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ईडी ने निवेश धोखाधड़ी मामले में ₹1.66 करोड़ की जयपुर भूमि कुर्क की, शांति स्वरूप सतीजा पर PMLA शिकंजा

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ईडी ने निवेश धोखाधड़ी मामले में ₹1.66 करोड़ की जयपुर भूमि कुर्क की, शांति स्वरूप सतीजा पर PMLA शिकंजा

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने कथित निवेश धोखाधड़ी मामले में शांति स्वरूप सतीजा के खिलाफ PMLA के तहत राजस्थान के जयपुर जिले में ₹1.66 करोड़ की भूमि कुर्क की है। दिल्ली पुलिस की EOW द्वारा दर्ज 10 एफआईआर पर आधारित इस जाँच में निवेशकों को प्रतिमाह 2-3% रिटर्न का वादा कर ठगे जाने का आरोप है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 अक्टूबर 2026 को PAO संख्या 24/2026 के तहत ₹1.66 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियाँ कुर्क कीं।
कुर्क भूमि राजस्थान के जयपुर जिले , विराट नगर तहसील के धानी गैसकान गाँव में है — श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और निदेशक अनिल कुमार शर्मा के नाम पर।
मुख्य आरोपी शांति स्वरूप सतीजा पर निवेशकों को 2-3% प्रतिमाह रिटर्न का वादा कर कथित तौर पर धोखाधड़ी करने का आरोप है।
जाँच दिल्ली पुलिस EOW द्वारा दर्ज 10 एफआईआर और IPC धारा 420 व 120B पर आधारित है।
मामले में आगे की जाँच जारी है; और संपत्तियाँ जाँच के दायरे में आने की संभावना।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली जोनल कार्यालय-II ने 22 अक्टूबर 2026 को शांति स्वरूप सतीजा और अन्य के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के अंतर्गत ₹1.66 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत अंजाम दी गई है, जो निवेशकों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक लंबे मामले में एक अहम कदम है।

कुर्की का विवरण और संपत्तियाँ

ईडी ने 21 अक्टूबर 2026 को जारी अनंतिम कुर्की आदेश (PAO) संख्या 24/2026 के तहत यह कार्रवाई की। कुर्क की गई संपत्तियाँ राजस्थान के जयपुर जिले की विराट नगर तहसील के धानी गैसकान गाँव में स्थित भूमि हैं। ये संपत्तियाँ श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक अनिल कुमार शर्मा के नाम पर दर्ज हैं।

जाँच में सामने आया कि अपराध से अर्जित ₹1.66 करोड़ की धनराशि श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अनिल कुमार शर्मा को हस्तांतरित की गई थी और उनके पास रखी गई थी। चूँकि मूल अपराध-राशि अन्यत्र खर्च हो चुकी थी, इसलिए उसके बराबर मूल्य की भूमि को कुर्क करने का निर्णय लिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि और कथित धोखाधड़ी

ईडी ने दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज 10 एफआईआर के आधार पर यह जाँच शुरू की थी। इन मामलों की पड़ताल दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत की थी।

जाँच के अनुसार, शांति स्वरूप सतीजा ने मेसर्स संपत्ति ट्रेडिंग एंड डेवलपर्स लिमिटेड और मेसर्स संपत्ति डेवलपर्स के माध्यम से निवेश योजनाओं तथा भूमि परियोजनाओं में निवेश के लिए लोगों को कथित तौर पर आकर्षित किया। निवेशकों को प्रतिमाह 2 से 3 प्रतिशत की दर से निश्चित रिटर्न देने का वादा किया गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब पोंज़ी और पिरामिड जैसी निवेश धोखाधड़ी के मामले देशभर में बढ़ रहे हैं, जिनमें छोटे और मध्यम निवेशक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

कैसे हुई ठगी और निवेशकों पर असर

ईडी के अनुसार, शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को वादे के अनुसार रिटर्न दिया गया, जिससे योजना में भरोसा बढ़ा। बाद में भुगतान बंद हो गया और अनेक निवेशक अपनी मूल निवेश राशि भी वापस नहीं पा सके। गौरतलब है कि ऐसी पोंज़ी-शैली की योजनाएँ अक्सर पहले के निवेशकों को नए निवेशकों के धन से भुगतान करती हैं, जब तक कि पूरी संरचना ध्वस्त न हो जाए।

जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि शांति स्वरूप सतीजा के नियंत्रण वाली संस्थाओं से धनराशि राजस्थान में भूमि खरीदने के लिए श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अनिल कुमार शर्मा को हस्तांतरित की गई थी, जो मनी लॉन्ड्रिंग की एक सुनियोजित कड़ी को दर्शाता है।

PMLA के तहत कुर्की का महत्त्व

PMLA, 2002 के तहत अनंतिम कुर्की का अर्थ है कि आरोपी व्यक्ति या संस्था इन संपत्तियों का उपयोग या हस्तांतरण तब तक नहीं कर सकती जब तक न्यायालय अन्यथा आदेश न दे। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि अपराध से जुड़ी संपत्तियाँ जाँच पूर्ण होने से पहले बिक या छुपाई न जा सकें।

ईडी ने स्पष्ट किया कि इस कुर्की का उद्देश्य PMLA, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत अपराध से अर्जित आय के मूल्य को सुरक्षित रखना है।

आगे की जाँच

ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुर्की की यह कार्रवाई आगे आरोप-पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया का आधार बन सकती है। मामले में और संपत्तियाँ जाँच के दायरे में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला उस व्यापक पैटर्न को रेखांकित करता है जिसमें संगठित निवेश धोखाधड़ी रियल एस्टेट को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करती है। दिल्ली पुलिस EOW की 10 एफआईआर बताती हैं कि पीड़ितों की संख्या पर्याप्त रही होगी, फिर भी कुर्की में वर्षों की देरी यह सवाल उठाती है कि प्रभावित निवेशकों को वास्तव में कितनी राशि वापस मिलेगी। PMLA की 'बराबर मूल्य' कुर्की व्यवस्था कागज पर मजबूत है, लेकिन पीड़ितों को वसूली तभी मिलती है जब अदालती प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी हो — और यही वह परीक्षण है जिसमें अतीत में ऐसे मामले अक्सर विफल रहे हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने इस मामले में किसकी संपत्ति कुर्क की है?
ईडी ने राजस्थान के जयपुर जिले में श्री गणेशम बिल्ड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक अनिल कुमार शर्मा के नाम पर दर्ज ₹1.66 करोड़ मूल्य की भूमि कुर्क की है। यह संपत्तियाँ शांति स्वरूप सतीजा से जुड़ी कंपनियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से खरीदी गई बताई गई हैं।
शांति स्वरूप सतीजा पर क्या आरोप हैं?
शांति स्वरूप सतीजा पर आरोप है कि उन्होंने मेसर्स संपत्ति ट्रेडिंग एंड डेवलपर्स लिमिटेड और मेसर्स संपत्ति डेवलपर्स के जरिए निवेशकों को प्रतिमाह 2 से 3 प्रतिशत निश्चित रिटर्न का वादा कर कथित तौर पर ठगा। बाद में भुगतान बंद हो गया और निवेशकों की मूल राशि भी वापस नहीं की गई।
PMLA के तहत अनंतिम कुर्की का क्या मतलब है?
PMLA, 2002 के तहत अनंतिम कुर्की (Provisional Attachment) का अर्थ है कि संबंधित संपत्ति को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया जाता है और आरोपी उसे बेच, हस्तांतरित या उपयोग नहीं कर सकता। यह न्यायालय की अंतिम स्वीकृति के अधीन होता है और अपराध से अर्जित आय को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किया जाता है।
इस मामले की जाँच कैसे शुरू हुई?
ईडी ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज 10 एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग जाँच शुरू की। ये एफआईआर IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दर्ज थीं।
क्या इस मामले में और कार्रवाई होने की संभावना है?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार अतिरिक्त संपत्तियाँ भी जाँच के दायरे में आ सकती हैं और आरोप-पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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