तुम्मिडिहट्टी बैराज पर महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस बातचीत को तैयार: तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 23 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोदावरी नदी पर प्रस्तावित तुम्मिडिहट्टी बैराज के निर्माण को लेकर अंतर-राज्यीय वार्ता के लिए सहमति जता दी है। रेवंत रेड्डी ने संबंधित अधिकारियों को महाराष्ट्र सरकार के साथ होने वाली इस अहम बैठक की शीघ्र तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में क्या हुई समीक्षा
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तुम्मिडिहट्टी बैराज के साथ-साथ डिंडी और अचंपेट लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क, सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, मंत्री जूपल्ली कृष्णा राव, दुड्डिला श्रीधर बाबू, राज्यसभा सांसद वेम नरेंद्र रेड्डी और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री को बताया कि यदि तुम्मिडिहट्टी में 152 मीटर या 150 मीटर ऊँचाई का बैराज बनाया जाता है, तो वहाँ से येल्लमपल्ली परियोजना तक कितने पानी का मोड़ संभव हो सकेगा।
डूब क्षेत्र और तकनीकी पहलू
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तुम्मिडिहट्टी बैराज के निर्माण से महाराष्ट्र के गाँवों को कोई बड़ा डूब खतरा नहीं होगा। इंजीनियरों के अनुसार, यदि बैराज की ऊँचाई 152 मीटर रखी जाती है तो लगभग 2,300 एकड़ भूमि प्रभावित हो सकती है, जबकि 150 मीटर ऊँचाई होने पर यह डूब क्षेत्र घटकर 1,000 एकड़ से कम रह जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को महाराष्ट्र में संभावित डूब क्षेत्र का सटीक आकलन करने और अधिकतम जल संग्रह व डायवर्जन सुनिश्चित करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
तेलंगाना की जल आवश्यकता और आदिलाबाद का महत्त्व
रेवंत रेड्डी ने रेखांकित किया कि यह बैराज अविभाजित आदिलाबाद जिले की लगभग 2 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आदिलाबाद वन क्षेत्र, आदिवासी आबादी और सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से पिछड़े इलाकों वाला जिला है, और यह परियोजना 'जल, जंगल और जमीन' पर निर्भर वनवासी समुदायों के लिए भी लाभकारी साबित होगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि महाराष्ट्र के साथ सकारात्मक चर्चा और सहमति बनने पर इस आदिवासी बहुल क्षेत्र की दशकों पुरानी जल समस्या का समाधान हो सकेगा।
पूर्व सहमति और अब की चुनौती
मुख्यमंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र पहले 148 मीटर ऊँचाई के बैराज पर सहमति जता चुका है, लेकिन इतनी कम ऊँचाई होने पर आवश्यक मात्रा में पानी का मोड़ संभव नहीं होगा। इसीलिए बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि जल उपलब्धता, डूब क्षेत्र और अन्य तकनीकी पहलुओं को शामिल करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि महाराष्ट्र को 152 मीटर ऊँचाई वाले बैराज के लिए राजी किया जा सके।
आगे की कार्ययोजना
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को केंद्रीय जल आयोग की मौजूदगी में दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच हुई पिछली बैठकों का पूरा रिकॉर्ड तैयार रखने और आयोग द्वारा माँगी गई सभी जानकारियाँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सिंचाई इंजीनियरों से कहा कि बैराज की ऊँचाई पर स्पष्टता आने के बाद तुम्मिडिहट्टी से येल्लमपल्ली तक जल प्रवाह के मार्ग और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तेज़ी से काम किया जाए। मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि महाराष्ट्र के साथ होने वाली वार्ता में तेलंगाना की जल आवश्यकताओं और राज्य के पक्ष को स्पष्ट एवं प्रभावी ढंग से रखा जाए।