3 नवंबर 2026
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ईडी की बड़ी कार्रवाई: मां तारिणी इंडस्ट्रीज मनी लॉन्ड्रिंग केस में ₹24.60 करोड़ की संपत्ति कुर्क

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: मां तारिणी इंडस्ट्रीज मनी लॉन्ड्रिंग केस में ₹24.60 करोड़ की संपत्ति कुर्क

सारांश

ईडी ने मां तारिणी इंडस्ट्रीज और पीईसी लिमिटेड के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जुड़े ₹56.89 करोड़ के एनपीए मामले में राउरकेला के प्लूटो प्लाजा मॉल की संपत्ति कुर्क की — यह मामला सरकारी उपक्रम में भ्रष्टाचार और शेयर खरीद में धन शोधन को एक साथ उजागर करता है।

मुख्य बातें

ईडी भुवनेश्वर ने 3 नवंबर 2026 को पीएमएलए के तहत ₹24.60 करोड़ की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की।
कुर्क संपत्ति राउरकेला के प्लूटो प्लाजा मॉल का हिस्सा है, जो हनुमान खेदारिया की कंपनी के नाम पर दर्ज है।
मां तारिणी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एमटीआईएल) पर आरोप है कि उसने सरकारी उपक्रम पीईसी लिमिटेड से धोखाधड़ी से ₹19.40 करोड़ की वित्तीय सहायता ली।
संबद्ध कंपनी तथागत एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने भी पीईसी लिमिटेड से ₹16 करोड़ लिए; ऋण एनपीए होने पर कुल बकाया ₹56.89 करोड़ था।
जांच में पाया गया कि धनराशि शेयर खरीद मूल्य के भुगतान में उपयोग की गई और बाद में नकद निकासी व निवेश में लगाई गई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने 3 नवंबर 2026 को मां तारिणी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एमटीआईएल) और अन्य संबंधित संस्थाओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹24.60 करोड़ की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है।

कौन-सी संपत्ति हुई कुर्क

जब्त की गई संपत्ति ओडिशा के राउरकेला के छेंड इलाके में स्थित प्लूटो प्लाजा मॉल का भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल का एक हिस्सा है। यह संपत्ति हनुमान खेदारिया द्वारा नियंत्रित कंपनी प्लूटो प्लाजा प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है। ईडी के अनुसार, इस संपत्ति का मूल्य अपराध की आय के समतुल्य माना गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की जांच सीबीआई और एसीबी भुवनेश्वर द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) पर आधारित है। ये एफआईआर एमटीआईएल, उसके निदेशकों और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन भारत सरकार के उपक्रम पीईसी लिमिटेड के अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज की गई थीं।

आरोप है कि एमटीआईएल ने पीईसी लिमिटेड के कुछ अधिकारियों से मिलीभगत कर अपनी वित्तीय स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और संपत्तियों पर मौजूदा प्रभारों को छिपाकर लौह अयस्क की खरीद के लिए ₹19.40 करोड़ की वित्तीय सहायता धोखाधड़ी से प्राप्त की। इसी तरह संबद्ध कंपनी तथागत एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (टीईपीएल) ने भी पीईसी लिमिटेड से ₹16 करोड़ की वित्तीय सहायता ली।

धन कहाँ और कैसे बहाया गया

जांचकर्ताओं ने पाया कि पीईसी लिमिटेड से प्राप्त धनराशि को एमटीआईएल और टीईपीएल के बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया और एमटीआईएल के पूर्व शेयरधारकों — जिनमें हनुमान खेदारिया भी शामिल थे — को शेयर खरीद मूल्य के भुगतान के लिए उपयोग में लाया गया। इसके बाद इन धनराशियों को विभिन्न बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया और नकद निकासी, निवेश तथा व्यावसायिक खर्चों में लगाया गया।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि हनुमान खेदारिया और उनकी सहयोगी संस्थाओं को कुल मिलाकर लगभग ₹15.31 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई, जिसमें आनुपातिक ब्याज जोड़ने पर यह राशि ₹24.60 करोड़ हो गई। जब ऋण एनपीए (NPA) घोषित हुआ, उस समय पीईसी लिमिटेड पर ब्याज सहित कुल बकाया राशि लगभग ₹56.89 करोड़ थी।

