि लक्ष्य 25% का है — यह अंतर बताता है कि सिफारिशों और क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना ही असली परीक्षा है। बिना बाध्यकारी क्रियान्वयन ढाँचे के, यह रिपोर्ट प्रेरणादायक दस्तावेज़ बनकर रह सकती है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित भारत 2047 क्या है?
विकसित भारत 2047 भारत सरकार का वह दीर्घकालिक लक्ष्य है जिसके तहत देश को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना है। इसमें प्रति व्यक्ति आय, बुनियादी ढाँचा, तकनीकी क्षमता और सामाजिक समानता जैसे मानकों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की बात है।
KPMG की रिपोर्ट में 2047 के लक्ष्यों के लिए क्या सिफारिशें हैं?
केपीएमजी की रिपोर्ट में तीन प्रमुख सिद्धांत — तेजी, क्षमता और जवाबदेही — को अनिवार्य बताया गया है। इसके अलावा AI, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि प्रसंस्करण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में क्षमता निर्माण पर ज़ोर दिया गया है।
अग्रसर भारत मंच क्या है?
अग्रसर भारत मंच केपीएमजी इन इंडिया की सार्वजनिक क्षेत्र उत्कृष्टता (PSX) पहल है, जहाँ यह रिपोर्ट 23 अक्टूबर 2026 को जारी की गई। यह सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संवाद मंच के रूप में कार्य करता है।
नितिन गडकरी ने इस रिपोर्ट पर क्या कहा?
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 'अग्रसर भारत मंच' को देश की आकांक्षाओं और आगे बढ़ने के संकल्प को प्रदर्शित करने का प्रभावशाली विचार बताया। उन्होंने उद्योग, शिक्षा जगत और अन्य हितधारकों के बीच नवाचार और करीबी सहयोग पर जोर दिया।
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने में कौन-सी चुनौतियाँ हैं?
रिपोर्ट के अनुसार भू-राजनीतिक बदलाव, तकनीकी व्यवधान और नागरिकों की बदलती अपेक्षाएँ प्रमुख चुनौतियाँ हैं। साथ ही, बुनियादी ढाँचे में किए गए निवेश को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता में बदलने और सरकार, उद्योग व समाज के बीच समन्वय सुनिश्चित करना भी बड़ी ज़रूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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