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हरविंदर सिंह ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता, चीन को 5-1 से हराया

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हरविंदर सिंह ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता, चीन को 5-1 से हराया

सारांश

कैथल के पोलियो प्रभावित तीरंदाज हरविंदर सिंह ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में चीन को 5-1 से हराकर रिकर्व युगल स्वर्ण पदक जीता — खेतों में अभ्यास से शुरू हुआ यह सफर अब जापान के आइची-नागोया के पोडियम तक पहुँच गया है।

मुख्य बातें

हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुष रिकर्व युगल स्वर्ण पदक जीता।
फाइनल में मेजबान चीन को 5-1 (35-35, 37-36, 38-36) से पराजित किया, स्थान: आइची-नागोया, जापान ।
हरविंदर हरियाणा के कैथल जिले के अजीत नगर गाँव के रहने वाले हैं और पद्मश्री से सम्मानित हैं।
डेढ़ साल की उम्र में पोलियो से प्रभावित हुए हरविंदर ने 2012 में तीरंदाजी शुरू की, 2018 जकार्ता में भी स्वर्ण जीता था।
पिता परमजीत सिंह ने कोविड के दौरान खेतों में अभ्यास की व्यवस्था की; हरविंदर पंजाबी यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी कर रहे हैं।

पद्मश्री से सम्मानित पैरा तीरंदाज हरविंदर सिंह ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में एक बार फिर इतिहास रच दिया। हरियाणा के कैथल जिले के अजीत नगर गाँव के इस खिलाड़ी ने झारखंड के विजय सुंडी के साथ मिलकर पुरुष रिकर्व युगल स्पर्धा में मेजबान चीन को 5-1 से पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारतीय जोड़ी की यह जीत देश के पैरा खेल इतिहास में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ती है।

फाइनल मुकाबले का रोमांच

फाइनल में भारत का सामना चीन के डुओ युन और झाओ लिक्सुए की जोड़ी से हुआ। पहले सेट में दोनों टीमें 35-35 की बराबरी पर रहीं, जिससे मुकाबला अत्यंत रोमांचक हो गया। इसके बाद हरविंदर और विजय ने ज़बरदस्त वापसी करते हुए दूसरा सेट 37-36 और तीसरा सेट 38-36 से अपने नाम किया। लगातार दो सेट जीतकर भारतीय जोड़ी ने मुकाबला 5-1 से जीत लिया और स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।

संघर्ष और समर्पण की कहानी

25 फरवरी 1991 को जन्मे हरविंदर सिंह का जीवन अदम्य साहस की मिसाल है। डेढ़ साल की उम्र में डेंगू से पीड़ित होने के बाद उपचार के दौरान दिए गए इंजेक्शन के दुष्प्रभाव के कारण वे पोलियो से प्रभावित हो गए। शारीरिक चुनौती को दरकिनार कर उन्होंने 2012 में टेलीविज़न पर तीरंदाजी देखकर इस खेल में रुचि जगाई और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

तीरंदाजी में उनकी औपचारिक यात्रा 2017 की पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप से शुरू हुई। 2018 में जकार्ता में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मज़बूत की। कोविड-19 महामारी के दौरान जब खेल गतिविधियाँ लगभग बंद थीं, तब उनके पिता परमजीत सिंह ने खेतों में ही अभ्यास की व्यवस्था कर दी ताकि प्रशिक्षण बाधित न हो।

परिवार और गाँव में जश्न

स्वर्ण पदक जीतने की खबर मिलते ही अजीत नगर गाँव में उत्सव जैसा माहौल छा गया। परिजनों ने मिठाइयाँ बाँटकर खुशी मनाई और गाँव वालों ने फोन व संदेशों के ज़रिए बधाइयाँ दीं। पिता परमजीत सिंह ने गर्व जताते हुए कहा, 'बेटे की सफलता हमारे लिए गर्व का क्षण है।' उन्होंने बताया कि हरविंदर बचपन से ही पढ़ाई में तेज़ थे और चीका से 12वीं की पढ़ाई के बाद 2010 में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला चले गए।

