ईडी ने निवेश धोखाधड़ी मामले में ₹1.66 करोड़ की जयपुर भूमि कुर्क की, शांति स्वरूप सतीजा पर PMLA शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली जोनल कार्यालय-II ने 22 अक्टूबर 2026 को शांति स्वरूप सतीजा और अन्य के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के अंतर्गत ₹1.66 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत अंजाम दी गई है, जो निवेशकों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक लंबे मामले में एक अहम कदम है।
कुर्की का विवरण और संपत्तियाँ
ईडी ने 21 अक्टूबर 2026 को जारी अनंतिम कुर्की आदेश (PAO) संख्या 24/2026 के तहत यह कार्रवाई की। कुर्क की गई संपत्तियाँ राजस्थान के जयपुर जिले की विराट नगर तहसील के धानी गैसकान गाँव में स्थित भूमि हैं। ये संपत्तियाँ श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक अनिल कुमार शर्मा के नाम पर दर्ज हैं।
जाँच में सामने आया कि अपराध से अर्जित ₹1.66 करोड़ की धनराशि श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अनिल कुमार शर्मा को हस्तांतरित की गई थी और उनके पास रखी गई थी। चूँकि मूल अपराध-राशि अन्यत्र खर्च हो चुकी थी, इसलिए उसके बराबर मूल्य की भूमि को कुर्क करने का निर्णय लिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि और कथित धोखाधड़ी
ईडी ने दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज 10 एफआईआर के आधार पर यह जाँच शुरू की थी। इन मामलों की पड़ताल दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत की थी।
जाँच के अनुसार, शांति स्वरूप सतीजा ने मेसर्स संपत्ति ट्रेडिंग एंड डेवलपर्स लिमिटेड और मेसर्स संपत्ति डेवलपर्स के माध्यम से निवेश योजनाओं तथा भूमि परियोजनाओं में निवेश के लिए लोगों को कथित तौर पर आकर्षित किया। निवेशकों को प्रतिमाह 2 से 3 प्रतिशत की दर से निश्चित रिटर्न देने का वादा किया गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब पोंज़ी और पिरामिड जैसी निवेश धोखाधड़ी के मामले देशभर में बढ़ रहे हैं, जिनमें छोटे और मध्यम निवेशक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
कैसे हुई ठगी और निवेशकों पर असर
ईडी के अनुसार, शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को वादे के अनुसार रिटर्न दिया गया, जिससे योजना में भरोसा बढ़ा। बाद में भुगतान बंद हो गया और अनेक निवेशक अपनी मूल निवेश राशि भी वापस नहीं पा सके। गौरतलब है कि ऐसी पोंज़ी-शैली की योजनाएँ अक्सर पहले के निवेशकों को नए निवेशकों के धन से भुगतान करती हैं, जब तक कि पूरी संरचना ध्वस्त न हो जाए।
जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि शांति स्वरूप सतीजा के नियंत्रण वाली संस्थाओं से धनराशि राजस्थान में भूमि खरीदने के लिए श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अनिल कुमार शर्मा को हस्तांतरित की गई थी, जो मनी लॉन्ड्रिंग की एक सुनियोजित कड़ी को दर्शाता है।
PMLA के तहत कुर्की का महत्त्व
PMLA, 2002 के तहत अनंतिम कुर्की का अर्थ है कि आरोपी व्यक्ति या संस्था इन संपत्तियों का उपयोग या हस्तांतरण तब तक नहीं कर सकती जब तक न्यायालय अन्यथा आदेश न दे। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि अपराध से जुड़ी संपत्तियाँ जाँच पूर्ण होने से पहले बिक या छुपाई न जा सकें।
ईडी ने स्पष्ट किया कि इस कुर्की का उद्देश्य PMLA, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत अपराध से अर्जित आय के मूल्य को सुरक्षित रखना है।
आगे की जाँच
ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुर्की की यह कार्रवाई आगे आरोप-पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया का आधार बन सकती है। मामले में और संपत्तियाँ जाँच के दायरे में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।