4 नवंबर 2026
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फ्रांस फिर बना इंटरनेशनल सोलर अलायंस का सह-अध्यक्ष, 2027-2029 कार्यकाल में भारत-फ्रांस सौर साझेदारी को मिलेगी नई ऊर्जा

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फ्रांस फिर बना इंटरनेशनल सोलर अलायंस का सह-अध्यक्ष, 2027-2029 कार्यकाल में भारत-फ्रांस सौर साझेदारी को मिलेगी नई ऊर्जा

सारांश

नई दिल्ली में ISA की नौवीं महासभा में फ्रांस ने बुर्किना फासो को हराकर 2027-2029 का सह-अध्यक्ष पद हासिल किया। COP-31 से ठीक पहले आया यह फैसला भारत-फ्रांस सौर और जलवायु साझेदारी को नई ऊँचाई देने का संकेत है।

मुख्य बातें

फ्रांस को ISA की नौवीं महासभा में 2027-2029 के लिए सह-अध्यक्ष पुनः चुना गया; महासभा 2-5 नवंबर 2026 , नई दिल्ली में हुई।
फ्रांस ने बुर्किना फासो को पराजित कर यह पद जीता।
फ्रांस के मंत्री मैथ्यू लेफेव्र ने 2026 के लिए 50,000 यूरो के स्वैच्छिक योगदान की घोषणा की; स्टार-C कार्यक्रम में 2021 से अब तक 12.5 लाख यूरो का योगदान।
यह निर्णय तुर्की के अंताल्या में 9-20 नवंबर 2026 को होने वाले COP-31 से ठीक पहले आया।
फरवरी 2026 में राष्ट्रपति मैक्रों की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत हुए।
ISA की स्थापना 2015 में भारत और फ्रांस ने मिलकर की थी।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) की नौवीं महासभा में 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में फ्रांस को एक बार फिर संगठन का सह-अध्यक्ष चुना गया, जिससे भारत-फ्रांस सौर ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। 2 से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित इस महासभा में फ्रांस ने बुर्किना फासो को पराजित कर 2027 से 2029 तक के दो वर्षीय कार्यकाल के लिए यह पद हासिल किया। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब तुर्की के अंताल्या में 9 से 20 नवंबर 2026 के बीच COP-31 सम्मेलन होने वाला है।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस की पृष्ठभूमि

ISA की स्थापना 2015 में भारत और फ्रांस ने संयुक्त रूप से की थी। यह संगठन दुनिया भर में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और सदस्य देशों के बीच तकनीकी व वित्तीय सहयोग सुनिश्चित करने के लिए काम करता है। गौरतलब है कि यह पहल पेरिस जलवायु समझौते के तहत शुरू की गई थी और अब तक इसे भारत-फ्रांस ऊर्जा कूटनीति की सबसे ठोस उपलब्धियों में गिना जाता है।

फ्रांस की प्रमुख प्रतिबद्धताएँ

फ्रांस के पारिस्थितिक परिवर्तन राज्य मंत्री मैथ्यू लेफेव्र, जो वर्तमान ISA सह-अध्यक्ष हैं, ने महासभा के दौरान 2026 के लिए 50,000 यूरो के स्वैच्छिक योगदान की घोषणा की। उन्होंने ISA के लिए फ्रांस की प्रमुख प्राथमिकताएँ भी रेखांकित कीं।

इनमें स्टार-C कार्यक्रम के ज़रिए विकासशील देशों में क्षमता निर्माण शामिल है — फ्रांस 2021 से अब तक इस कार्यक्रम में 12.5 लाख यूरो का योगदान दे चुका है। इसके अलावा अफ्रीका सोलर फैसिलिटी जैसी पहलों के माध्यम से वित्तीय सहायता की उपलब्धता बढ़ाना — जिसके लिए फ्रांस ने 2025 में 1.5 लाख यूरो दिए — भी प्राथमिकता सूची में है। ISA का अंतरराष्ट्रीय विस्तार और ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना भी फ्रांस के एजेंडे का हिस्सा है।

भारत-फ्रांस द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी

ISA में फ्रांस की पुनः वापसी भारत-फ्रांस के गहरे होते रणनीतिक संबंधों की पृष्ठभूमि में आई है। फरवरी 2026 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था। 2018 में हुए नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग समझौते को 2025 में नवीनीकृत किया गया, जिसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी परिवहन, ग्रीन फाइनेंस और जैव विविधता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएँ चल रही हैं।

