गुरिंदर वीर सिंह ने 10.09 सेकंड में रचा इतिहास, 100 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा; कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफाई
सारांश
मुख्य बातें
जालंधर के युवा धावक गुरिंदर वीर सिंह ने रांची में आयोजित 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर भारतीय एथलेटिक्स में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। 24 मई को हुए इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने न केवल पंजाब का नाम देशभर में रोशन किया, बल्कि गुरिंदर को कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी क्वालीफाई करा दिया।
मुख्य घटनाक्रम
फाइनल रेस से पहले ही गुरिंदर ने अपने चेस्ट नंबर के पीछे 10.10 सेकंड का लक्ष्य लिख रखा था — और उन्होंने उससे भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10.09 सेकंड का समय निकाला। रेस खत्म होते ही उन्होंने अपनी छाती पर लगे नंबर की ओर इशारा कर जश्न मनाया। यह आत्मविश्वास और तैयारी का दुर्लभ संयोग था।
अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स कोच सरबजीत सिंह ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स की क्वालीफिकेशन सीमा 10.16 सेकंड थी, जिसे गुरिंदर ने सहजता से पार कर लिया। कोच के अनुसार, गुरिंदर अब एशिया के शीर्ष धावकों में शामिल हो गए हैं।
परिवार की प्रतिक्रिया
रेस खत्म होते ही गुरिंदर ने सबसे पहला फोन अपनी माँ गुरविंदर कौर को किया। भावुक होकर उन्होंने पूछा — 'देखी मेरी रेस?' माँ ने खुशी से जवाब दिया — 'हाँ बेटा, तूने कमाल कर दिया।' पिता कमलजीत सिंह से बात करते हुए गुरिंदर मुस्कुराते हुए बोले — 'डेडी दस्स फेर किदां?' करीब 90 वर्षीय दादी चरण कौर ने लड्डू खिलाकर पोते को आशीर्वाद दिया और घर के बाहर बधाई देने वालों की भीड़ लग गई।
खेल परिवार की विरासत
गुरिंदर की खेल-प्रतिभा विरासत में मिली है। उनके दादा तरसेम सिंह कबड्डी खिलाड़ी रह चुके हैं, जबकि पिता कमलजीत सिंह पंजाब पुलिस से एएसआई पद से सेवानिवृत्त होने के साथ-साथ वॉलीबॉल खिलाड़ी भी रहे हैं। पिता ने बताया कि बचपन में गाँव की पगडंडियों और खेतों में गुरिंदर की तेज़ रफ्तार देखकर परिवार को उनकी प्रतिभा का अहसास हो गया था।
12 साल की उम्र में गुरिंदर ने गंभीरता से प्रशिक्षण शुरू किया। पिता उन्हें साथ दौड़ने ले जाते थे, लेकिन कुछ ही समय में गुरिंदर उन्हें भी पीछे छोड़ने लगे। वह रोज़ करीब 8 घंटे अभ्यास करते थे और अनुशासन के मामले में कोई समझौता नहीं करते थे।
आहार और अनुशासन
माँ गुरविंदर कौर ने बताया कि गुरिंदर की डाइट का विशेष ध्यान रखा गया — घर का शुद्ध घी, दूध, ड्राई फ्रूट, पिन्नियाँ, खजूर की बर्फी और प्रोटीन युक्त भोजन उनकी ताकत का आधार रहा। 2014 में जब गुरिंदर जालंधर में ट्रेनिंग के लिए गए, तो परिवार हर हफ्ते दो बार उनके लिए विशेष डाइट लेकर जाता था।
सरकार और विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर गुरिंदर को बधाई देते हुए कहा कि इस युवा खिलाड़ी ने दो दिनों के भीतर दूसरा राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर देश और दुनिया में पंजाब का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि पूरे पंजाब को इस उपलब्धि पर गर्व है।
कोच सरबजीत सिंह ने कहा कि भारत में 100 मीटर दौड़ में अब तक उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली थी, लेकिन गुरिंदर का रिकॉर्ड आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया — 'यह सिर्फ शुरुआत है, असली लक्ष्य ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में मेडल जीतना है।'
आगे की राह
गुरिंदर वीर सिंह महान धावक मिल्खा सिंह और उसैन बोल्ट को अपना आदर्श मानते हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्हीं की तरह करिश्माई प्रदर्शन का सपना रखते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय एथलेटिक्स विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है — गुरिंदर का यह रिकॉर्ड उस दिशा में एक निर्णायक कदम है।