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पीएसीएल घोटाला: ईडी ने ₹9,420 करोड़ की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपीं, निवेशकों को मिलेगा पैसा

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पीएसीएल घोटाला: ईडी ने ₹9,420 करोड़ की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपीं, निवेशकों को मिलेगा पैसा

सारांश

पीएसीएल घोटाले में ईडी ने ₹9,420.57 करोड़ की 282 संपत्तियां जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंप दी हैं — यह उस ₹48,000 करोड़ की लूट के पीड़ितों के लिए अब तक का सबसे बड़ा राहत कदम है। कुल कुर्क संपत्ति ₹28,626 करोड़ पर पहुंच गई है, लेकिन पूर्ण भरपाई की राह अभी लंबी है।

मुख्य बातें

ईडी ने ₹9,420.57 करोड़ मूल्य की 282 अचल संपत्तियां जस्टिस आर.एम.
लोढ़ा समिति को सौंपीं।
पीएसीएल मामले में अब तक कुल कुर्क संपत्तियों का मूल्य ₹28,626 करोड़ हो गया है।
चालू वित्त वर्ष में ₹1,595.85 करोड़ की संपत्तियां नई कुर्की में शामिल हैं।
कुर्क संपत्तियां पीएसीएल लिमिटेड , दिवंगत निर्मल सिंह भंगू के परिवार और सहयोगियों के नाम पर थीं; इनमें ऑस्ट्रेलिया स्थित संपत्तियां भी शामिल।
आरोप है कि लगभग ₹48,000 करोड़ की राशि अब भी निवेशकों को वापस नहीं मिल सकी है।
ईडी ने 26 जुलाई 2016 को मनी लॉन्ड्रिंग मामला दर्ज किया था; 10 सितंबर 2018 को विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की गई थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) घोटाले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹9,420.57 करोड़ के मौजूदा बाजार मूल्य वाली 282 अचल संपत्तियों की बहाली (रेस्टिट्यूशन) जस्टिस आर.एम. लोढ़ा समिति को सुनिश्चित कराई है। धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत विशेष अदालत के आदेश के बाद उठाया गया यह कदम लाखों ठगे गए निवेशकों को उनकी फंसी हुई रकम वापस दिलाने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक ₹1,595.85 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। इसके साथ ही पीएसीएल मामले में कुल कुर्क संपत्तियों का संचयी मूल्य बढ़कर ₹28,626 करोड़ हो गया है। उल्लेखनीय है कि इन संपत्तियों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं, जो घोटाले के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाता है।

जांच एजेंसी ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियां पीएसीएल लिमिटेड, उससे संबद्ध कंपनियों तथा दिवंगत निर्मल सिंह भंगू के परिवार और सहयोगियों के नाम पर दर्ज थीं। इनमें उनकी पत्नी प्रेम कौर, बेटियां बरिंदर कौर और सुखविंदर कौर तथा दामाद हरसतिंदर पाल सिंह हेयर और गुरप्रताप सिंह के नाम शामिल हैं।

घोटाले की पृष्ठभूमि

ईडी ने बताया कि पीएसीएल ने निवेशकों को भूमि आवंटन और निवेश पर आकर्षक लाभ का झांसा देकर नकद भुगतान और किस्तों के जरिए धन जुटाया। कई मामलों में जमीन का वास्तविक स्वामित्व न होने के बावजूद आवंटन पत्र और दस्तावेज जारी किए गए। आरोप है कि लगभग ₹48,000 करोड़ की राशि अब भी निवेशकों को वापस नहीं मिल सकी है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छोटे निवेशकों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामलों में न्याय की प्रतीक्षा दशकों तक खिंचती रही है। गौरतलब है कि ईडी ने 26 जुलाई 2016 को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि अपराध से अर्जित धन को विभिन्न कंपनियों और सहयोगियों के जरिए कई स्तरों पर घुमाकर भारत और विदेशों में अचल संपत्तियां खरीदी गईं।

