एशियन गेम्स 2026: गुरिंदरवीर और अनिमेष 100 मीटर सेमीफाइनल में चूके, फाइनल से बाहर
सारांश
मुख्य बातें
एशियन गेम्स 2026 में भारत के स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहे, और इसी के साथ 25 सितंबर 2026 को उनके मेडल जीतने का सपना टूट गया। दोनों भारतीय एथलीट हीट में क्वालिफाई करने के बाद सेमीफाइनल की बाधा पार नहीं कर सके।
हीट से सेमीफाइनल तक का सफर
अनिमेष कुजूर ने हीट 1 में 10.36 सेकंड के साथ तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि गुरिंदरवीर सिंह ने हीट 4 में 10.38 सेकंड के साथ दूसरा स्थान प्राप्त कर सेमीफाइनल के लिए सीधे प्रवेश किया। गौरतलब है कि इसी हीट दौर में थाईलैंड के पुरीपोल बूनसन ने 9.95 सेकंड का समय दर्ज किया, जो एशियन गेम्स के मौजूदा रिकॉर्ड से मात्र 0.03 सेकंड अधिक था।
सेमीफाइनल में क्या हुआ
सेमीफाइनल की दूसरी हीट में गुरिंदरवीर सिंह ने 10.32 सेकंड का समय निकाला, लेकिन वह पाँचवें स्थान पर ही रह सके। दौड़ की शुरुआत में वह प्रतिस्पर्धा में बने रहे, परंतु अंतिम चरण में तेज़ रफ्तार धावकों के बीच अपनी स्थिति कायम नहीं रख पाए। इस हीट में ओमान के अली बालूशी पहले और चीन के झेन्ये जी दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल में पहुँचे।
अनिमेष कुजूर अपनी सेमीफाइनल हीट में 10.38 सेकंड के साथ सातवें स्थान पर रहे और आगे नहीं बढ़ सके। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय स्प्रिंट टीम से बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही थीं।
महिला हेप्टाथलॉन में भारत का प्रदर्शन
महिलाओं की हेप्टाथलॉन स्पर्धा में पूजा ने 5,368 अंकों के साथ छठा स्थान और अनामिका कोझिंजपराम्बिल ने 5,234 अंकों के साथ आठवाँ स्थान हासिल किया। अंतिम इवेंट 800 मीटर में पूजा का समय 2:16.43 रहा, जबकि अनामिका ने 2:18.06 के साथ उस इवेंट में तीसरा स्थान पाया। हालाँकि दोनों कुल मिलाकर पदक से दूर रहीं, लेकिन सात विविध स्पर्धाओं वाली इस कठिन प्रतियोगिता में उनका प्रयास सराहनीय रहा।
हेप्टाथलॉन के पदक विजेता
जापान की यूरी तनाका ने 5,920 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता। उनकी देशवासी नानाका काजिकी 5,673 अंकों के साथ रजत और कजाकिस्तान की अलीना चिस्त्याकोवा 5,568 अंकों के साथ कांस्य पदक लेकर लौटीं। उज्बेकिस्तान की उगिलॉय नोरबोएवा 5,412 अंकों के साथ चौथे और चीनी ताइपे की काई-जुआन चेन 5,378 अंकों के साथ पाँचवें स्थान पर रहीं।
आगे क्या
भारतीय एथलेटिक्स दल के लिए नागोया में अभी और स्पर्धाएँ शेष हैं, और टीम अन्य ट्रैक व फील्ड इवेंट में पदक की उम्मीद बनाए हुए है। स्प्रिंट स्पर्धा में इस प्रदर्शन से भारतीय कोचिंग स्टाफ के सामने यह सवाल ज़रूर उठता है कि सेमीफाइनल के दबाव में गति को कैसे बनाए रखा जाए।