तुम्मदिहट्टी बांध: तेलंगाना-महाराष्ट्र के बीच बातचीत जारी, रेवंत रेड्डी ने दिए अहम निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना सरकार ने 3 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि वह प्राणहिता नदी पर प्रस्तावित तुम्मदिहट्टी बांध के निर्माण को लेकर महाराष्ट्र के साथ संवाद की प्रक्रिया जारी रखेगी। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र के साथ सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखने और सभी तकनीकी दस्तावेजों का समुचित आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर प्रस्तावित 152 मीटर ऊंचे तुम्मदिहट्टी बांध की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में महाराष्ट्र के साथ हाल में हुई चर्चाओं के आधार पर आगे की रणनीति तय की गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलमग्न होने वाले संभावित क्षेत्रों का विस्तृत विवरण तैयार रखा जाए और मौजूदा समझौतों सहित सभी प्रासंगिक दस्तावेज महाराष्ट्र सरकार के साथ साझा किए जाएं। महाराष्ट्र द्वारा माँगी गई किसी भी जानकारी को समय पर उपलब्ध कराने के भी निर्देश जारी किए गए।
मुआवज़े और सर्वेक्षण पर तेलंगाना की स्थिति
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना सरकार महाराष्ट्र में बांध के कारण जलमग्न होने वाली किसी भी भूमि के लिए पर्याप्त मुआवज़ा देने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य दोनों सरकारों के संयुक्त खाते में धनराशि जमा करने के लिए तैयार है।
इसके अलावा, रेवंत रेड्डी ने कहा कि महाराष्ट्र द्वारा संभावित जलमग्नता का स्वतंत्र सर्वेक्षण कराए जाने पर तेलंगाना को कोई आपत्ति नहीं होगी — जो दोनों राज्यों के बीच विश्वास निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
फडणवीस से मुलाकात और संयुक्त समिति का प्रस्ताव
गौरतलब है कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना के एक प्रतिनिधिमंडल ने 26 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। फडणवीस ने तेलंगाना के अनुरोध पर पुनर्विचार करने की इच्छा व्यक्त की, हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय से पहले तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ पूरी करनी होंगी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने दोनों राज्यों के सिंचाई विभागों के प्रधान सचिवों की अध्यक्षता में एक संयुक्त अधिकारी समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा था। यह समिति बांध की ऊँचाई, जल उपलब्धता, जलमग्नता के प्रभाव, प्रभावित कृषि भूमि, मुआवज़े की ज़रूरतें और अन्य तकनीकी पहलुओं की जाँच करेगी।
आगे की राह
दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी है कि अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर आगे की चर्चाओं के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा और कार्ययोजना तैयार करेंगे। यह प्रक्रिया ऐसे समय में आई है जब दोनों राज्यों के बीच अंतरराज्यीय जल विवाद लंबे समय से लंबित है और इस बांध का निर्माण तेलंगाना की सिंचाई ज़रूरतों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त समिति के गठन और पारदर्शी दस्तावेज़ीकरण से दोनों राज्यों के बीच दशकों पुराने इस विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ी है। आने वाले हफ्तों में समिति की पहली बैठक पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।