सुप्रीम कोर्ट और जस्टिस लोढ़ा समिति की भूमिका

सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2016 में सुनवाई के दौरान भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने पीएसीएल की जमीन और अन्य संपत्तियों को बेचकर प्राप्त धन निवेशकों को लौटाने का आदेश भी दिया था, जिसके बाद जस्टिस लोढ़ा समिति अस्तित्व में आई।

ईडी ने 10 सितंबर 2018 को विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी, जिस पर अदालत संज्ञान ले चुकी है। एजेंसी ने मामले में कई आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की है।

निवेशकों पर असर

ईडी के अनुसार, ₹9,420.57 करोड़ मूल्य की 282 संपत्तियों की बहाली लाखों ठगे गए निवेशकों को उनकी रकम वापस दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब जस्टिस लोढ़ा समिति इन संपत्तियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत बेचकर निवेशकों के बीच धनराशि वितरित कर सकेगी। हालांकि, कथित तौर पर ₹48,000 करोड़ की बकाया देनदारी को देखते हुए पूर्ण भरपाई की राह अभी भी लंबी है।

आगे की राह

संपत्तियों के हस्तांतरण के बाद अब जस्टिस लोढ़ा समिति द्वारा इनकी बिक्री और निवेशकों को भुगतान की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। ईडी की जांच अभी भी जारी है और एजेंसी के अनुसार अतिरिक्त संपत्तियों की पहचान और कुर्की का काम भी चल रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

420 करोड़ की यह बहाली निस्संदेह एक प्रशासनिक उपलब्धि है, लेकिन ₹48,000 करोड़ की कुल देनदारी के सामने यह राशि महज एक-पाँचवें हिस्से से भी कम है। असली सवाल यह है कि जस्टिस लोढ़ा समिति को मिली इन संपत्तियों की बिक्री और वितरण की प्रक्रिया कितनी तेज और पारदर्शी होगी — क्योंकि अतीत में ऐसे मामलों में कानूनी अड़चनें वर्षों तक राहत को लटकाती रही हैं। घोटाले की शुरुआत से अब तक एक दशक से अधिक बीत चुका है, और लाखों छोटे निवेशक — जिनमें से अनेक ग्रामीण और अर्ध-शहरी पृष्ठभूमि से हैं — अभी भी न्याय की प्रतीक्षा में हैं। यह मामला नियामकीय निगरानी की उन खामियों की भी याद दिलाता है जिनके चलते पीएसीएल जैसी कंपनियां लंबे समय तक बिना रोक-टोक के काम करती रहीं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएसीएल घोटाला क्या है और इसमें कितने निवेशक प्रभावित हुए?
पीएसीएल (पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड) घोटाला एक बड़े पैमाने पर हुई निवेश धोखाधड़ी है, जिसमें निवेशकों को भूमि आवंटन और आकर्षक रिटर्न का झांसा देकर धन जुटाया गया। आरोप है कि लगभग ₹48,000 करोड़ की राशि अब भी लाखों निवेशकों को वापस नहीं मिल सकी है।
जस्टिस लोढ़ा समिति का गठन क्यों और कब हुआ?
सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2016 में सेबी को पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था। इस समिति का उद्देश्य पीएसीएल की संपत्तियां बेचकर प्राप्त धन निवेशकों को लौटाना है।
ईडी ने पीएसीएल मामले में अब तक कुल कितनी संपत्तियां कुर्क की हैं?
ईडी के अनुसार पीएसीएल मामले में अब तक कुल कुर्क संपत्तियों का मूल्य ₹28,626 करोड़ हो गया है। इनमें भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं।
निवेशकों को पैसा कब और कैसे वापस मिलेगा?
जस्टिस लोढ़ा समिति को सौंपी गई संपत्तियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत बेचकर निवेशकों के बीच धनराशि वितरित की जाएगी। हालांकि, ₹48,000 करोड़ की कुल देनदारी की तुलना में अब तक बहाल ₹9,420.57 करोड़ की राशि को देखते हुए पूर्ण भरपाई की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
पीएसीएल मामले में ईडी की जांच कब शुरू हुई और अब तक क्या कार्रवाई हुई?
ईडी ने 26 जुलाई 2016 को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। 10 सितंबर 2018 को विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की गई, जिस पर अदालत संज्ञान ले चुकी है; कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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