23 अक्टूबर 2026
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तुम्मिडिहट्टी बैराज पर महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस बातचीत को तैयार: तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी

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तुम्मिडिहट्टी बैराज पर महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस बातचीत को तैयार: तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी

सारांश

गोदावरी पर तुम्मिडिहट्टी बैराज की ऊँचाई को लेकर तेलंगाना और महाराष्ट्र के बीच सालों से अटकी बातचीत अब आगे बढ़ती दिख रही है। सीएम रेवंत रेड्डी के अनुसार सीएम फडणवीस वार्ता को तैयार हैं, लेकिन 148 से 152 मीटर ऊँचाई की वह खाई पाटना अभी बाकी है जिस पर 2 लाख एकड़ आदिवासी जमीन की सिंचाई निर्भर है।

मुख्य बातें

तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने 23 अक्टूबर 2026 को बताया कि महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस तुम्मिडिहट्टी बैराज पर बातचीत के लिए तैयार हैं।
प्रस्तावित बैराज गोदावरी नदी पर बनेगा और अविभाजित आदिलाबाद जिले की 2 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा देगा।
152 मीटर ऊँचाई पर 2,300 एकड़ और 150 मीटर ऊँचाई पर 1,000 एकड़ से कम भूमि डूब क्षेत्र में आएगी।
महाराष्ट्र पहले 148 मीटर ऊँचाई पर सहमत हो चुका है, किंतु तेलंगाना इसे पर्याप्त नहीं मानता।
अधिकारियों को केंद्रीय जल आयोग के समक्ष पेश करने के लिए पिछली बैठकों का पूरा रिकॉर्ड और विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 23 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोदावरी नदी पर प्रस्तावित तुम्मिडिहट्टी बैराज के निर्माण को लेकर अंतर-राज्यीय वार्ता के लिए सहमति जता दी है। रेवंत रेड्डी ने संबंधित अधिकारियों को महाराष्ट्र सरकार के साथ होने वाली इस अहम बैठक की शीघ्र तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में क्या हुई समीक्षा

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तुम्मिडिहट्टी बैराज के साथ-साथ डिंडी और अचंपेट लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क, सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, मंत्री जूपल्ली कृष्णा राव, दुड्डिला श्रीधर बाबू, राज्यसभा सांसद वेम नरेंद्र रेड्डी और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री को बताया कि यदि तुम्मिडिहट्टी में 152 मीटर या 150 मीटर ऊँचाई का बैराज बनाया जाता है, तो वहाँ से येल्लमपल्ली परियोजना तक कितने पानी का मोड़ संभव हो सकेगा।

डूब क्षेत्र और तकनीकी पहलू

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तुम्मिडिहट्टी बैराज के निर्माण से महाराष्ट्र के गाँवों को कोई बड़ा डूब खतरा नहीं होगा। इंजीनियरों के अनुसार, यदि बैराज की ऊँचाई 152 मीटर रखी जाती है तो लगभग 2,300 एकड़ भूमि प्रभावित हो सकती है, जबकि 150 मीटर ऊँचाई होने पर यह डूब क्षेत्र घटकर 1,000 एकड़ से कम रह जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को महाराष्ट्र में संभावित डूब क्षेत्र का सटीक आकलन करने और अधिकतम जल संग्रह व डायवर्जन सुनिश्चित करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

तेलंगाना की जल आवश्यकता और आदिलाबाद का महत्त्व

रेवंत रेड्डी ने रेखांकित किया कि यह बैराज अविभाजित आदिलाबाद जिले की लगभग 2 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आदिलाबाद वन क्षेत्र, आदिवासी आबादी और सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से पिछड़े इलाकों वाला जिला है, और यह परियोजना 'जल, जंगल और जमीन' पर निर्भर वनवासी समुदायों के लिए भी लाभकारी साबित होगी।

उन्होंने उम्मीद जताई कि महाराष्ट्र के साथ सकारात्मक चर्चा और सहमति बनने पर इस आदिवासी बहुल क्षेत्र की दशकों पुरानी जल समस्या का समाधान हो सकेगा।

