हरविंदर सिंह ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता, चीन को 5-1 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
पद्मश्री से सम्मानित पैरा तीरंदाज हरविंदर सिंह ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में एक बार फिर इतिहास रच दिया। हरियाणा के कैथल जिले के अजीत नगर गाँव के इस खिलाड़ी ने झारखंड के विजय सुंडी के साथ मिलकर पुरुष रिकर्व युगल स्पर्धा में मेजबान चीन को 5-1 से पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारतीय जोड़ी की यह जीत देश के पैरा खेल इतिहास में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ती है।
फाइनल मुकाबले का रोमांच
फाइनल में भारत का सामना चीन के डुओ युन और झाओ लिक्सुए की जोड़ी से हुआ। पहले सेट में दोनों टीमें 35-35 की बराबरी पर रहीं, जिससे मुकाबला अत्यंत रोमांचक हो गया। इसके बाद हरविंदर और विजय ने ज़बरदस्त वापसी करते हुए दूसरा सेट 37-36 और तीसरा सेट 38-36 से अपने नाम किया। लगातार दो सेट जीतकर भारतीय जोड़ी ने मुकाबला 5-1 से जीत लिया और स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।
संघर्ष और समर्पण की कहानी
25 फरवरी 1991 को जन्मे हरविंदर सिंह का जीवन अदम्य साहस की मिसाल है। डेढ़ साल की उम्र में डेंगू से पीड़ित होने के बाद उपचार के दौरान दिए गए इंजेक्शन के दुष्प्रभाव के कारण वे पोलियो से प्रभावित हो गए। शारीरिक चुनौती को दरकिनार कर उन्होंने 2012 में टेलीविज़न पर तीरंदाजी देखकर इस खेल में रुचि जगाई और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
तीरंदाजी में उनकी औपचारिक यात्रा 2017 की पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप से शुरू हुई। 2018 में जकार्ता में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मज़बूत की। कोविड-19 महामारी के दौरान जब खेल गतिविधियाँ लगभग बंद थीं, तब उनके पिता परमजीत सिंह ने खेतों में ही अभ्यास की व्यवस्था कर दी ताकि प्रशिक्षण बाधित न हो।
परिवार और गाँव में जश्न
स्वर्ण पदक जीतने की खबर मिलते ही अजीत नगर गाँव में उत्सव जैसा माहौल छा गया। परिजनों ने मिठाइयाँ बाँटकर खुशी मनाई और गाँव वालों ने फोन व संदेशों के ज़रिए बधाइयाँ दीं। पिता परमजीत सिंह ने गर्व जताते हुए कहा, 'बेटे की सफलता हमारे लिए गर्व का क्षण है।' उन्होंने बताया कि हरविंदर बचपन से ही पढ़ाई में तेज़ थे और चीका से 12वीं की पढ़ाई के बाद 2010 में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला चले गए।
हरविंदर की पत्नी मनप्रीत कौर ने कहा कि उन्हें अपने पति की उपलब्धि पर गर्व है और उनके घर लौटने पर भव्य स्वागत किया जाएगा।
खेल के साथ शिक्षा में भी अग्रणी
हरविंदर सिंह खेल के साथ-साथ शिक्षा को भी समान महत्व देते हैं। वह पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से अर्थशास्त्र में पीएचडी कर रहे हैं। उनका मानना है कि खेल और शिक्षा दोनों जीवन को आगे बढ़ाने के अहम साधन हैं।
आगे क्या
यह जीत हरविंदर के करियर की एक और ऊँचाई है और भारत के पैरा खेलों में हरियाणा की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। पैरा खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियाँ युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करती हैं और देश में पैरा स्पोर्ट्स के प्रति जागरूकता बढ़ाती हैं। हरविंदर सिंह की यह सफलता आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत की पैरा तीरंदाजी टीम के लिए नई उम्मीदें जगाती है।