ईडी ने PACL मनी लॉन्ड्रिंग मामले में IITL के ₹42.13 करोड़ के शेयर किए अस्थायी जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19 सितंबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत एनएन फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के पास मौजूद इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट लिमिटेड (आईआईटीएल) के 29.46 लाख इक्विटी शेयर अस्थायी रूप से जब्त कर लिए हैं। 18 सितंबर 2026 को इन शेयरों का बाजार मूल्य ₹42.13 करोड़ था, जबकि इन्हें मूल रूप से ₹30.90 करोड़ में खरीदा गया था। यह कार्रवाई पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों द्वारा संचालित कथित अवैध सामूहिक निवेश योजना से जुड़े बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
जांच एजेंसियों के अनुसार, पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास का झांसा देकर पूरे भारत में लाखों निवेशकों से कथित तौर पर ₹48,000 करोड़ से अधिक की धनराशि एकत्र की। निवेशकों को नकद अग्रिम भुगतान और किश्त-आधारित योजनाओं के जरिए लुभाया गया तथा उनसे एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य कथित फर्जी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। अधिकतर मामलों में वादा की गई जमीन कभी नहीं दी गई, जिससे निवेशकों को लगभग ₹48,000 करोड़ का नुकसान हुआ।
सीबीआई एफआईआर और आरोप पत्र
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज की, जिसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। इस मामले में सीबीआई ने अवैध निवेश योजना चलाने में कथित भूमिका के लिए 33 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र दाखिल किए हैं।
ईडी की जांच और कार्रवाई का क्रम
ईडी ने 2016 में इस मामले में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की और 2018 में पहली अभियोजन शिकायत दाखिल की। इसके बाद 2022, 2025 और 2026 में मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल विभिन्न आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ छह पूरक अभियोजन शिकायतें दर्ज की गईं। जांच से पता चला कि आईआईटीएल के इक्विटी शेयरों की खरीद के लिए पीएसीएल से डायवर्ट किए गए फंड का उपयोग किया गया था, जो मूल रूप से निवेशकों से जुटाया गया धन था और इसे अपराध की आय माना जा रहा है।
अब तक की कुल कुर्की
हालिया कार्रवाई के साथ ईडी ने इस मामले में अब तक भारत और विदेश में स्थित चल-अचल संपत्तियों सहित कुल ₹29,667.76 करोड़ से अधिक की संपत्तियाँ कुर्क की हैं। यह आँकड़ा इस मामले की व्यापकता और वित्तीय पैमाने को दर्शाता है।
आगे की दिशा
गौरतलब है कि यह मामला देश की सबसे बड़ी सामूहिक निवेश धोखाधड़ी में से एक माना जाता है, जिसमें लाखों आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई फंसी हुई है। जांच एजेंसियाँ अपराध की आय की पहचान और उसे वापस दिलाने की प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं। ईडी की आगामी अभियोजन कार्रवाई और संपत्ति वसूली की गति पर निवेशकों और विधि विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हैं।