ईडी का आधिकारिक बयान

ईडी ने अपने बयान में कहा, 'पीएमएलए, 2002 के तहत अपराध की आय के समतुल्य मूल्य के रूप में प्लूटो प्लाजा प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित ₹24.60 करोड़ की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया है।' यह अस्थायी कुर्की पीएमएलए की धारा 5 के अंतर्गत की गई है, और आगे की कार्रवाई सक्षम न्यायाधिकरण के समक्ष होगी।

आगे क्या होगा

इस कुर्की के बाद ईडी का मामला सक्षम न्यायाधिकरण के समक्ष पुष्टि के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। गौरतलब है कि यह मामला सरकारी उपक्रम पीईसी लिमिटेड के अधिकारियों की संलिप्तता के कारण और अधिक संवेदनशील है। जांच का दायरा आगे बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि धन के प्रवाह की श्रृंखला अभी पूरी तरह उजागर होनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इसमें करदाताओं का पैसा सीधे जोखिम में था। ₹56.89 करोड़ के एनपीए के बावजूद कार्रवाई में आई देरी यह सवाल उठाती है कि सरकारी वित्तीय संस्थाओं में आंतरिक निगरानी तंत्र कितना प्रभावी है। राउरकेला के एक व्यावसायिक मॉल में धन लगाकर अपराध की आय को 'वैध' दिखाने की कोशिश यह दर्शाती है कि मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके तेज़ी से जटिल हो रहे हैं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने ओडिशा में यह कार्रवाई किस मामले में की?
यह कार्रवाई मां तारिणी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एमटीआईएल) और अन्य से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई, जिसमें सरकारी उपक्रम पीईसी लिमिटेड से धोखाधड़ी से ऋण लेकर उसे शेयर खरीद और अन्य उद्देश्यों में लगाने का आरोप है। ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत ₹24.60 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है।
कुर्क की गई संपत्ति कौन-सी है और किसके नाम पर है?
कुर्क की गई संपत्ति ओडिशा के राउरकेला के छेंड इलाके में स्थित प्लूटो प्लाजा मॉल का भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल का एक हिस्सा है। यह संपत्ति हनुमान खेदारिया द्वारा नियंत्रित कंपनी प्लूटो प्लाजा प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है।
पीईसी लिमिटेड इस मामले में कैसे जुड़ा है?
पीईसी लिमिटेड वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन भारत सरकार का एक उपक्रम है। आरोप है कि इसके कुछ अधिकारियों ने एमटीआईएल के साथ मिलीभगत कर उसे लौह अयस्क खरीद के लिए ₹19.40 करोड़ की वित्तीय सहायता दिलाई, जबकि कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति और संपत्तियों पर प्रभारों को छिपाया गया।
इस मामले में धन का उपयोग कैसे किया गया?
जांच के अनुसार, पीईसी लिमिटेड से प्राप्त धनराशि एमटीआईएल और तथागत एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों से होकर गुज़री और एमटीआईएल के पूर्व शेयरधारकों को शेयर खरीद मूल्य चुकाने में इस्तेमाल की गई। इसके बाद धन को नकद निकासी, निवेश और व्यावसायिक खर्चों में लगाया गया।
आगे इस मामले में क्या होगा?
पीएमएलए के तहत अस्थायी कुर्की के बाद ईडी को यह मामला सक्षम न्यायाधिकरण के समक्ष पुष्टि के लिए प्रस्तुत करना होगा। मामले में सीबीआई और एसीबी की एफआईआर पहले से दर्ज हैं, इसलिए आपराधिक मुकदमा समानांतर चलता रहेगा और जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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