फ्रांस फिर बना इंटरनेशनल सोलर अलायंस का सह-अध्यक्ष, 2027-2029 कार्यकाल में भारत-फ्रांस सौर साझेदारी को मिलेगी नई ऊर्जा
सारांश
मुख्य बातें
इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) की नौवीं महासभा में 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में फ्रांस को एक बार फिर संगठन का सह-अध्यक्ष चुना गया, जिससे भारत-फ्रांस सौर ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। 2 से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित इस महासभा में फ्रांस ने बुर्किना फासो को पराजित कर 2027 से 2029 तक के दो वर्षीय कार्यकाल के लिए यह पद हासिल किया। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब तुर्की के अंताल्या में 9 से 20 नवंबर 2026 के बीच COP-31 सम्मेलन होने वाला है।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस की पृष्ठभूमि
ISA की स्थापना 2015 में भारत और फ्रांस ने संयुक्त रूप से की थी। यह संगठन दुनिया भर में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और सदस्य देशों के बीच तकनीकी व वित्तीय सहयोग सुनिश्चित करने के लिए काम करता है। गौरतलब है कि यह पहल पेरिस जलवायु समझौते के तहत शुरू की गई थी और अब तक इसे भारत-फ्रांस ऊर्जा कूटनीति की सबसे ठोस उपलब्धियों में गिना जाता है।
फ्रांस की प्रमुख प्रतिबद्धताएँ
फ्रांस के पारिस्थितिक परिवर्तन राज्य मंत्री मैथ्यू लेफेव्र, जो वर्तमान ISA सह-अध्यक्ष हैं, ने महासभा के दौरान 2026 के लिए 50,000 यूरो के स्वैच्छिक योगदान की घोषणा की। उन्होंने ISA के लिए फ्रांस की प्रमुख प्राथमिकताएँ भी रेखांकित कीं।
इनमें स्टार-C कार्यक्रम के ज़रिए विकासशील देशों में क्षमता निर्माण शामिल है — फ्रांस 2021 से अब तक इस कार्यक्रम में 12.5 लाख यूरो का योगदान दे चुका है। इसके अलावा अफ्रीका सोलर फैसिलिटी जैसी पहलों के माध्यम से वित्तीय सहायता की उपलब्धता बढ़ाना — जिसके लिए फ्रांस ने 2025 में 1.5 लाख यूरो दिए — भी प्राथमिकता सूची में है। ISA का अंतरराष्ट्रीय विस्तार और ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना भी फ्रांस के एजेंडे का हिस्सा है।
भारत-फ्रांस द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी
ISA में फ्रांस की पुनः वापसी भारत-फ्रांस के गहरे होते रणनीतिक संबंधों की पृष्ठभूमि में आई है। फरवरी 2026 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था। 2018 में हुए नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग समझौते को 2025 में नवीनीकृत किया गया, जिसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी परिवहन, ग्रीन फाइनेंस और जैव विविधता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएँ चल रही हैं।
इन परियोजनाओं का संचालन फ्रांसीसी विकास एजेंसी एजेंस फ्रांसेज डे डेवलपमेंट (AFD) के ज़रिए हो रहा है। फ्रांसीसी कंपनियाँ भारत में ऊर्जा, परिवहन, सर्कुलर इकोनॉमी और जल शोधन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं, और इनका योगदान संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-7 तथा पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों की पूर्ति में महत्वपूर्ण माना जाता है।
होराइजन 2047 और CDRI में सहयोग
ISA के अतिरिक्त, फ्रांस कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) में भी भारत का साझेदार रहा है। 2024 से इस वर्ष तक फ्रांस और भारत ने मिलकर CDRI की सह-अध्यक्षता की। इसी वर्ष CDRI और AFD के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी हस्ताक्षरित हुआ, जिससे आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे और जलवायु अनुकूल विकास के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएँ खुली हैं।
यह सहयोग 'होराइजन 2047 रोडमैप' के 'पार्टनरशिप फॉर द प्लैनेट' स्तंभ को भी मज़बूती देता है, जिसकी घोषणा 2023 में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने पर की गई थी। COP-31 से ठीक पहले फ्रांस की इस पुनर्निर्वाचन की घटना जलवायु राजनीति में दोनों देशों की बढ़ती साझा भूमिका को रेखांकित करती है।