हरविंदर की पत्नी मनप्रीत कौर ने कहा कि उन्हें अपने पति की उपलब्धि पर गर्व है और उनके घर लौटने पर भव्य स्वागत किया जाएगा।

खेल के साथ शिक्षा में भी अग्रणी

हरविंदर सिंह खेल के साथ-साथ शिक्षा को भी समान महत्व देते हैं। वह पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से अर्थशास्त्र में पीएचडी कर रहे हैं। उनका मानना है कि खेल और शिक्षा दोनों जीवन को आगे बढ़ाने के अहम साधन हैं।

आगे क्या

यह जीत हरविंदर के करियर की एक और ऊँचाई है और भारत के पैरा खेलों में हरियाणा की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। पैरा खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियाँ युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करती हैं और देश में पैरा स्पोर्ट्स के प्रति जागरूकता बढ़ाती हैं। हरविंदर सिंह की यह सफलता आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत की पैरा तीरंदाजी टीम के लिए नई उम्मीदें जगाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की पैरा खेल नीति की असली परीक्षा है — जहाँ संसाधनों की कमी के बावजूद व्यक्तिगत संकल्प ने राष्ट्रीय गौरव दिलाया। गौरतलब है कि कोविड के दौरान खेतों में अभ्यास करने वाले इस खिलाड़ी को कभी हाई-प्रोफाइल क्रिकेटरों जैसी मीडिया कवरेज नहीं मिली, फिर भी वह लगातार अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुँच रहे हैं। यह उस व्यापक प्रवृत्ति को उजागर करता है जिसमें पैरा एथलीट राष्ट्रीय चर्चा से बाहर रहते हैं जबकि उनके प्रदर्शन अक्सर ओलंपिक एथलीटों से कम नहीं होते। सरकार और मीडिया दोनों को यह पूछना होगा कि इन खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी को हरविंदर के खेतों-वाले अभ्यास का रास्ता क्यों चुनना पड़े।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरविंदर सिंह ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
हरविंदर सिंह ने विजय सुंडी के साथ मिलकर पुरुष रिकर्व युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। भारतीय जोड़ी ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित फाइनल में चीन को 5-1 से हराया।
हरविंदर सिंह कौन हैं और वे कहाँ के रहने वाले हैं?
हरविंदर सिंह हरियाणा के कैथल जिले के अजीत नगर गाँव के रहने वाले पैरा तीरंदाज हैं, जिन्हें भारत सरकार पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। 25 फरवरी 1991 को जन्मे हरविंदर बचपन में पोलियो से प्रभावित हुए थे, लेकिन 2012 से तीरंदाजी शुरू कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
फाइनल मुकाबले में सेट-दर-सेट स्कोर क्या रहा?
पहला सेट 35-35 की बराबरी पर रहा, दूसरा सेट भारत ने 37-36 से और तीसरा सेट 38-36 से जीता। इस तरह हरविंदर-विजय की जोड़ी ने मुकाबला 5-1 से अपने नाम किया।
हरविंदर सिंह ने तीरंदाजी की शुरुआत कैसे और कब की?
हरविंदर ने 2012 में टेलीविज़न पर तीरंदाजी देखकर इस खेल में रुचि जगाई और इसके बाद इसे गंभीरता से अपनाया। उनका औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सफर 2017 की पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप से शुरू हुआ, जिसके बाद 2018 जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था।
हरविंदर सिंह का व्यक्तिगत और शैक्षणिक जीवन कैसा है?
हरविंदर सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से अर्थशास्त्र में पीएचडी कर रहे हैं और वे खेल व शिक्षा को समान महत्व देते हैं। उनकी पत्नी मनप्रीत कौर और पिता परमजीत सिंह उनकी उपलब्धियों पर गर्व जताते हैं; पिता ने कोविड के दौरान उनके लिए खेतों में अभ्यास की व्यवस्था की थी।
राष्ट्र प्रेस
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