इन परियोजनाओं का संचालन फ्रांसीसी विकास एजेंसी एजेंस फ्रांसेज डे डेवलपमेंट (AFD) के ज़रिए हो रहा है। फ्रांसीसी कंपनियाँ भारत में ऊर्जा, परिवहन, सर्कुलर इकोनॉमी और जल शोधन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं, और इनका योगदान संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-7 तथा पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों की पूर्ति में महत्वपूर्ण माना जाता है।

होराइजन 2047 और CDRI में सहयोग

ISA के अतिरिक्त, फ्रांस कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) में भी भारत का साझेदार रहा है। 2024 से इस वर्ष तक फ्रांस और भारत ने मिलकर CDRI की सह-अध्यक्षता की। इसी वर्ष CDRI और AFD के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी हस्ताक्षरित हुआ, जिससे आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे और जलवायु अनुकूल विकास के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएँ खुली हैं।

यह सहयोग 'होराइजन 2047 रोडमैप' के 'पार्टनरशिप फॉर द प्लैनेट' स्तंभ को भी मज़बूती देता है, जिसकी घोषणा 2023 में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने पर की गई थी। COP-31 से ठीक पहले फ्रांस की इस पुनर्निर्वाचन की घटना जलवायु राजनीति में दोनों देशों की बढ़ती साझा भूमिका को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जलवायु कूटनीति में भारत-फ्रांस धुरी के बढ़ते प्रभाव का संकेत है। दिलचस्प यह है कि ISA की स्थापना के एक दशक बाद भी वैश्विक दक्षिण के देशों में सौर वित्त की पहुँच सीमित बनी हुई है — स्टार-C और अफ्रीका सोलर फैसिलिटी जैसे कार्यक्रमों की घोषणाएँ प्रभावशाली हैं, परंतु उनका ज़मीनी असर जाँचा जाना बाकी है। होराइजन 2047 रोडमैप और CDRI सह-अध्यक्षता के साथ यह साझेदारी कागज़ पर व्यापक है; असली कसौटी यह होगी कि COP-31 की बातचीत में दोनों देश विकासशील देशों के लिए ठोस वित्त पोषण प्रतिबद्धताएँ दिलवा पाते हैं या नहीं।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
ISA एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसे भारत और फ्रांस ने मिलकर 2015 में स्थापित किया था। इसका उद्देश्य दुनिया भर में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और सदस्य देशों के बीच तकनीकी व वित्तीय सहयोग सुनिश्चित करना है।
फ्रांस को ISA का सह-अध्यक्ष कब और कैसे चुना गया?
2 से 5 नवंबर 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित ISA की नौवीं महासभा में फ्रांस ने बुर्किना फासो को पराजित कर 2027-2029 के लिए सह-अध्यक्ष पद जीता। यह फ्रांस का ISA सह-अध्यक्ष के रूप में पुनर्निर्वाचन है।
फ्रांस ने ISA के लिए क्या वित्तीय प्रतिबद्धताएँ जताई हैं?
फ्रांस के मंत्री मैथ्यू लेफेव्र ने 2026 के लिए 50,000 यूरो के स्वैच्छिक योगदान की घोषणा की। इसके अलावा फ्रांस 2021 से स्टार-C कार्यक्रम में 12.5 लाख यूरो और 2025 में अफ्रीका सोलर फैसिलिटी के लिए 1.5 लाख यूरो दे चुका है।
भारत और फ्रांस के बीच ऊर्जा सहयोग कितना गहरा है?
2018 में हुए नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग समझौते को 2025 में नवीनीकृत किया गया। फरवरी 2026 में राष्ट्रपति मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया, जिसमें ऊर्जा, ग्रीन फाइनेंस और जलवायु सहयोग शामिल हैं।
COP-31 से पहले फ्रांस के ISA सह-अध्यक्ष बनने का क्या महत्व है?
COP-31 9 से 20 नवंबर 2026 तक तुर्की के अंताल्या में होने वाला है। इससे ठीक पहले फ्रांस का ISA नेतृत्व संभालना जलवायु वार्ताओं में भारत-फ्रांस के समन्वित रुख को मज़बूती देता है और वैश्विक सौर ऊर्जा एजेंडे को COP मंच पर प्रभावशाली ढंग से पेश करने का अवसर प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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