गुरिंदरवीर सिंह का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में निराशाजनक डेब्यू, 100 मीटर हीट्स में सेमीफाइनल से चूके
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक गुरिंदरवीर सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा के हीट राउंड में सेमीफाइनल की दहलीज़ पार नहीं कर सके, जिससे 27 जुलाई को ग्लासगो में एथलेटिक्स प्रतियोगिता के पहले दिन भारत की पदक उम्मीदों को गहरा झटका लगा। यह गुरिंदरवीर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था और उनसे बड़ी अपेक्षाएँ थीं।
हीट में क्या हुआ
हीट 4 में लेन पाँच से दौड़ते हुए 25 वर्षीय गुरिंदरवीर ने अच्छी शुरुआत की और रेस के शुरुआती चरण में जमैका के रोहन वॉटसन के साथ कदमताल बनाए रखी। हालाँकि, 9.91 सेकंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ वाले वॉटसन ने अंतिम मीटरों में रफ़्तार बढ़ाई और 10.13 सेकंड में फिनिश लाइन पार की। गुरिंदरवीर 10.39 सेकंड के साथ हीट में दूसरे स्थान पर रहे।
रेस 1.9 मीटर/सेकंड की वैध टेलविंड के साथ हुई। 73 एथलीटों में से केवल सबसे तेज़ 17 ही अगले राउंड में आगे बढ़े। गुरिंदरवीर को 28वाँ स्थान मिला और वे सेमीफाइनल के लिए आवश्यक 10.24 सेकंड के क्वालीफिकेशन समय से 0.15 सेकंड पीछे रह गए।
राष्ट्रीय रिकॉर्ड की पृष्ठभूमि
ग्लासगो में यह प्रदर्शन इसलिए भी अप्रत्याशित रहा क्योंकि गुरिंदरवीर ने मई में रांची के फेडरेशन कप में भारतीय स्प्रिंटिंग इतिहास रच दिया था। पंजाब के इस धावक ने पहले सेमीफाइनल में 10.17 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया — अनिमेष कुजूर के 10.18 सेकंड के पिछले मार्क को पीछे छोड़ते हुए — और फिर फाइनल में इसे और बेहतर करके 10.09 सेकंड कर लिया।
इस प्रदर्शन के साथ गुरिंदरवीर 10.10 सेकंड का बैरियर तोड़ने वाले पहले भारतीय पुरुष धावक बन गए थे। उस उपलब्धि के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक की उम्मीदें स्वाभाविक रूप से बढ़ गई थीं।
भारत पर असर
गुरिंदरवीर का हीट्स में ही बाहर होना भारतीय स्प्रिंट अभियान के लिए निराशाजनक शुरुआत है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान मज़बूत करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि हीट में दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद उनका समय समग्र क्वालीफिकेशन कट से कम रहा, जो प्रतियोगिता के ऊँचे स्तर को दर्शाता है।
आगे क्या
गुरिंदरवीर सिंह का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 100 मीटर अभियान समाप्त हो गया है। हालाँकि यह डेब्यू अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा, 10.09 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड उनकी क्षमता का प्रमाण बना रहेगा। आने वाले अंतरराष्ट्रीय सत्र में वे इस अनुभव से सबक लेकर और मज़बूती से वापसी कर सकते हैं।