पूर्व सहमति और अब की चुनौती

मुख्यमंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र पहले 148 मीटर ऊँचाई के बैराज पर सहमति जता चुका है, लेकिन इतनी कम ऊँचाई होने पर आवश्यक मात्रा में पानी का मोड़ संभव नहीं होगा। इसीलिए बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि जल उपलब्धता, डूब क्षेत्र और अन्य तकनीकी पहलुओं को शामिल करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि महाराष्ट्र को 152 मीटर ऊँचाई वाले बैराज के लिए राजी किया जा सके।

आगे की कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को केंद्रीय जल आयोग की मौजूदगी में दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच हुई पिछली बैठकों का पूरा रिकॉर्ड तैयार रखने और आयोग द्वारा माँगी गई सभी जानकारियाँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सिंचाई इंजीनियरों से कहा कि बैराज की ऊँचाई पर स्पष्टता आने के बाद तुम्मिडिहट्टी से येल्लमपल्ली तक जल प्रवाह के मार्ग और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तेज़ी से काम किया जाए। मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि महाराष्ट्र के साथ होने वाली वार्ता में तेलंगाना की जल आवश्यकताओं और राज्य के पक्ष को स्पष्ट एवं प्रभावी ढंग से रखा जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली बाधा 148 से 152 मीटर की वह महज 4 मीटर की ऊँचाई है जिस पर 2,300 एकड़ डूब क्षेत्र और तेलंगाना की 2 लाख एकड़ सिंचाई की उम्मीद दोनों टिकी हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि दोनों राज्यों में फ़िलहाल अलग-अलग दलों की सरकारें हैं, जो किसी भी राजनीतिक सहमति को तकनीकी से अधिक कूटनीतिक चुनौती बना देती हैं। केंद्रीय जल आयोग की भूमिका इस गतिरोध को तोड़ने में निर्णायक होगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुम्मिडिहट्टी बैराज क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
तुम्मिडिहट्टी बैराज गोदावरी नदी पर प्रस्तावित एक जलाशय परियोजना है, जिसका उद्देश्य तेलंगाना के अविभाजित आदिलाबाद जिले की लगभग 2 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। यह क्षेत्र आदिवासी बहुल और सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा है, जहाँ दशकों से जल संकट बना हुआ है।
महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच बैराज की ऊँचाई पर विवाद क्यों है?
महाराष्ट्र ने 148 मीटर ऊँचाई के बैराज पर पहले सहमति जताई है, लेकिन तेलंगाना के अधिकारियों का कहना है कि इस ऊँचाई पर येल्लमपल्ली परियोजना तक आवश्यक मात्रा में पानी मोड़ना संभव नहीं होगा। तेलंगाना 152 मीटर ऊँचाई चाहता है, जिससे महाराष्ट्र के लगभग 2,300 एकड़ क्षेत्र के डूबने की आशंका है।
क्या तुम्मिडिहट्टी बैराज से महाराष्ट्र के गाँवों को खतरा है?
अधिकारियों के अनुसार बैराज बनने से महाराष्ट्र के गाँवों को कोई बड़ा डूब खतरा नहीं होगा। 152 मीटर ऊँचाई पर लगभग 2,300 एकड़ और 150 मीटर ऊँचाई पर 1,000 एकड़ से कम भूमि प्रभावित हो सकती है।
इस परियोजना में केंद्रीय जल आयोग की क्या भूमिका है?
केंद्रीय जल आयोग दोनों राज्यों के बीच होने वाली अंतर-राज्यीय जल बैठकों का नोडल निकाय है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आयोग के समक्ष पेश करने के लिए पिछली बैठकों का पूरा रिकॉर्ड और माँगी गई सभी तकनीकी जानकारियाँ तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
आगे की बातचीत कब और कैसे होगी?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को महाराष्ट्र के साथ होने वाली बैठक की तैयारी तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए हैं। बातचीत केंद्रीय जल आयोग की उपस्थिति में होगी और इसके लिए एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है ताकि 152 मीटर ऊँचाई पर सहमति बनाई जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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