3 नवंबर 2026
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तुम्मदिहट्टी बांध: तेलंगाना-महाराष्ट्र के बीच बातचीत जारी, रेवंत रेड्डी ने दिए अहम निर्देश

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तुम्मदिहट्टी बांध: तेलंगाना-महाराष्ट्र के बीच बातचीत जारी, रेवंत रेड्डी ने दिए अहम निर्देश

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तुम्मदिहट्टी बांध पर महाराष्ट्र के साथ संवाद जारी रखने का आदेश दिया। 26 अक्टूबर को फडणवीस से मुलाकात के बाद अब संयुक्त अधिकारी समिति और मुआवज़े की पेशकश — यह अंतरराज्यीय जल विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

तेलंगाना सरकार ने 3 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र के साथ तुम्मदिहट्टी बांध पर बातचीत जारी रखने की पुष्टि की।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र में जलमग्न भूमि के लिए पर्याप्त मुआवज़ा और संयुक्त खाते में धनराशि जमा करने की पेशकश की।
तेलंगाना ने महाराष्ट्र द्वारा जलमग्नता का स्वतंत्र सर्वेक्षण कराने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
26 अक्टूबर 2026 को देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद संयुक्त अधिकारी समिति गठन का प्रस्ताव रखा गया था।
प्रस्तावित बांध की ऊँचाई 152 मीटर है और यह तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर प्राणहिता नदी पर बनेगा।

तेलंगाना सरकार ने 3 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि वह प्राणहिता नदी पर प्रस्तावित तुम्मदिहट्टी बांध के निर्माण को लेकर महाराष्ट्र के साथ संवाद की प्रक्रिया जारी रखेगी। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र के साथ सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखने और सभी तकनीकी दस्तावेजों का समुचित आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में क्या हुआ

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर प्रस्तावित 152 मीटर ऊंचे तुम्मदिहट्टी बांध की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में महाराष्ट्र के साथ हाल में हुई चर्चाओं के आधार पर आगे की रणनीति तय की गई।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलमग्न होने वाले संभावित क्षेत्रों का विस्तृत विवरण तैयार रखा जाए और मौजूदा समझौतों सहित सभी प्रासंगिक दस्तावेज महाराष्ट्र सरकार के साथ साझा किए जाएं। महाराष्ट्र द्वारा माँगी गई किसी भी जानकारी को समय पर उपलब्ध कराने के भी निर्देश जारी किए गए।

मुआवज़े और सर्वेक्षण पर तेलंगाना की स्थिति

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना सरकार महाराष्ट्र में बांध के कारण जलमग्न होने वाली किसी भी भूमि के लिए पर्याप्त मुआवज़ा देने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य दोनों सरकारों के संयुक्त खाते में धनराशि जमा करने के लिए तैयार है।

इसके अलावा, रेवंत रेड्डी ने कहा कि महाराष्ट्र द्वारा संभावित जलमग्नता का स्वतंत्र सर्वेक्षण कराए जाने पर तेलंगाना को कोई आपत्ति नहीं होगी — जो दोनों राज्यों के बीच विश्वास निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

फडणवीस से मुलाकात और संयुक्त समिति का प्रस्ताव

गौरतलब है कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना के एक प्रतिनिधिमंडल ने 26 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। फडणवीस ने तेलंगाना के अनुरोध पर पुनर्विचार करने की इच्छा व्यक्त की, हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय से पहले तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ पूरी करनी होंगी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने दोनों राज्यों के सिंचाई विभागों के प्रधान सचिवों की अध्यक्षता में एक संयुक्त अधिकारी समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा था। यह समिति बांध की ऊँचाई, जल उपलब्धता, जलमग्नता के प्रभाव, प्रभावित कृषि भूमि, मुआवज़े की ज़रूरतें और अन्य तकनीकी पहलुओं की जाँच करेगी।

आगे की राह

दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी है कि अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर आगे की चर्चाओं के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा और कार्ययोजना तैयार करेंगे। यह प्रक्रिया ऐसे समय में आई है जब दोनों राज्यों के बीच अंतरराज्यीय जल विवाद लंबे समय से लंबित है और इस बांध का निर्माण तेलंगाना की सिंचाई ज़रूरतों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त समिति के गठन और पारदर्शी दस्तावेज़ीकरण से दोनों राज्यों के बीच दशकों पुराने इस विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ी है। आने वाले हफ्तों में समिति की पहली बैठक पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दो पड़ोसी राज्यों के बीच जल संसाधनों पर दशकों पुरानी राजनीतिक जटिलता का प्रतिबिंब है। रेवंत रेड्डी का मुआवज़े और संयुक्त सर्वेक्षण की पेशकश करना कूटनीतिक परिपक्वता दिखाता है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब संयुक्त समिति की समय-सीमा और कार्ययोजना सार्वजनिक होगी। यह ध्यान देने योग्य है कि अंतरराज्यीय जल विवादों में संयुक्त समितियाँ अक्सर लंबे समय तक बिना किसी ठोस नतीजे के चलती रहती हैं। फडणवीस की 'सकारात्मक प्रतिक्रिया' तकनीकी और पर्यावरणीय शर्तों के साथ आई है — जो दर्शाता है कि राह अभी लंबी है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुम्मदिहट्टी बांध क्या है और यह विवाद क्यों है?
तुम्मदिहट्टी बांध तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर प्राणहिता नदी पर प्रस्तावित 152 मीटर ऊँचा बांध है। विवाद इसलिए है क्योंकि इसके निर्माण से महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्र जलमग्न हो सकते हैं, जिसके लिए महाराष्ट्र की सहमति और मुआवज़े पर सहमति ज़रूरी है।
रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र को क्या प्रस्ताव दिए हैं?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र में जलमग्न होने वाली भूमि के लिए पर्याप्त मुआवज़ा देने, दोनों राज्यों के संयुक्त खाते में धनराशि जमा करने और महाराष्ट्र द्वारा स्वतंत्र जलमग्नता सर्वेक्षण कराने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है।
देवेंद्र फडणवीस ने तेलंगाना के अनुरोध पर क्या कहा?
26 अक्टूबर 2026 को हुई मुलाकात में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तेलंगाना के अनुरोध पर पुनर्विचार की इच्छा जताई। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय से पहले तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ पूरी करनी होंगी।
संयुक्त अधिकारी समिति क्या काम करेगी?
दोनों राज्यों के सिंचाई विभागों के प्रधान सचिवों की अध्यक्षता में प्रस्तावित यह संयुक्त समिति बांध की ऊँचाई, जल उपलब्धता, जलमग्नता के प्रभाव, प्रभावित कृषि भूमि और मुआवज़े की ज़रूरतों की जाँच करेगी। दोनों राज्यों के आकलन और वैकल्पिक दृष्टिकोणों पर भी विचार किया जाएगा।
तुम्मदिहट्टी बांध मामले में आगे क्या होगा?
दोनों राज्यों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों को मिलकर एक स्पष्ट समय-सीमा और कार्ययोजना तैयार करनी है। तेलंगाना को निर्देश दिए गए हैं कि महाराष्ट्र द्वारा माँगी गई सभी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए और दस्तावेज़ों का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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